मेरठ (क्राइम/हेल्थ डेस्क): बाहर का खाना खाने के शौकीन लोगों के लिए मेरठ से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर आई है। अक्सर हम नामी-गिरामी दुकानों से यह सोचकर खाना पैक कराते हैं कि वहां साफ-सफाई (Hygiene) का पूरा ध्यान रखा जाता होगा, लेकिन कंकरखेड़ा (Kankarkheda) स्थित सरधना रोड पर जो घटना घटी, उसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है।READ ALSO:-भारत के एविएशन सेक्टर में बड़ी क्रांति: पानी और हवा में उड़ेंगे प्रदूषण-मुक्त 'इलेक्ट्रिक सीप्लेन', लक्षद्वीप से होगी इस ऐतिहासिक सफर की शुरुआत
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सरधना रोड स्थित प्रसिद्ध 'गुप्ता स्वीट्स' (Gupta Sweets) से खरीदे गए नाश्ते (कचौड़ी-सब्जी) में कथित रूप से एक मृत छिपकली (Dead Lizard) निकलने का दावा किया गया है। इस घटना ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया है और सोशल मीडिया पर इस दुकान को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।
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कैसे हुआ खुलासा: घर जाकर खोली थैली, तो उड़ गए होश

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, कंकरखेड़ा क्षेत्र का ही रहने वाला एक युवक अपनी छुट्टी के दिन नाश्ते के लिए सरधना रोड स्थित गुप्ता स्वीट्स पर पहुंचा था। उसने वहां से अपने परिवार के लिए कचौड़ी और सब्जी पैक कराई।
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दुकान से खुशी-खुशी नाश्ता लेकर युवक घर पहुंचा। लेकिन जैसे ही घर के सदस्यों ने नाश्ता करने के लिए थैली (पॉलिथीन) से सब्जी को एक कटोरी में पलटा, उनके होश उड़ गए। कटोरी में रसेदार सब्जी के बीचों-बीच एक मरी हुई छिपकली तैर रही थी। यह भयानक नजारा देखकर पूरे परिवार की भूख गायब हो गई और उनमें घबराहट फैल गई। गनीमत यह रही कि किसी ने भी उस सब्जी का सेवन नहीं किया था, अन्यथा छिपकली का जहर किसी की भी जान जोखिम में डाल सकता था।
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सोशल मीडिया पर वायरल किया वीडियो और दुकान पर किया हंगामा

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इस घिनौनी लापरवाही को देखकर ग्राहक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने तुरंत अपने स्मार्टफोन से कटोरी में पड़ी उस छिपकली और सब्जी का एक विस्तृत वीडियो (Viral Video) बनाया। इसके बाद उसने वह वीडियो इंटरनेट मीडिया पर अपलोड कर दिया। जानकारी के मुताबिक, यह वीडियो 'विजय हिंदुस्तानी 1239' (Vijay Hindustani 1239) नामक सोशल मीडिया आईडी से सबसे पहले प्रसारित किया गया, जो कुछ ही घंटों में हजारों लोगों तक पहुंच गया।
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वीडियो बनाने के तुरंत बाद, ग्राहक कचौड़ी और छिपकली वाली सब्जी लेकर वापस गुप्ता स्वीट्स पर जा पहुंचा। वहां उसने दुकान के मालिक और कर्मचारियों को वह छिपकली दिखाते हुए भारी हंगामा किया। बीच बाजार हुए इस हंगामे को देखकर वहां भारी भीड़ जमा हो गई। मामले को तूल पकड़ता देख और भीड़ को शांत करने के लिए, दुकानदार ने आनन-फानन में ग्राहक से वह खाना वापस ले लिया और उसे 200 रुपये (नाश्ते के पैसे) वापस लौटा दिए।
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दुकानदार का पलटवार: "यह 50 साल पुरानी साख बिगाड़ने की साजिश है"

