मेरठ (सरधना): त्योहार का दिन खुशियों, मेल-मिलाप और भाईचारे का प्रतीक होता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरधना क्षेत्र के मेहरमती गणेशपुर गांव में इस बार की ईद खुशियों की जगह मातम, चीख-पुकार और अपनों के खून से रंग गई। एक छोटी सी कहासुनी और जुए के फड़ से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते एक खौफनाक दोहरे हत्याकांड (Double Murder) में तब्दील हो गया।READ ALSO:-बिजनौर में कानून व्यवस्था पर SP अभिषेक झा का कड़ा एक्शन: पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल, कई चौकी इंचार्जों के कार्यक्षेत्र बदले
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गांव के मौजूदा प्रधान शहीद उर्फ सईदु के दो सगे भाइयों— भूरा और सईमुद्दीन— की सरेआम चाकुओं से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई। इस वारदात के बाद से पूरा मेहरमती गांव एक पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है। गलियों में पसरा सन्नाटा और खाकी वर्दी की भारी मौजूदगी इस बात की गवाही दे रही है कि हालात कितने तनावपूर्ण हैं। पीड़ित परिवार के दिलों में सुलग रही बदले की आग और प्रशासन की मुस्तैदी के बीच, आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर ईद की उस मनहूस शाम को मेहरमती गांव में हुआ क्या था।
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खूनी शाम की शुरुआत: खेत, पार्टी और जुए का फड़

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स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, घटना ईद की शाम की है। मेहरमती गणेशपुर गांव के बाहरी छोर पर स्थित खेतों में एक ही कुनबे (समुदाय) के कुछ लोग पार्टी कर रहे थे। त्योहार का माहौल था, लेकिन इस पार्टी में कथित तौर पर शराब और जुए (Gambling) का दौर भी चल रहा था।
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अक्सर देखा गया है कि जुए के फड़ पर हार-जीत को लेकर विवाद होते हैं, और यहां भी यही हुआ। पार्टी के दौरान किसी बात को लेकर दो पक्षों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई। शुरुआत में यह सिर्फ जुबानी जंग थी, लेकिन नशे और गुस्से के कॉकटेल ने जल्द ही इस बहस को एक हिंसक हाथापाई में बदल दिया। वहां मौजूद कुछ लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन विवाद थामने के बजाय और उग्र हो गया।
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खेतों से उठा विवाद पहुंचा गांव के बीचो-बीच: दहशत फैलाने की साजिश

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कहासुनी के बाद मामला इतना बिगड़ गया कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए। विवाद खेतों की सीमा लांघकर गांव की आबादी के बीच तक पहुंच गया। दोनों ओर से लाठी-डंडे, लोहे की रॉड और धारदार हथियार (चाकू, छुरे) निकल आए।
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मृतकों के परिजनों और चश्मदीदों का गंभीर आरोप है कि हत्यारों की नीयत सिर्फ मारपीट करने की नहीं थी, बल्कि वे पूरे गांव में अपनी दहशत (Terror) फैलाना चाहते थे। यही कारण है कि वारदात को खेतों के सुनसान इलाके में अंजाम देने के बजाय, हमलावर सलमान नाम के एक युवक को घसीटते हुए और पीटते हुए गांव के बिल्कुल बीचो-बीच ले आए। यहां सरेआम हथियार लहराए गए ताकि गांव का कोई भी व्यक्ति उनके खिलाफ बोलने की हिम्मत न जुटा सके।
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नमाज से लौट रहे बेगुनाह भाइयों का कत्ल: वो खौफनाक पल

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जिस समय हमलावर गांव के बीच में सलमान के साथ बुरी तरह मारपीट कर रहे थे और हथियार लहरा रहे थे, ठीक उसी समय गांव के प्रधान शहीद उर्फ सईदु के दो भाई— भूरा और सईमुद्दीन— मस्जिद से ईद की नमाज पढ़कर और दुआएं मांगकर लौट रहे थे।
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भूरा और सईमुद्दीन को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि गांव के बीच में मौत उनका इंतजार कर रही है। भीड़ और शोरगुल देखकर वे घटना स्थल की ओर बढ़े। इससे पहले कि वे दोनों कुछ समझ पाते, या बीच-बचाव कर पाते, खून सवार हमलावरों ने उन दोनों को भी अपना निशाना बना लिया।
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हमलावरों ने पूरी ताकत से भूरा और सईमुद्दीन के पेट, सीने और पीठ पर छुरे से ताबड़तोड़ कई वार किए। धारदार हथियारों के इन जानलेवा हमलों से दोनों भाई लहूलुहान होकर वहीं जमीन पर गिर पड़े। उनके गिरते ही हमलावर अपने हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए। आनन-फानन में ग्रामीणों ने दोनों को अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन अत्यधिक खून बह जाने और गहरे घावों के कारण दोनों ने दम तोड़ दिया।
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चीख-पुकार और परिजनों का आक्रोश: "पुलिस न्याय नहीं दिलाती तो हम खुद करेंगे"

