नई दिल्ली (Business & Consumer Desk): आज के दौर में जब हर इंसान अपनी फिटनेस और सेहत को लेकर जागरूक हो रहा है, तब बाजार में 'हेल्दी' (Healthy), 'डाइट' (Diet), 'ऑर्गेनिक' (Organic) और 'जीरो' (Zero) टैग लगे उत्पादों की बाढ़ सी आ गई है। लोग भी बिना ज्यादा सोचे-समझे, पैकेट पर लिखे इन आकर्षक शब्दों पर भरोसा कर लेते हैं और भारी कीमत चुकाकर इन उत्पादों को अपने घर ले आते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि जो खाना आप 'हेल्दी' समझकर खा रहे हैं, वह हकीकत में मार्केटिंग का एक बहुत बड़ा धोखा हो सकता है?
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इसी धोखेबाजी और मुनाफे के खेल पर रोक लगाने के लिए देश की सर्वोच्च खाद्य नियामक संस्था, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई की है। FSSAI ने देश की आठ प्रमुख फूड बिजनेस कंपनियों (FBOs) को अपने उत्पादों पर झूठे, अवैज्ञानिक और भ्रामक दावे करने के आरोप में सख्त नोटिस थमाया है।
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किन 8 कंपनियों पर गिरी है FSSAI की गाज?

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नियामक की पैनी नजर उन कंपनियों पर पड़ी है जो 'खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006' (Food Safety and Standards Act, 2006) के विज्ञापन और लेबलिंग नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रही थीं। जिन आठ कंपनियों को नोटिस मिला है, उनकी सूची इस प्रकार है:
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    इमामी ग्रुप (Emami Healthy & Tasty)
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  2. \r\n
  3. \r\n
    द हेल्दी फैक्ट्री (The Healthy Factory)
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  4. \r\n
  5. \r\n
    प्लान बी (Plan B)
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  6. \r\n
  7. \r\n
    न्यूहर्ब्स (Neuherbs)
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  8. \r\n
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    हेल्थ एड (Health Aid)
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  10. \r\n
  11. \r\n
    ट्रूवी (Troovy)
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  12. \r\n
  13. \r\n
    हेल्दी मास्टर (Healthy Master)
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  14. \r\n
  15. \r\n
    हेल्दी चॉइस (Healthy Choice)
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FSSAI का स्पष्ट रूप से मानना है कि इन ब्रांड्स के नाम, इनकी टैगलाइन्स और पैकेजिंग पर लिखे गए दावे उपभोक्ताओं को उत्पाद की असली सामग्री और उसकी प्रकृति (Real Nature) के बारे में गुमराह करते हैं।
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मार्केटिंग का मायाजाल बनाम असलियत: किस कंपनी ने किया कैसा 'खेल'?

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आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर इन बड़ी कंपनियों ने अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए ग्राहकों के मनोविज्ञान (Consumer Psychology) के साथ कैसे खिलवाड़ किया:
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1. द हेल्दी फैक्ट्री (The Healthy Factory) - 'जीरो मैदा' का सफेद झूठ
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आजकल लोग वजन कम करने और पाचन को बेहतर रखने के लिए मैदा खाने से बचते हैं। 'द हेल्दी फैक्ट्री' ने इसी डर को कैश करने की कोशिश की। कंपनी ने बाजार में 'Zero Maida Whole Wheat Bread' (जीरो मैदा होल व्हीट ब्रेड) और 'Zero Maida Pizza Base' (जीरो मैदा पिज्जा बेस) उतारे।
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    नियामक का खुलासा: FSSAI की लैब जांच और लेबल की बारीकी से जांच करने पर पता चला कि इन उत्पादों में 'गेहूं का ग्लूटेन' (Wheat Gluten) और अन्य ऐसी सामग्रियां मिलाई गई हैं, जो मैदे के ही विकल्प या उसी के गुण वाली होती हैं। उत्पादों में ग्लूटेन की मौजूदगी के बावजूद उसे छाती ठोककर '100% जीरो मैदा' बताना ग्राहकों की आंखों में धूल झोंकना है।
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2. इमामी ग्रुप (Emami Healthy & Tasty) - नाम से पैदा किया जा रहा भ्रम

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कोलकाता स्थित मशहूर एफएमसीजी (FMCG) दिग्गज इमामी ग्रुप की कुकिंग ऑयल इकाई भी इस लपेटे में आ गई है।
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    नियामक का खुलासा: कंपनी अपना कुकिंग ऑयल (खाना पकाने का तेल) 'Healthy & Tasty' (हेल्दी एंड टेस्टी) के ट्रेड नेम से बेचती है। FSSAI का कड़ा ऐतराज इस बात पर है कि किसी भी साधारण रिफाइंड या कुकिंग ऑयल के नाम में 'हेल्दी' शब्द का इस्तेमाल करना नियमों के खिलाफ है। इससे ग्राहक यह मान लेता है कि यह तेल उसके दिल और सेहत के लिए सिर्फ फायदेमंद है, जबकि किसी भी तेल का अधिक सेवन नुकसानदेह हो सकता है।
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3. प्लान बी (Plan B) - बिना परमिशन 'वीगन' (Vegan) का ढिंढोरा