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इस मामले में जहां ग्राहक खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहा है, वहीं गुप्ता स्वीट्स के स्वामी समर्थ गुप्ता ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका स्पष्ट कहना है कि यह वायरल वीडियो पूरी तरह से फर्जी (Fake) है और दुकान को बदनाम करने के लिए रचा गया एक नाटक है।
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समर्थ गुप्ता ने अपने बचाव में कई तर्क दिए हैं:

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    पैकिंग की प्रक्रिया: उनका कहना है कि दुकान पर एक बड़े भगोने में सब्जी बनती है। जब कोई ग्राहक सब्जी मांगता है, तो एक बड़े चमचे से उसे छोटी सी पॉलिथीन (थैली) में भरा जाता है। यदि भगोने में इतनी बड़ी छिपकली होती, तो वह चमचे में आते वक्त या पारदर्शी पॉलिथीन में भरते समय ही आसानी से दिखाई दे जाती।
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    घर जाकर छिपकली मिलना संदिग्ध है: दुकानदार का तर्क है कि ग्राहक ने दुकान पर या रास्ते में नहीं, बल्कि घर जाकर कटोरी में सब्जी निकालने के बाद छिपकली मिलने की बात कही है। यह संभव है कि छिपकली उनके घर पर ही गिरी हो या जानबूझकर डाली गई हो।
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    खुद भी वही खाना खाते हैं: गुप्ता ने बताया कि उनकी यह दुकान पिछले 50 वर्षों से चल रही है। आज तक ऐसी कोई शिकायत नहीं आई। दुकान के कारीगर, कर्मचारी और खुद उनका परिवार (स्वजन) भी उसी रसोई में बना खाना और वही सब्जी खाते हैं।
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    पैसे ऐंठने का नया तरीका: दुकानदार के मुताबिक, सोशल मीडिया के दौर में नामी दुकानों को निशाना बनाकर ब्लैकमेल (Blackmail) करना और पैसे ऐंठना कुछ लोगों का पेशा बन गया है। हंगामा शांत करने के लिए ही उन्होंने 200 रुपये वापस किए थे, न कि अपनी गलती मानकर।
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खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) एक्शन में

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सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होने और स्थानीय मीडिया में खबर फैलने के बाद, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नींद टूट गई है।
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इस गंभीर प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए मेरठ के जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी (District Food Safety Officer), रवि शर्मा ने अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। उन्होंने बताया:
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"इस पूरे प्रकरण की हमें न तो ग्राहक की तरफ से कोई लिखित शिकायत मिली है और न ही मौखिक रूप से कोई सूचना दी गई थी। मीडिया और वायरल वीडियो के माध्यम से ही हमें इस मामले की जानकारी प्राप्त हुई है। यह एक गंभीर मामला है। सोमवार को हमारी विशेष टीम (Food Safety Squad) 'गुप्ता स्वीट्स' पर भेजी जाएगी और वहां के किचन की साफ-सफाई की जांच कराई जाएगी। यदि गुणवत्ता में कोई कमी पाई गई, तो सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।"
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जनता की सेहत बनाम दुकानों की साख

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मेरठ का यह मामला आज के समय में स्ट्रीट फूड और होटल-रेस्तरां के व्यवसाय पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। एक ओर जहां खुले में बनने वाले खाने में साफ-सफाई (Hygiene) का अभाव एक कड़वी सच्चाई है, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया के जरिए किसी भी प्रतिष्ठान की बरसों पुरानी छवि को एक झटके में धूमिल कर देना भी आज बेहद आम हो गया है।
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अब पूरी जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग पर है कि वह निष्पक्ष जांच करे। यदि दुकानदार की रसोई में गंदगी या लापरवाही पाई जाती है, तो उस पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन यदि जांच में यह साबित होता है कि ग्राहक ने जानबूझकर छिपकली डालकर वीडियो बनाया था, तो 'फर्जी वीडियो' और 'ब्लैकमेलिंग' के आरोप में उस पर भी पुलिसिया कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल, इस घटना के बाद मेरठ के लोग बाहर का खाना खाने से पहले दो बार सोचने को मजबूर जरूर हो गए हैं।
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