उत्तर प्रदेश और Delhi NCR में दीपावली पर हुई जमकर आतिशबाजी का बुरा असर अब हवा की गुणवत्ता में साफ दिख रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, AQI (Air Quality Index) के खतरनाक स्तर पर पहुँचने से लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। प्रदेश के छह बड़े शहर 'रेड ज़ोन' में पहुँच गए हैं, यानी हवा सांस लेने के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं रह गई है। प्रदूषण के चलते गुरुवार (23 अक्टूबर, 2025) की सुबह पूरे क्षेत्र में हल्की धुंध (Smog) छाई रही।Read also:-चित्रकूट के 300 साल पुराने गधा मेले में लगा फिल्मी सितारों का बाजार, शाहरुख खान ₹70 हजार में बिका, सलमान खान को नहीं मिला खरीदार!
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, नोएडा देश के पांच सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहा। सोमवार रात 10 बजे यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 313 दर्ज किया गया।
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310 AQI के साथ गाजियाबाद दूसरे नंबर पर रहा। दोनों शहरों में प्रदूषण के चलते सुबह हल्की धुंध देखने को मिली। इसके बाद हापुड़ में 294, मेरठ में 266 और बागपत में 256 AQI रिकॉर्ड किया गया।
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जानें ग्रैप के स्टेज
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- \r\n स्टेज I 'खराब' (AQI 201-300)\r\n \r\n
- \r\n स्टेज II 'बहुत खराब' (AQI 301-400)\r\n \r\n
- \r\n स्टेज III 'गंभीर' (AQI 401-450)\r\n \r\n
- \r\n स्टेज IV 'गंभीर प्लस' (AQI >450)\r\n \r\n
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2 दिनों में हवा और खराब होने का अनुमान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का पूर्वानुमान है कि 2 दिनों में और भी खराब श्रेणी में पहुंच सकती है। ऐसे में सांस संबंधी रोगियों के लिए यह और अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और अस्वस्थता जैसी समस्या हो सकती है।
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गाजियाबाद के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शरद जोशी ने बचाव के लिए सभी को बाहरी गतिविधियों के दौरान N95 या डबल सर्जिकल मास्क पहनने की सलाह दी है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। वहीं, प्रशासन ने भी प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।
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मेरठ में ध्वनि प्रदूषण ने तोड़े रिकॉर्ड दीपावली पर मेरठ में देर रात तक सुनाई दी पटाखों की गूंज ने शहर के ध्वनि प्रदूषण स्तर को बहुत अधिक प्रभावित किया। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण विभाग के मुताबिक, इस बार दीपावली की रात शहर का सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण शास्त्री नगर में दर्ज किया गया, जहां 84.8 डेसीबल तक शोर पहुंचा। वहीं, सबसे शांत इलाका कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र रहा, जहां 65.3 डेसीबल तक ध्वनि प्रदूषण दर्ज किया गया।
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ध्वनि प्रदूषण में सबसे आगे रेजिडेंशियल एरिया थापर नगर में भी 82.6 डेसीबल तक शोर का स्तर दर्ज किया गया। इसके अलावा शहर की कुछ मुख्य जगह जैसे बेगमपुल पर 81.4 डेसीबल और पल्लवपुरम फेज-1 में 73.2 डेसीबल रहा जो सामान्य से 15–20 डेसीबल अधिक पाया गया। सामान्य दिनों में जहां शोर का स्तर नियंत्रित सीमा में रहता है, वहीं दीपावली की रात पटाखों ने मानकों की सीमा तोड़ दी।
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पिछले एक हफ्ते में कहां कितना प्रदूषण बढ़ा (ध्वनि)
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- \r\n केंट हॉस्पिटल (संवेदनशील): 57.8 से 66.2\r\n \r\n
- \r\n कलेक्ट्रेट (संवेदनशील): 59.7 से 68.1\r\n \r\n
- \r\n रेलवे रोड (वाणिज्यिक): 68.2 से 78.5\r\n \r\n
- \r\n बेगम ब्रिज (वाणिज्यिक): 77.3 से 81.4\r\n \r\n
- \r\n थापर नगर (आवासीय): 65.2 से 82.6\r\n \r\n
- \r\n शास्त्री नगर (आवासीय): 67.5 से 84.8\r\n \r\n
- \r\n कैंटोनमेंट बोर्ड (आवासीय): 58.5 से 65.3\r\n \r\n
- \r\n पल्लवपुरम फेज 1 (आवासीय): 65.3 से 73.2\r\n \r\n
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मानक से काफी अधिक स्तर प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने व्यावसायिक क्षेत्र में दिन में अधिकतम 65 और रात में 55 डेसीबल की सीमा तय की थी। वहीं आवासीय क्षेत्र के लिए सीमा 55 डेसीबल और 45 डेसीबल निर्धारित थी। लेकिन दीपावली पर अधिकतर क्षेत्रों में यह सीमा टूट गई। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ता ध्वनि प्रदूषण लोगों की नींद, तनाव, और हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा सकता है।
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ये हैं शहरों में पॉल्यूशन के बड़े कारण
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- \r\n वायु प्रदूषण में पीएम-10 का 86 प्रतिशत उत्सर्जन सड़कों की धूल के कारण हो रहा है। 6% उत्सर्जन वाहनों से निकलने वाले धुएं से हो रहा है। निर्माण कार्य से 5% व इंडस्ट्री की भूमिका 3% है।\r\n \r\n
- \r\n पीएम-2.5 में 72% हिस्सेदारी सड़कों के धूल की है। 20% वाहनों से हो रहा है। 6% उद्योगों व 3% निर्माण कार्यों के कारण यह हो रहा है।\r\n \r\n
- \r\n वायु प्रदूषण के लिए दोषी सल्फर डाइऑक्साइड की सबसे अधिक 58% मात्रा उद्योगों से आ रही है। वाहनों से यह 21% आ रहा है। नाइट्रोजन आक्साइड का सबसे बड़ा कारक वाहन हैं।\r\n \r\n
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प्रदूषण की वजह पराली जलाना, इसे रोकने के लिए कानून भी बना उत्तर और मध्य भारत में दिवाली के बाद पराली जलाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस वजह से प्रदूषण बढ़ने की रफ्तार भी तेज होने लगती है। हरियाणा और पंजाब में सबसे ज्यादा पराली जलाई जाती है। 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पराली जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था।
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केंद्र सरकार ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) अधिनियम 2021 के तहत पराली जलाने पर नियम लागू किए। इसके मुताबिक 2 एकड़ से कम जमीन पर पराली जलाने पर 5,000 रुपए, 2 से 5 एकड़ पर 10,000 रुपए और 5 एकड़ से ज्यादा पर 30,000 रुपए का जुर्माना लगता है।
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Sabse pehle comment karne wale banein.