बिजनौर, नगीना। सोमवार की रात बिजनौर में गंगा बैराज के तटबंध में अचानक पानी का रिसाव शुरू होने से प्रशासन और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया था। बढ़ते खतरे को देखते हुए, मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे को आनन-फानन में वाहनों के लिए बंद कर दिया गया था। हालांकि, मंगलवार की सुबह स्थिति में सुधार होने के बाद हाईवे को बाइक और कारों जैसे छोटे वाहनों के लिए फिर से खोल दिया गया है, लेकिन बड़े वाहनों की आवाजाही पर अभी भी रोक जारी है।READ ALSO:-लखनऊ में 26 साल के रिकवरी एजेंट की बेरहमी से हत्या: ऑफिस में मिला खून से सना शव
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कैसे पैदा हुआ था खतरा?
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सोमवार देर शाम गंगा बैराज के पास तटबंध से पानी रिसने की खबर मिली थी, जिससे कटान का खतरा बढ़ गया था। अधिकारियों को आशंका थी कि यदि तटबंध टूटता है तो पानी सीधे हाईवे पर आ सकता है, जिससे एक बड़ा हादसा हो सकता है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि अधिकारी भी तटबंध छोड़कर जिला मुख्यालय लौट आए थे। आनन-फानन में पुलिस ने हाईवे पर बैरिकेड लगाकर सभी तरह के वाहनों की आवाजाही रोक दी थी।
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रात भर आसपास के गांवों में भी डर का माहौल बना रहा, क्योंकि पानी के रिसाव से इन इलाकों में भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा था। लेकिन, तभी एक चमत्कार हुआ। देर रात अचानक मिट्टी का एक बड़ा ढेर खिसककर रिसाव वाली जगह पर गिर गया, जिससे पानी का बहाव खुद-ब-खुद रुक गया और एक बड़ा हादसा टल गया।
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राहत की सांस और हाईवे पर आवाजाही बहाल
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मंगलवार की सुबह जब प्रशासन ने दोबारा हालात का जायजा लिया, तो रिसाव का रास्ता पूरी तरह से बंद पाया गया। इसके बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली और सुबह करीब नौ बजे हाईवे को छोटी गाड़ियों के लिए फिर से खोल दिया गया। बसों और ट्रकों जैसे भारी वाहनों को अभी भी इस रास्ते से जाने की अनुमति नहीं है और यह रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी।
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प्रशासन ने खतरे को पूरी तरह खत्म करने के लिए तटबंधों पर कटान-रोधी कार्य भी दोबारा शुरू करा दिए हैं। इस घटना ने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया है कि नदियों के किनारे स्थित तटबंधों की निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है।
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