मेरठ, उत्तर प्रदेश — अंतरराज्यीय साइबर ठग अलाउद्दीन मलिक के जेल जाने के बाद भी उसके गुर्गों का आतंक जारी था, लेकिन अब मेरठ पुलिस ने उनकी कमर तोड़ दी है। साइबर सेल और लिसाड़ीगेट पुलिस की संयुक्त टीम ने अलाउद्दीन के चार सक्रिय गुर्गों को गिरफ्तार कर लिया है, जो लैपटॉप के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहे थे।READ ALSO:-'बेंगलुरु जैसी सड़कें' अब मेरठ में: 47 करोड़ की लागत से बदलेगी शहर की सूरत, सीएम ग्रिड योजना का हुआ आगाज
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कैसे पकड़े गए ठग?
\r\n\r\nपुलिस को सूचना मिली थी कि अलाउद्दीन मलिक के कुछ साथी अभी भी सक्रिय हैं और घर से ही इंटरनेट कॉल्स के माध्यम से लोगों को चूना लगा रहे हैं। शनिवार को एक बड़ी कार्रवाई में, पुलिस ने इन चार आरोपियों को दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान लक्खीपुरा के आस मोहम्मद और उसके भाई चाँद उर्फ मोनू, तथा लक्खीपुरा के ही भूरा और अहमदनगर के इमरान के रूप में हुई है।
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इनके कब्जे से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद हुई है, जिसमें लैपटॉप, 36 एटीएम कार्ड, 27 बैंक पासबुक, 16 सिम कार्ड और 10 मोबाइल फोन शामिल हैं। पुलिस इन सभी बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही है ताकि ठगी की गई कुल रकम का पता लगाया जा सके।
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कौन है अलाउद्दीन मलिक?
\r\n\r\nआपको बता दें कि इस गिरोह का सरगना अलाउद्दीन मलिक, जो भाजपा से जुड़े अय्यूब मलिक का बेटा है, पहले ही जेल में बंद है। वह दुबई से बैठकर उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, झारखंड और दिल्ली सहित कई राज्यों में करोड़ों की साइबर ठगी कर चुका था। इससे पहले भी पुलिस ने उसके कई साथियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन यह गिरोह लगातार नए सदस्यों को जोड़कर अपनी वारदातों को अंजाम दे रहा था।
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पुलिस का कहना है कि अलाउद्दीन की ठगी की रकम अशरफ चौधरी के उमर पंप के खाते में डालकर निकाली जाती थी। अब इस नए खुलासे के बाद पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी कर रही है। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के बाद अन्य ठगों के ठिकानों पर भी दबिश दी जा रही है। यह गिरफ्तारी साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
Sabse pehle comment karne wale banein.