मेरठ (Meerut News): उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण और भू-माफियाओं के खिलाफ प्रशासन का 'बुलडोजर एक्शन' लगातार जारी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को मेरठ शहर के बीचोंबीच केसरगंज मंडी इलाके में एक बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई देखने को मिली। यहां समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता, पूर्व पार्षद और कुख्यात हिस्ट्रीशीटर सईद सज्जू (Saeed Sajju) के अवैध साम्राज्य पर जिला पंचायत का बुलडोजर पूरी ताकत के साथ गरजा। प्रशासन ने सख्त तेवर अपनाते हुए सईद सज्जू द्वारा बनाए गए कपड़ों के दो आलीशान और विशाल शोरूमों को मिनटों में मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। इस कार्रवाई के जरिए जिला पंचायत ने शहर के बीचोंबीच स्थित अपनी अरबों रुपये की बेशकीमती और ऐतिहासिक जमीन को भू-माफिया के चंगुल से सफलतापूर्वक आजाद करा लिया है।Read also:-कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! अब ATM और UPI से निकलेगा PF का पैसा, कंपनी के चक्कर काटने की झंझट खत्म; जानिए EPFO 3.0 के नए नियम
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यह पूरी कार्रवाई न केवल एक अवैध निर्माण को ढहाने की थी, बल्कि यह सिस्टम को चुनौती देने वाले एक अपराधी के रसूख को मिट्टी में मिलाने का भी स्पष्ट संदेश थी। आइए, इस पूरे घटनाक्रम और इसके पीछे की इनसाइड स्टोरी को विस्तार से समझते हैं।
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क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुआ जमीन का खेल?
\r\n\r\nयह पूरा विवाद केसरगंज मंडी के पास स्थित 154 साल पुरानी 'मॉडल स्कूल' की बेशकीमती और ऐतिहासिक (हेरिटेज) जमीन से जुड़ा हुआ है। शहर के बीचोंबीच 0.974 हेक्टेयर भूमि में बनी इस हेरिटेज बिल्डिंग और जमीन का मालिकाना हक जिला पंचायत के पास है। नियमों के अनुसार, जिला पंचायत ने ऑक्शन (नीलामी) के जरिए सिर्फ 60 वर्ग मीटर जमीन लीज पर दी थी। लेकिन हिस्ट्रीशीटर सईद सज्जू ने अपने रसूख और खौफ का फायदा उठाते हुए अपने एक करीबी के नाम पर यह ऑक्शन लिया और नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए वहां चंद ही दिनों में कपड़ों के दो बड़े शोरूम खड़े कर दिए।
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इस निर्माण के लिए न तो विकास प्राधिकरण (Meerut Development Authority - MDA) से कोई नक्शा पास कराया गया था और न ही नाले के किनारे छोड़ी जाने वाली अनिवार्य जगह का ध्यान रखा गया। यह पूरा निर्माण पुलिस चौकी के ठीक सामने हुआ, जो प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे एक बड़े खेल की ओर इशारा करता है।
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एमडीए की सील तोड़ी, रसूख ऐसा कि बिजली विभाग ने दिए कनेक्शन
\r\n\r\nसईद सज्जू का रसूख ऐसा था कि जब शुरुआत में अवैध निर्माण की शिकायतें हुईं और एमडीए (MDA) ने जांच की, तो शिकायतें बिल्कुल सच पाई गईं। इसके बाद विकास प्राधिकरण ने कार्रवाई करते हुए 15 दिन के भीतर दो बार इन शोरूमों पर सील लगाई। लेकिन हिस्ट्रीशीटर की दबंगई देखिए, उसने दोनों बार प्रशासन की सील को सरेआम तोड़ दिया और निर्माण कार्य जारी रखा। हैरानी की बात यह है कि सील तोड़े जाने के बाद विकास प्राधिकरण अचानक खामोश हो गया और हिस्ट्रीशीटर के खिलाफ कोई मुकदमा तक दर्ज नहीं कराया गया।
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बात यहीं खत्म नहीं होती। जिस अवैध निर्माण का मामला विवादों में था और जिसे प्राधिकरण अवैध घोषित कर चुका था, उसी अवैध शोरूम को बिजली विभाग द्वारा दो कॉमर्शियल बिजली कनेक्शन भी अलॉट कर दिए गए। यह इस बात का प्रमाण था कि एक हिस्ट्रीशीटर का इकबाल सिस्टम के कायदे-कानूनों पर भारी पड़ रहा था।
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कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा भारी: 5 मई को आया ऐतिहासिक फैसला
\r\n\r\nजब प्रशासन के एक हिस्से ने आंखें मूंद लीं, तब दोबारा शिकायतें तेज हुईं। इन शिकायतों के आधार पर आखिरकार जिला पंचायत ने सख्त कदम उठाते हुए सपा नेता की इस जमीन की लीज को ही कैंसिल (रद्द) कर दिया। लीज कैंसिल होने से बौखलाया सईद सज्जू खुद को कानून से ऊपर मानते हुए जिला पंचायत के खिलाफ कोर्ट चला गया। उसे उम्मीद थी कि वह कानूनी दांवपेच में प्रशासन को उलझा देगा।
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लेकिन कानून की अदालत में माफिया के रसूख की नहीं, बल्कि तथ्यों की जीत हुई। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने 5 मई को जिला पंचायत के हक में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायालय ने सभी साक्ष्यों और दस्तावेजों को देखने के बाद पूरी शिकायत को 100% सही माना और स्पष्ट कहा कि यह पूरा निर्माण पूरी तरह से नियमविरुद्ध और अवैध है। कोर्ट ने जिला पंचायत को इस अवैध निर्माण को गिराने और अपनी जमीन वापस लेने का आदेश दे दिया।
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शुक्रवार का बुलडोजर एक्शन: छावनी में तब्दील हुआ केसरगंज