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जैसे ही भूरा और सईमुद्दीन की मौत की खबर उनके घर पहुंची, प्रधान के परिवार में कोहराम मच गया। ईद के दिन घर में दो जवान लाशें गिरने से महिलाओं की चीख-पुकार ने पूरे गांव का कलेजा चीर दिया।
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शोक के साथ-साथ परिवार और उनके समर्थकों में भयानक गुस्सा भड़क उठा। मृतकों के घर में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग महिलाओं तक की आंखों में आंसू कम और बदले की आग ज्यादा दिखाई दे रही थी। परिजनों का सीधा कहना था कि अगर पुलिस उन्हें तुरंत न्याय नहीं दिलाती है और हत्यारों को गिरफ्तार नहीं करती है, तो वे खुद हथियार उठाकर अपना न्याय करेंगे।
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इसी आक्रोश के चलते, रात के समय और फिर अगली सुबह, गुस्साए परिजनों और उनके समर्थकों की भीड़ ने हत्यारों के घरों पर दो बार चढ़ाई करने (हमला करने) का प्रयास किया। वे हत्यारों के घरों को आग के हवाले करने पर उतारू थे। लेकिन मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल ने सूझबूझ और सख्ती का परिचय देते हुए भीड़ को रोक लिया और उन्हें वापस खदेड़ दिया, अन्यथा गांव में एक और बड़ा दंगा भड़क सकता था।
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खाकी का कड़ा एक्शन: आधी रात को छावनी बना मेहरमती गांव

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दोहरे हत्याकांड की सूचना वायरलेस सेट पर गूंजते ही मेरठ पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए (चूंकि मारे गए दोनों व्यक्ति ग्राम प्रधान के भाई थे), पुलिस ने एक मिनट की भी देरी नहीं की।
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सबसे पहले सर्किल ऑफिसर (CO) आशुतोष कुमार सरधना, सरूरपुर और रोहटा थानों की भारी पुलिस फोर्स (Police Force) के साथ मेहरमती गांव पहुंचे और उन्होंने मोर्चा संभाला। कुछ ही देर में एसपी देहात (SP Rural) अभिजीत कुमार भी दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए।
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यद्यपि यह मामला एक ही समुदाय के दो गुटों के बीच का था, जिससे किसी सांप्रदायिक दंगे की आशंका नहीं थी, लेकिन आपसी रंजिश और खून-खराबे का स्तर इतना ऊंचा था कि पुलिस ने कोई रिस्क लेना उचित नहीं समझा। रात में ही जिला मुख्यालय से पीएसी (PAC - Provincial Armed Constabulary) की कई टुकड़ियां बुला ली गईं और पूरे मेहरमती गांव के चप्पे-चप्पे पर तैनात कर दी गईं।
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पुलिस ने रात के अंधेरे में ही भूरा और सईमुद्दीन के शवों का पंचनामा भरकर उन्हें पोस्टमार्टम (Post-mortem) के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया। प्रशासन की कोशिश थी कि शवों को जल्द से जल्द परिजनों को सौंपा जाए ताकि माहौल को और ज्यादा बिगड़ने से रोका जा सके। आधी रात को ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर शव घर पहुंचा दिए गए।
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कानूनी कार्रवाई: 10 नामजद और 5 अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज

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इस निर्मम हत्याकांड के बाद ग्राम प्रधान शहीद उर्फ सईदु ने पुलिस को लिखित तहरीर (Complaint) दी। प्रधान की तहरीर के आधार पर पुलिस ने रात में ही त्वरित कार्रवाई करते हुए 10 नामजद और 4 से 5 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या, बलवा और घातक हथियारों से लैस होने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा (FIR) दर्ज कर लिया है।
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नामजद आरोपियों की सूची:

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    इरशाद उर्फ चुन्नू (पुत्र सलीम)
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    युसूफ (पुत्र नासिर)
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  4. \r\n
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    रईस खान (पुत्र वशीर)
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  6. \r\n
  7. \r\n
    वाहिद (पुत्र जाहिद)
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  8. \r\n
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    शहान (पुत्र जाहिद)
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  10. \r\n
  11. \r\n
    साजिद (पुत्र सलीम)
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  12. \r\n
  13. \r\n
    सहजाद उर्फ मोटा (पुत्र सगीर)
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  14. \r\n
  15. \r\n
    साकिब (पुत्र साजिद)
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  16. \r\n
  17. \r\n
    सईद (पुत्र सलीम)
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  18. \r\n
  19. \r\n
    रिज़वान (पुत्र सईद)
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  20. \r\n
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लगाई गई धाराएं: पुलिस ने इन सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (या लागू आईपीसी) की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है, जिसमें मुख्य रूप से धारा 191, 191(2), 191(3) (दंगा करना और घातक हथियारों से लैस होना), 190, 109(1), 103(1) (हत्या), 352, 351(3), 115(2) शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए कई टीमें गठित कर दी हैं और उनके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
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भोर का सन्नाटा और प्रशासनिक मुस्तैदी

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दिन निकलते-निकलते गांव का तनाव अपने चरम पर पहुंच गया। हालांकि गांव में अघोषित कर्फ्यू जैसा माहौल है और लोग अपने घरों में कैद हैं। प्रशासन किसी भी स्तर पर जरा सी भी लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
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पूरी रात प्रशासनिक अमला जागता रहा। सुबह 4 बजे तक उप जिलाधिकारी (SDM) उदित नारायण सेंगर, क्षेत्रीय पटवारी अनुज शर्मा के साथ सीओ आशुतोष कुमार गांव की चौपाल पर डटे रहे। जैसे ही सूरज निकला, ये सभी आला अफसर दोबारा गांव में गश्त करने लगे। रविवार दोपहर बाद दोनों शवों का सुपुर्दे-ए-खाक (दफीना/अंतिम संस्कार) होना है। जनाजे में भीड़ उमड़ने और उस दौरान किसी भी तरह के बवाल की आशंका को देखते हुए कब्रिस्तान के आसपास और मुख्य मार्गों पर पुलिस का अतिरिक्त घेरा (Cordon) बनाया गया है।
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सियासी हलचल: पीड़ित परिवार को सांत्वना देने लगा नेताओं का जमावड़ा

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डबल मर्डर जैसी जघन्य वारदात के बाद गांव में सियासी हलचल तेज होना लाजिमी है। रविवार सुबह सबसे पहले सिवाल खास विधानसभा क्षेत्र से विधायक गुलाम मोहम्मद पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। उन्होंने ग्राम प्रधान और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि वह इस मामले में शासन-प्रशासन के स्तर पर निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे।
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इसके कुछ ही देर बाद, राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल भी मेहरमती गांव पहुंचा। इसमें रालोद के जिला अध्यक्ष अनिकेत भारद्वाज, रालोद के वरिष्ठ नेता सुनील रोहटा और रालोद के क्षेत्रीय अध्यक्ष तिरसपाल मलिक शामिल थे। उन्होंने भी पीड़ित परिवार को सांत्वना दी और पुलिस अधिकारियों से बात कर आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की।
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त्योहारों पर नशा, जुआ और बिगड़ता ताना-बाना

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मेहरमती गांव की यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में सामाजिक पतन की एक गहरी तस्वीर भी पेश करती है। त्योहार जो सौहार्द के लिए जाने जाते हैं, वे अब शराब और जुए के अड्डों में तब्दील हो रहे हैं। छोटी सी हार-जीत और 'अहंकार' (Ego) के टकराव में लोग इस कदर अंधे हो जाते हैं कि वे गांव के प्रधान के निर्दोष भाइयों तक की जान लेने से नहीं हिचकिचाते। यह घटना पुलिस के लिए भी एक चुनौती है कि कैसे ग्रामीण इलाकों में त्योहारों के दौरान चलने वाले ऐसे अवैध जुए और शराब के फड़ों पर पहले ही रोक लगाई जाए, ताकि ऐसी नौबत ही न आए।
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फिलहाल मेहरमती गांव में खौफ, दुख और पुलिस के बूटों की आवाज गूंज रही है। पुलिस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती नामजद आरोपियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुंचाना और गांव में दोनों पक्षों के बीच शांति बहाल करना है। पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है, और प्रशासन कानून-व्यवस्था को बिगड़ने से रोकने की जद्दोजहद में जुटा है। 'खबरीलाल' इस घटना से जुड़े हर अपडेट और पुलिस की कार्रवाई पर नजर बनाए रखेगा।
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