मेरठ: वर्षों से लंबित बागपत रोड को रेलवे रोड से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण लिंक मार्ग के निर्माण को लेकर चल रहा जनआन्दोलन फिलहाल थम गया है। राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी के हस्तक्षेप और दिवाली तक सड़क निर्माण पूरा कराने के आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना धरना समाप्त कर दिया है। हालांकि, लोगों में गुस्सा बरकरार है और उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी वादाखिलाफी हुई तो वे सीधे मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) का घेराव करेंगे।READ ALSO:-वो जिसका कोई नाम नहीं था... मेरठ में रामलीला की रोशनी तले एक गुमनाम बचपन का दर्दनाक अंत, कौन है इस मौत का जिम्मेदार?
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आशीर्वाद अस्पताल पर उठे गंभीर सवाल, कैसे पास हुआ नक्शा?
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इस पूरे विवाद के केंद्र में आशीर्वाद अस्पताल है। प्रदर्शनकारियों ने एमडीए की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि अस्पताल का मानचित्र (नक्शा) एमडीए से पास ही नहीं है, फिर भी उसे संचालन की अनुमति कैसे दी गई? जनआन्दोलन समिति के सदस्यों ने बताया कि लगभग एक सप्ताह पहले एमडीए की एक टीम अस्पताल को सील करने के लिए भेजी गई थी, लेकिन वह भी बिना किसी कार्रवाई के वापस लौट आई। इस घटना ने जनता के मन में अधिकारियों और अस्पताल मालिक के बीच किसी दबाव या मिलीभगत के संदेह को और गहरा कर दिया है।
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मुख्यमंत्री की योजनाओं को पलीता लगा रहे अधिकारी?
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प्रदर्शन कर रही जनता का गुस्सा इस बात पर भी है कि यह सड़क परियोजना मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा धनराशि भी आवंटित की जा चुकी है। इसके बावजूद, स्थानीय अधिकारी इस योजना को विफल करने पर तुले हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि 14 मीटर चौड़े इस रास्ते को बिना किसी देरी के एक साथ खोला जाए, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह महत्वपूर्ण कार्य अधर में लटका हुआ है।
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दिवाली का अल्टीमेटम, वरना होगा बड़ा आंदोलन
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समिति के अध्यक्ष सरदार राजेंद्र सिंह ने सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी के आश्वासन का सम्मान करते हुए धरना समाप्त करने की घोषणा की, लेकिन साथ ही एक कड़ा अल्टीमेटम भी दिया। उन्होंने कहा, "हमें बार-बार केवल आश्वासन ही मिले हैं। यदि दिवाली तक सड़क निर्माण का काम पूरा नहीं होता है, तो हम इस मामले की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री से करेंगे और क्षेत्र की जनता के साथ एमडीए कार्यालय का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे।" इस मौके पर पारस जैन, विनोद सिरोही, अनिल शर्मा, सचिन गोयल, आशीष गुप्ता, सरदार देवेंद्र सरना, मुकेश बंसल, नरेश कुमार, दिनेश मदान और सुनील सिंघल समेत कई अन्य लोग मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
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