\r\n\r\nकोर्ट का स्पष्ट आदेश मिलते ही जिला पंचायत की टीम ने बिना कोई समय गंवाए शुक्रवार को ध्वस्तीकरण की बड़ी योजना बनाई। चूंकि मामला एक पूर्व पार्षद और 55 से ज्यादा मुकदमों वाले हिस्ट्रीशीटर से जुड़ा था, इसलिए किसी भी संभावित हंगामे या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल की व्यवस्था की गई।
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शुक्रवार की सुबह होते ही केसरगंज मंडी का इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। रेलवे रोड थाना पुलिस के साथ-साथ भारी संख्या में पीएसी (PAC) के जवान और महिला पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया। इलाके की घेराबंदी करने के बाद जिला पंचायत की टीम अपने भारी-भरकम बुलडोजरों के साथ मौके पर पहुंची। देखते ही देखते बुलडोजर ने सईद सज्जू के उन दोनों अवैध शोरूमों की दीवारों को तोड़ना शुरू कर दिया। कुछ ही घंटों की कार्रवाई में करोड़ों की लागत से बनाए गए वो शोरूम ताश के पत्तों की तरह ढह गए। जिला पंचायत ने मलबा हटाकर जमीन पर अपनी बाउंड्री और बोर्ड लगाकर अरबों की संपत्ति पर अपना कानूनी कब्जा ले लिया।
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सईद सज्जू का आपराधिक इतिहास: 55 मुकदमे और कब्रिस्तान पर कब्जे की कोशिश
\r\n\r\nजिस सईद सज्जू के खिलाफ यह कार्रवाई हुई है, वह कोई आम व्यक्ति नहीं है। वह इसी इलाके का पूर्व पार्षद रह चुका है और वर्तमान में समाजवादी पार्टी (सपा) से जुड़ा हुआ है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह थाने का मजारिया हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर हत्या के प्रयास, रंगदारी, कब्जा, बलवा सहित 55 से अधिक संगीन मुकदमे दर्ज हैं।
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हाल ही में, फरवरी 2026 में भी सईद सज्जू का नाम एक बड़े विवाद में सामने आया था। उस दौरान दर्जनों स्थानीय लोगों और कब्रिस्तान कमेटी के पदाधिकारियों ने एसएसपी (SSP) कार्यालय का घेराव कर जोरदार हंगामा किया था। लोगों का आरोप था कि सज्जू पंजाबियान कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जा करने की नीयत से वहां स्क्रैप डलवा रहा है और टीन शेड डालने की कोशिश कर रहा है। जब क्षेत्रवासियों ने इस कृत्य का विरोध किया, तो पूर्व पार्षद और उसके गुंडों ने स्थानीय लोगों को खुलेआम जान से मारने की धमकियां दी थीं।
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दरोगा के साथ वायरल फोटो और पुलिस की संदिग्ध भूमिका
\r\n\r\nकब्रिस्तान विवाद के दौरान ही एक और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई थी। पूर्व पार्षद और हिस्ट्रीशीटर सईद उर्फ सज्जू का एक फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें वह केसरगंज पुलिस चौकी में तैनात दरोगा मुकेश कुमार के साथ बड़े आराम से बैठा हुआ नजर आ रहा था। इस तस्वीर ने पुलिस और भू-माफिया के गठजोड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। मामले के तूल पकड़ने पर सीओ कैंट (CO Cantt) ने तुरंत संज्ञान लिया और आरोपी दरोगा मुकेश कुमार पर विभागीय जांच के सख्त आदेश दिए थे। यह दर्शाता है कि सज्जू स्थानीय पुलिस चौकी के स्तर पर भी किस तरह से अपना प्रभाव बनाए हुए था।
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आगे भी जारी रहेगा एक्शन: रडार पर हैं कई और भू-माफिया
\r\n\r\nजिला पंचायत विभाग के आला अधिकारियों का दावा है कि सईद सज्जू के खिलाफ की गई यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमानुसार और कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में की गई है। इस कार्रवाई ने केसरगंज और उसके आसपास के इलाके में सरकारी जमीनों पर कब्जा कर बैठे अन्य भू-माफियाओं में भी दहशत पैदा कर दी है।
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प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, केसरगंज इलाके में करोड़ों रुपये की अन्य सरकारी और वक्फ संपत्तियों पर भी इसी तरह का अवैध निर्माण वर्षों से फल-फूल रहा है। चूंकि सईद सज्जू ने एक स्कूल की जमीन पर भी कब्जा कर रखा था, ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली भी अब शक के दायरे में आ गई है और उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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जिला पंचायत और स्थानीय प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शहर में अन्य स्थानों पर भी ऐसे अवैध कब्जों का चिह्नीकरण (Identification) पूरा कर लिया गया है। जिन भी लोगों ने सरकारी, पंचायत या सार्वजनिक भूमि पर अवैध इमारतें खड़ी की हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में मेरठ की सड़कों पर ऐसे और भी बुलडोजर एक्शन देखने को मिल सकते हैं।
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मेरठ में हुई यह कार्रवाई एक स्पष्ट उदाहरण है कि यदि प्रशासन दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाए और कानूनी प्रक्रिया का सही ढंग से पालन हो, तो बड़े से बड़े माफिया का रसूख भी बुलडोजर के आगे ज्यादा देर तक नहीं टिक सकता। फिलहाल, 154 साल पुरानी हेरिटेज जमीन अब सुरक्षित है और जिला पंचायत के कब्जे में आ चुकी है।
Sabse pehle comment karne wale banein.