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भारत सहित पूरी दुनिया में 'वीगन' (ऐसा आहार जिसमें दूध, दही, शहद सहित किसी भी पशु उत्पाद का इस्तेमाल न हुआ हो) डाइट का क्रेज चरम पर है। 'प्लान बी' कंपनी ने अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए उन पर 'Plant Based Vegan' का बड़ा सा ठप्पा लगा दिया।
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    नियामक का खुलासा: FSSAI के नियमों के अनुसार, भारत में किसी भी खाद्य पदार्थ को आधिकारिक तौर पर 'वीगन' डिक्लेयर करने के लिए अथॉरिटी से एक विशेष मंजूरी और एक निर्धारित 'वीगन लोगो' (Vegan Logo) लेना अनिवार्य होता है। जांच में सामने आया कि कंपनी के FSSAI लाइसेंस में ऐसे किसी वीगन उत्पाद की कोई मंजूरी दर्ज ही नहीं थी।
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4. न्यूहर्ब्स (Neuherbs) - 'ट्रू विटामिन्स' का मनगढ़ंत विज्ञान

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हेल्थ सप्लीमेंट्स बनाने वाली कंपनी न्यूहर्ब्स को उसके ब्रांड नाम 'True Vitamin' (सच्चे विटामिन) के लिए नोटिस भेजा गया है।
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    नियामक का खुलासा: मेडिकल और फूड साइंस की डिक्शनरी में 'ट्रू विटामिन' जैसा कोई शब्द अस्तित्व में ही नहीं है। FSSAI का कहना है कि यह केवल एक मार्केटिंग स्टंट है। इस शब्द के इस्तेमाल से कंपनी ग्राहकों के दिमाग में यह गलत धारणा (False Impression) डाल रही है कि बाजार में मिलने वाले अन्य विटामिन 'झूठे' या 'नकली' हैं और सिर्फ उनके ही विटामिन 'सच्चे' हैं।
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5. सिर्फ नाम में 'हेल्थ' जोड़ने से खाना हेल्दी नहीं हो जाता

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इसके अलावा, नियामक ने Troovy, Healthy Master, Healthy Choice और Health Aid जैसे ब्रांड्स को भी आड़े हाथों लिया है। इन कंपनियों की ब्रांडिंग और टैगलाइन्स को पूरी तरह से भ्रामक करार दिया गया है। FSSAI का स्पष्ट संदेश है कि आप केवल ब्रांड के नाम में 'हेल्थ' या 'हेल्दी' शब्द जोड़कर एक अस्वस्थकर (Unhealthy) या साधारण खाने को सुपरफूड के रूप में प्रमोट नहीं कर सकते।
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FSSAI के सख्त नियम क्या कहते हैं?

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खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018 के तहत कुछ बेहद स्पष्ट नियम बनाए गए हैं:
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    वैज्ञानिक प्रमाण (Scientific Proof): पैकेट के आगे (Front of Pack) किए गए किसी भी स्वास्थ्य दावे (जैसे- दिल के लिए अच्छा, कोलेस्ट्रॉल कम करे, इम्यूनिटी बढ़ाए) के पीछे ठोस और प्रमाणित वैज्ञानिक साक्ष्य होने चाहिए।
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  • \r\n
  • \r\n
    पारदर्शिता (Transparency): उत्पाद का चित्र, ब्रांड नाम या ग्राफिक्स ऐसा नहीं होना चाहिए जो पैकेट के अंदर मौजूद असली सामग्री को छिपाए या गलत रूप में प्रस्तुत करे।
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    स्पष्ट डिस्क्लेमर: यदि कोई दावा किया जा रहा है, तो उससे जुड़ा आवश्यक डिस्क्लेमर (Disclaimer) भी पैकेट पर साफ अक्षरों में लिखा होना चाहिए।
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भविष्य की कार्रवाई और कंपनियों पर मंडराता खतरा

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FSSAI की यह 'सर्जिकल स्ट्राइक' पूरे फूड और बेवरेज (F&B) इंडस्ट्री के लिए एक अलार्म बेल है। जिन आठ कंपनियों को नोटिस थमाया गया है, उन्हें अब एक निर्धारित समय सीमा के भीतर नियामक के सामने अपना वैज्ञानिक पक्ष और स्पष्टीकरण पेश करना होगा। यदि कंपनियों के जवाब असंतोषजनक पाए जाते हैं, तो:
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  1. \r\n
    उन्हें अपने उत्पादों की पैकेजिंग और नाम बदलने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    बाजार से भारी मात्रा में अपना स्टॉक वापस (Recall) मंगाना पड़ सकता है।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    उन पर लाखों रुपये का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, और गंभीर मामलों में उनके उत्पादन का लाइसेंस भी रद्द हो सकता है।
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  6. \r\n
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आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा सबक

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FSSAI की इस कार्रवाई ने एक बात पूरी तरह से साफ कर दी है कि "जो दिखता है, वह हमेशा सच नहीं होता।" आहार विशेषज्ञों और डॉक्टरों की हमेशा से यह सलाह रही है कि उपभोक्ताओं को स्मार्ट बनना होगा।
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जब भी आप सुपरमार्केट जाएं, तो पैकेट के आगे लिखे बड़े-बड़े दावों (Front Label) पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। इसके बजाय, पैकेट को पलटें और उसकी 'सामग्री सूची' (Ingredients List) पढ़ें। नियमों के अनुसार, किसी उत्पाद में जो सामग्री सबसे अधिक मात्रा में होती है, उसका नाम सूची में सबसे पहले लिखा होता है। अगर 'होल व्हीट' (Whole Wheat) या 'मल्टीग्रेन' (Multigrain) ब्रेड में पहले या दूसरे नंबर पर 'मैदा' या 'रिफाइंड व्हीट फ्लोर' (Refined Wheat Flour) लिखा है, तो समझ जाइए कि आपके साथ धोखा हो रहा है।
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FSSAI का यह कदम निश्चित रूप से उपभोक्ताओं के अधिकारों और उनके स्वास्थ्य की रक्षा की दिशा में एक बहुत बड़ा और सराहनीय प्रयास है।
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