मेरठ के लोहियानगर क्षेत्र का काजीपुर गांव रविवार को गुर्जर समाज की राजनीतिक गर्माहट का केंद्र बना। यहां आयोजित गुर्जर महापंचायत में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए। यह पंचायत ऊर्जामंत्री के नाम पर व्यापारी से नाक रगड़वाने के मामले से जुड़े तीन युवकों की गिरफ्तारी के विरोध में बुलाई गई थी। समाज ने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है। महापंचायत में प्रशासन को सीधे सात दिन का अल्टीमेटम दिया गया है।READ ALSO:-छठ पूजा पर बड़ा ऐलान: लखनऊ में 28 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश, DM का आदेश जारी; स्कूल-कॉलेज, दफ्तर सब बंद
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
क्या है पूरा मामला
\r\n\r\n
यह पूरा मामला पूर्व बीजेपी नेता विकुल चपराना से जुड़ा है। विकुल चपराना पर हाल ही में एक व्यापारी से सरेआम बदसलूकी और नाक रगड़वाने का आरोप लगा था, जिसका वीडियो वायरल हुआ। इसके बाद पुलिस ने विकुल सहित कुछ अन्य लोगों पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। गुर्जर समाज का आरोप है कि पुलिस ने इस कार्रवाई में पक्षपात किया। समाज का दावा है कि गिरफ्तार किए गए हैप्पी भड़ाना, सुबोध यादव और आयुष शर्मा समेत कई युवक निर्दोष हैं। उनके खिलाफ गंभीर धाराएं लगाकर उन्हें फंसाया गया है। इसी अन्यायपूर्ण कार्रवाई के विरोध में समाज ने महापंचायत का आह्वान किया था।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

\r\n7 दिन का दिया अल्टीमेटम
\r\n\r\n
काजीपुर की महापंचायत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग जुटे। समाज के वरिष्ठ नेता पवन गुर्जर ने मंच से कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने पुलिस प्रशासन को सीधी चुनौती देते हुए 7 दिन का निर्णायक अल्टीमेटम दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस अवधि में गिरफ्तार तीनों युवकों को मुकदमों से गंभीर धाराएं हटाकर तत्काल रिहा किया जाए। पवन गुर्जर ने चेतावनी दी कि यदि एक भी निर्दोष युवक जेल में रहा, तो समाज सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
कैंट विधायक पर अनदेखी का आरोप
\r\nमहापंचायत में स्थानीय राजनीति पर भी तीखी टिप्पणियां हुईं। समाज के नेताओं ने कैंट विधायक अमित अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विधायक अब गुर्जर समाज की अनदेखी कर रहे हैं। नेताओं ने कहा कि समाज के हितों की लगातार उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान विधायक के प्रति समाज में नाराजगी साफ दिखी।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

\r\nतीखी नोकझोंक और ‘गाय-भैंस रैली’ का ऐलान 
\r\n\r\n
महापंचायत स्थल पर तनाव का माहौल रहा। विरोध प्रदर्शन के दौरान समाज के नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। समाज के कुछ लोग तुरंत विरोध खत्म करने के पक्ष में थे। वहीं, बड़ी संख्या में लोग अपनी मांगों पर अड़े रहे और आंदोलन जारी रखने की मांग की।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पवन गुर्जर ने विरोध का एक अनोखा तरीका सुझाया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी: "अगर प्रशासन 7 दिन में सभी निर्दोषों को रिहा नहीं करता है, तो हम कमिश्नरी पर महापंचायत करेंगे।" उन्होंने आंदोलन को धार देते हुए ऐलान किया कि इस दौरान गाय-भैंसों की रैली आयोजित होगी। उन्होंने कहा, "अबकी बार कमिश्नरी पर गोबर ही गोबर होगा।" उन्होंने पूरे देश के गुर्जर समाज को जोड़ने और जरूरत पड़ने पर कश्मीर से कन्याकुमारी तक आंदोलन छेड़ने की बात कही।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए मेरठ पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर रहा। महापंचायत स्थल पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस अधिकारियों ने समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत की कोशिश की। हालांकि, युवकों को रिहा करने या धाराओं को हटाने के संबंध में कोई तत्काल आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। पुलिस का कहना है कि वह कानून के अनुसार ही कार्रवाई कर रही है। एसएसपी ने जोर देकर कहा कि कानून-व्यवस्था भंग करने की किसी भी कोशिश से सख्ती से निपटा जाएगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
असर और आगे की दिशा 
\r\n\r\n
गुर्जर समाज का यह 7 दिन का अल्टीमेटम मेरठ की राजनीति और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। विकुल चपराना विवाद ने अब एक बड़ा सामाजिक रूप ले लिया है। यदि तय समय सीमा में गिरफ्तार युवकों की रिहाई नहीं होती है, तो गाय-भैंसों की रैली का ऐलान क्षेत्र में अभूतपूर्व तनाव पैदा कर सकता है। यह मामला आगामी चुनावों में पश्चिमी यूपी के जातीय समीकरणों और मतदान पैटर्न पर भी गहरा असर डाल सकता है।
\r\n 
विज्ञापन
विज्ञापन