इंदौर/मेरठ। इस विजयादशमी, इतिहास खुद को दोहराएगा नहीं, बल्कि एक नया अध्याय लिखेगा। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में सदियों से चली आ रही रावण दहन की परंपरा को ध्वस्त करते हुए एक ऐसी 'शूर्पणखा' का दहन किया जाएगा, जिसके एक नहीं, बल्कि 11 सिर होंगे। ये सिर उन 11 महिलाओं के चेहरों से सजाए जाएंगे, जो अपने पतियों की हत्या, प्रताड़ना और धोखेबाजी जैसे संगीन मामलों को लेकर सुर्खियों में रही हैं। इस दहकते हुए पुतले में एक चेहरा मेरठ के दिल दहला देने वाले 'नीले ड्रम हत्याकांड' की मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी का भी होगा।READ ALSO:-मेरठ में हैवानियत की हदें पार, दुकान से सामान न खरीदने पर युवक का कत्ल, सोते हुए सिर पर ईंटों से किया 'मौत का तांडव'
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मेरठ से इंदौर तक: 'गुनाह' के 11 चेहरे
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पुरुष अधिकारों के लिए मुखर संगठन 'पौरुष' द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम सामाजिक मान्यताओं को झकझोरने वाला है। संगठन ने प्रतीकात्मक विरोध के लिए देशभर से 11 ऐसे मामले चुने हैं, जहां पत्नियों पर अपने पतियों के खिलाफ क्रूरतम अपराध करने का आरोप है।
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    मेरठ की 'ड्रम वाली बहू' मुस्कान: जिसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति सौरभ राजपूत की हत्या की और शव को नीले ड्रम में छिपा दिया था।
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    इंदौर की सोनम रघुवंशी: जो राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी है और जिसे विदेशी मीडिया ने 'मुख्य शूर्पणखा' का चेहरा बताया है।
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इनके साथ 9 अन्य महिलाओं के चेहरे इस पुतले का हिस्सा बनेंगे, जो इस बात का प्रतीक होंगे कि 'बुराई' का कोई लिंग नहीं होता और समाज को हर तरह के अपराध के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।
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'शूर्पणखा' की शवयात्रा और दहन का भव्य आयोजन
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यह सिर्फ एक पुतला दहन नहीं, बल्कि एक पूरा आंदोलन है। 2 अक्टूबर को दशहरे के दिन, ढोल-नगाड़ों और नारों के साथ इस 11 सिर वाले पुतले की 'शवयात्रा' पूरे इंदौर शहर में निकाली जाएगी। इसके बाद, शाम को रावण की जगह 'शूर्पणखा' को अग्नि के हवाले किया जाएगा। कार्यक्रम में उन पुरुषों के पीड़ित परिवारों को विशेष रूप से आमंत्रित कर सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने इन घटनाओं में अपनी जान गंवाई।
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क्यों हुआ रावण 'OUT' और शूर्पणखा 'IN'?
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'पौरुष' संस्था के अध्यक्ष अशोक दशोरा ने बताया, "हमारा उद्देश्य किसी महिला का अपमान करना नहीं, बल्कि उस आपराधिक मानसिकता का दहन करना है जो परिवारों को तबाह कर रही है। जब एक पुरुष अपराध करता है तो उसे रावण कहा जाता है, तो जब कोई महिला ऐसा अपराध करे, तो उसे शूर्पणखा के प्रतीक में क्यों न देखा जाए?" संस्था पिछले 15 सालों से झूठे मुकदमों में फंसे पुरुषों, आत्महत्या के कगार पर पहुंचे युवाओं और टूटते परिवारों को बचाने का काम कर रही है। यह आयोजन उसी मुहिम का एक चरम बिंदु है।
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विश्व पटल पर छाया इंदौर का 'शूर्पणखा दहन'
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इस अभूतपूर्व आयोजन की गूंज केवल भारत तक सीमित नहीं है। दुनियाभर के मीडिया संस्थानों की नजरें इस पर टिकी हैं। इसे पुरुष अधिकारों के आंदोलन में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष बरखा त्रेहान से लेकर भाजपा विधायक उषा ठाकुर तक, कई प्रभावशाली हस्तियों ने इस पहल का समर्थन किया है, जिससे यह आयोजन और भी बड़ा बन गया है।
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