मेरठ (Crime & Cyber Desk): उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस ने एक ऐसे शातिर साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो 'जनसेवा केंद्र' (Janseva Kendra) की आड़ में भोले-भाले और गरीब लोगों की पहचान चुराकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी (Cyber Fraud) को अंजाम दे रहा था। मेरठ पुलिस की साइबर सेल (Cyber Cell) और लिसाड़ी गेट थाना पुलिस ने एक बड़ी और संयुक्त सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए इस फर्जी जनसेवा केंद्र को सील कर दिया है।READ ALSO:-'हेल्थ' के नाम पर आपकी सेहत से बड़ा खिलवाड़! FSSAI का चला डंडा, इमामी (Emami) समेत 8 नामी फूड कंपनियों को भेजा गया सख्त नोटिस
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पुलिस ने मौके से गिरोह के मुख्य सरगना यानी एक पिता और उसके बेटे को गिरफ्तार किया है। जब पुलिस ने इस केंद्र की तलाशी ली, तो वहां से बरामद दस्तावेजों का जखीरा देखकर खुद जांच अधिकारियों के भी होश उड़ गए। वहां से भारी मात्रा में लोगों के व्यक्तिगत दस्तावेज जैसे- आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और दर्जनों एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं। इस खुलासे ने स्पष्ट कर दिया है कि किस तरह डिजिटल इंडिया की सुविधाओं का गलत इस्तेमाल कर ये शातिर अपराधी आम जनता और बैंकिंग सिस्टम को चूना लगा रहे थे।
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कैसे हुआ इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश?
\r\n\r\nरविवार को मेरठ पुलिस लाइन में एक अहम प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान एसपी क्राइम (SP Crime) अवनीश कुमार ने पूरे ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी मीडिया के सामने रखी।
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एसपी क्राइम ने बताया कि पिछले कुछ समय से वरिष्ठ अधिकारियों को लगातार यह गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं कि लिसाड़ी गेट क्षेत्र में कुछ जनसेवा केंद्र नियमों को ताक पर रखकर अवैध गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। इन सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें गठित की गईं और इलाके के संदिग्ध जनसेवा केंद्रों की खुफिया निगरानी (Electronic Surveillance) शुरू कर दी गई।
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इसी सर्विलांस और पुलिस मुखबिरों की सटीक सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने अंसार कॉलोनी, गोला कुआं स्थित 'रॉयल सर्विसेज जन सेवा केंद्र' पर अचानक धावा बोल दिया। पुलिस की अचानक हुई इस छापेमारी से वहां अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने मौके से केंद्र का संचालन कर रहे अरकम (पुत्र निजामुद्दीन) और उसके पिता निजामुद्दीन (पुत्र यासीन) को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
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छापेमारी में मिला दस्तावेजों का भारी जखीरा (Recoveries)
\r\n\r\nपुलिस ने जब इस तथाकथित जनसेवा केंद्र की तलाशी ली, तो यह किसी साइबर क्राइम के हेडक्वार्टर जैसा नजर आया। यहां से पुलिस ने जो सामान बरामद किया है, वह किसी बड़े संगठित अपराध (Organized Crime) की ओर इशारा करता है। पुलिस द्वारा जब्त किए गए सामानों की सूची इस प्रकार है:
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- \r\n 180 आधार कार्ड (Aadhaar Cards)\r\n \r\n
- \r\n 92 डेबिट और क्रेडिट कार्ड (Debit & Credit Cards)\r\n \r\n
- \r\n 97 पैन कार्ड (PAN Cards)\r\n \r\n
- \r\n 139 वोटर आईडी कार्ड (Voter ID Cards)\r\n \r\n
- \r\n 10 बैंक पासबुक और 5 चेकबुक\r\n \r\n
- \r\n 16 ब्लैंक (खाली) हेल्थ कार्ड\r\n \r\n
- \r\n 10 रबर स्टैंप और सील मोहर (फर्जी दस्तावेज प्रमाणित करने के लिए)\r\n \r\n
- \r\n 2 स्मार्ट मोबाइल फोन (जिनका इस्तेमाल ठगी में होता था)\r\n \r\n
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पुलिस ने इन सभी दस्तावेजों और उपकरणों को जब्त कर लिया है और थाना लिसाड़ी गेट में सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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क्या था ठगी का तरीका? (Modus Operandi)
