मेरठ: जीएसटी विभाग ने करोड़ों रुपए की जीएसटी चोरी के आरोप में मेरठ के ब्रह्मपुरी थाने में एक बड़ी धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है। यह फ्रॉड 'भगवती ट्रेडर्स' नामक एक फर्म द्वारा बोगस (फर्जी) इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हस्तांतरित करके अंजाम दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी है।READ ALSO:-क्या 'अफेयर' के विवाद में नर्स पर फेंका गया एसिड? मेरठ में 3 एंगल पर पुलिस जांच, बोतल पर मिले फिंगर प्रिंट से खुलेगा राज
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कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
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राज्य कर खंड 6 के सहायक आयुक्त राजेश कुमार सिंह ने जानकारी दी कि देहली गेट शारदा रोड निवासी कुणाल पुत्र भगवती प्रसाद ने अपने पैन नंबर पर 30 नवंबर 2024 को भगवती ट्रेडर्स के नाम से एक जीएसटी नंबर प्राप्त किया था।
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विभाग को ऐसे लगा फ्रॉड का पता:
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    फर्जी अस्तित्व: विभागीय अधिकारियों ने जब फर्म का भौतिक सर्वेक्षण (Physical Survey) किया, तो पता चला कि कागजातों में दर्शाई गई जमीन पर ऐसी कोई फर्म या व्यापारिक गतिविधि मौजूद नहीं है।
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    संपर्क टूटा: विभाग व्यापारी से फोन पर संपर्क नहीं कर पाया, और आस-पास के व्यापारियों ने भी फर्म की कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया।
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    पंजीकरण रद्द: नोटिस जारी करने के बावजूद व्यापारी ने कोई जवाब नहीं दिया, जिसके बाद उसका पंजीकरण निरस्त कर दिया गया।
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बोगस ITC का खेल
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सहायक आयुक्त ने बताया कि व्यापारी ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह फ्रॉड किया। फर्म ने फरवरी माह में ₹2.03 करोड़ और मार्च माह में ₹4.79 करोड़ की कर योग्य बिक्री दर्शाई।
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    ITC पासऑन: फरवरी में ₹37.32 लाख और मार्च माह में ₹86.26 लाख की आईटीसी (ITC) पासऑन की गई।
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    दिखावटी दावा: व्यापारी ने अपने GSTR-3B में ₹37 लाख और ₹86 लाख से अधिक की आईटीसी क्लेम की, जबकि उसके GSTR-2A की जांच में पाया गया कि उसमें कोई 'ऑटो पापुलेटेड आईटीसी' प्रदर्शित नहीं हो रही थी। इसका सीधा मतलब है कि यह क्रेडिट फर्जी था।
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जय गणेश एंटरप्राइजेज को पहुंचाया लाभ
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जांच में सामने आया कि भगवती ट्रेडर्स ने अपनी GSTR-01 रिटर्न में दिल्ली की जय गणेश एंटरप्राइजेज को ₹6.86 करोड़ की बिक्री घोषित की। इस बिक्री के बहाने, ₹1 करोड़ 23 लाख 58 हजार से अधिक की आईजीएसटी (IGST) की ITC ट्रांसफर की गई। विभाग का कहना है कि यह रकम बिना किसी वास्तविक आपूर्ति प्राप्त किए, बोगस आईटीसी जनरेट करके धोखे से जय गणेश इंटरप्राइजेज को दी गई थी।
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इस बड़े वित्तीय फ्रॉड में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है और अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और लाभार्थियों की तलाश में जुटी हुई है।
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