\r\n\r\nपूछताछ के दौरान गिरफ्तार बाप-बेटे ने पुलिस के सामने जो खुलासे किए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। ये शातिर अपराधी अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर एक सुगठित सिंडिकेट चला रहे थे।
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इनका मुख्य निशाना इलाके के वे गरीब, अशिक्षित और जरूरतमंद लोग होते थे, जिन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने या छोटे-मोटे कामों के लिए जनसेवा केंद्र आना पड़ता था।
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- \r\n दस्तावेजों की चोरी: ये ठग बहाने से इन गरीबों के मूल पहचान पत्र (आधार, पैन, वोटर आईडी) ले लेते थे और उन्हें गुमराह कर उनकी फोटोकॉपी या फिंगरप्रिंट अपने पास सुरक्षित रख लेते थे।\r\n \r\n
- \r\n फर्जी खाते खोलना: बाद में इन्ही चुराए गए या हेरफेर किए गए दस्तावेजों के आधार पर ये लोग विभिन्न बैंकों में 'फर्जी खाते' (Fake Bank Accounts) खुलवाते थे।\r\n \r\n
- \r\n एटीएम कार्ड का दुरुपयोग: इन फर्जी खातों से जुड़े डेबिट और क्रेडिट कार्ड का कंट्रोल ये अपने पास रखते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से कमाए गए काले धन (Black Money) को मंगाने, ऑनलाइन लेनदेन करने और पैसे को इधर-से-उधर करने (Money Laundering) के लिए किया जाता था।\r\n \r\n
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असम तक फैले हैं ठगी के तार, पोर्टल पर मिली शिकायत
\r\n\r\nयह गिरोह केवल स्थानीय स्तर पर ही सक्रिय नहीं था, बल्कि इसके तार देश के अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए पाए गए हैं। एसपी क्राइम अवनीश कुमार ने बताया कि जांच के दौरान गिरोह के मोबाइल फोन और कंप्यूटर से instantmudra.in और swifemoney.in जैसे कई ऑनलाइन पेमेंट और ट्रांजैक्शन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भारी धन राशि के लेनदेन के सबूत मिले हैं।
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सबसे बड़ा सुराग तब हाथ लगा जब पुलिस ने बरामद किए गए बैंक खातों की जांच की। पुलिस के अनुसार, बरामद किए गए खातों में से एक खाते के खिलाफ असम (Assam) से साइबर ठगी की एक बड़ी शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP Portal) पर दर्ज मिली है। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि यह गिरोह जामताड़ा या मेवात जैसे बड़े साइबर अपराधी गैंग्स के लिए 'बैंक खाते उपलब्ध कराने' (Mule Accounts) का काम करता था।
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एक आरोपी फरार, तलाश में ताबड़तोड़ दबिश
\r\n\r\nपुलिस का यह ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। एसपी क्राइम ने स्पष्ट किया कि इस पूरे काले कारोबार में अरकम और निजामुद्दीन के अलावा अरकम का भाई अबूबकर (पुत्र निजामुद्दीन) भी पूरी तरह से शामिल था। फिलहाल वह पुलिस की भनक लगते ही मौके से फरार हो गया है। पुलिस की कई टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश दे रही हैं।
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इसके साथ ही, साइबर सेल की तकनीकी टीम अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इन आरोपियों ने पिछले कितने सालों में कितने निर्दोष लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग किया है और साइबर अपराधों के जरिए कुल कितने करोड़ रुपये की हेराफेरी की है।
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जनता के लिए चेतावनी: मेरठ पुलिस ने इस घटना के बाद आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी जनसेवा केंद्र, साइबर कैफे या अनजान व्यक्ति को अपने अत्यंत संवेदनशील दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या बैंक पासबुक देते समय पूरी सावधानी बरतें। यदि आपको अपना दस्तावेज देना ही पड़े, तो उस पर तारीख और किस काम के लिए दिया जा रहा है, यह जरूर लिखें, ताकि कोई भी शातिर आपके नाम पर फर्जी बैंक खाता न खोल सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.