अंबाला/मेरठ (खबरीलाल विशेष राष्ट्रीय सुरक्षा डेस्क): भारत को एक बार फिर बम धमाकों से दहलाने और खून-खराबा करने की सरहद पार बैठी ताकतों की एक खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। खुफिया एजेंसियों (Intelligence Agencies) और हरियाणा की अंबाला स्पेशल टास्क फोर्स (Ambala STF) के एक बेहद सटीक और गुप्त 'जॉइंट ऑपरेशन' ने देश को एक बड़े आतंकी हमले से बचा लिया है।READ ALSO:-UP LPG-पेट्रोल संकट 2026: अफवाहों से मचे पैनिक के बीच प्रमुख सचिव खाद्य का बड़ा ऐलान, 100% होम डिलीवरी का आश्वासन | 'खबरीलाल' विशेष रिपो
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अंबाला एसटीएफ की एक तेज-तर्रार टीम ने अंबाला जिले के बराड़ा इलाके के पास एक बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार किया है। इन युवकों के पास से कोई आम हथियार नहीं, बल्कि करीब 2 किलो (सटीक रूप से 1 किलो 975 ग्राम) अत्यधिक विनाशकारी विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, प्रथम दृष्टया यह विस्फोटक आरडीएक्स (RDX - Research Department Explosive) प्रतीत हो रहा है, जो दुनिया के सबसे घातक विस्फोटकों में से एक माना जाता है।
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इस पूरी घटना ने हरियाणा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश पुलिस और खुफिया एजेंसियों (UP ATS) की रातों की नींद उड़ा दी है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि पकड़े गए तीन आरोपियों में से एक युवक पश्चिमी यूपी के मेरठ (Meerut) का रहने वाला है। 'खबरीलाल' की इस विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में आइए समझते हैं कि कैसे इस 'ऑपरेशन RDX' को अंजाम दिया गया, ये आतंकी किस बड़ी साजिश की फिराक में थे, और इसके तार पाकिस्तान से कैसे जुड़ रहे हैं।
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कैसे बुना गया 'ऑपरेशन RDX' का जाल: खुफिया एजेंसियों की बड़ी कामयाबी
\r\n\r\nयह कोई अचानक हुई रूटीन चेकिंग नहीं थी, बल्कि कई दिनों से चल रहे एक बेहद गोपनीय खुफिया ऑपरेशन का नतीजा था। सूत्रों के अनुसार, देश की शीर्ष खुफिया एजेंसियों और एक पड़ोसी राज्य की पुलिस (Neighboring State Police) लगातार कुछ संदिग्ध मोबाइल और इंटरनेट गतिविधियों को इंटरसेप्ट कर रही थी।
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ऑपरेशन की टाइमलाइन: खुफिया विभाग को यह पक्की 'लीड' मिली थी कि कुछ स्लीपर सेल (Sleeper Cells) सक्रिय हो गए हैं और उनके पास सीमा पार (पाकिस्तान) से किसी गुप्त रास्ते (संभवतः ड्रोन ड्रॉपिंग के जरिए) भारी मात्रा में विस्फोटक पहुंचाया गया है। इस इनपुट को तुरंत अंबाला एसटीएफ के साथ साझा किया गया। एसटीएफ ने बिना कोई समय गंवाए अपना जाल बिछाया और सटीक लोकेशन ट्रेस करते हुए बराड़ा के पास इन तीनों संदिग्धों को उस समय धर दबोचा, जब वे इस विस्फोटक की खेप को किसी सुरक्षित ठिकाने पर ले जाने या प्लांट करने की फिराक में थे। मौके से भागने की कोशिश कर रहे इन आतंकियों को एसटीएफ के कमांडोज ने चारों तरफ से घेर कर आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया।
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मेरठ का 'आनस', अंबाला का 'जंगवीर' और अजमेर का 'अली अकबर': कौन हैं ये 'मोहरे'?
\r\n\r\nगिरफ्तार किए गए तीनों युवकों की प्रोफाइलिंग जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा रहस्य बनी हुई है। ये तीनों देश के तीन अलग-अलग राज्यों से ताल्लुक रखते हैं:
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- \r\n आनस (Anas): उत्तर प्रदेश के मेरठ का निवासी। (जिसने यूपी एटीएस को हाई अलर्ट पर ला दिया है)।\r\n \r\n
- \r\n जंगवीर (Jangvir): हरियाणा के अंबाला के ही कंबासी गांव का निवासी। मौके से जो बाइक बरामद हुई है, वह इसी जंगवीर की है। इसका काम संभवतः स्थानीय रसद (Local Logistics) और रास्तों की जानकारी मुहैया कराना था।\r\n \r\n
- \r\n अली अकबर (Ali Akbar): राजस्थान के अजमेर का निवासी।\r\n \r\n
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सोशल मीडिया का 'डार्क वेब' और वर्चुअल हैंडलर्स: एसटीएफ की प्रारंभिक जांच में एक रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा हुआ है। ये तीनों युवक आपस में कोई पुराने दोस्त या रिश्तेदार नहीं थे, बल्कि वे एक दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानते तक नहीं थे। जांच में सामने आया है कि ये तीनों एक विशेष 'सोशल मीडिया ऐप' (Social Media App) के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में आए थे।
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सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह 'वर्चुअल टेररिज्म' (Virtual Terrorism) का एक क्लासिक उदाहरण है। सरहद पार बैठे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI या आतंकी संगठनों के 'हैंडलर' सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, एन्क्रिप्टेड चैट ऐप्स और डार्क वेब के जरिए भारतीय युवाओं का 'ब्रेनवाश' (Radicalization) करते हैं। उन्हें कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाया जाता है और फिर 'लोन वुल्फ' (Lone Wolf) या छोटे मॉड्यूल के रूप में भारत में ही धमाके करने के लिए तैयार किया जाता है। हैंडलर ने ही ऐप के जरिए इन तीनों को एक 'टास्क' दिया था और उन्हें एक जगह इकट्ठा होने का निर्देश दिया था।
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1 किलो 975 ग्राम मौत का सामान: कितना खतरनाक है RDX?
\r\n\r\nतलाशी लेने पर युवकों के पास से जो बैग मिला, उसमें 1 किलो 975 ग्राम विस्फोटक बरामद हुआ। हालांकि, अभी फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम इसकी सटीक प्रकृति की जांच कर रही है, लेकिन प्रारंभिक जांच में इसके आरडीएक्स होने की पूरी आशंका है।
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RDX (साइक्लोट्रिमेथिलीन ट्राइनाइट्रामाइन) का खौफ: आम जनता के लिए यह समझना जरूरी है कि 2 किलो आरडीएक्स का मतलब क्या होता है। आरडीएक्स एक 'मिलिट्री-ग्रेड' (Military Grade) विस्फोटक है। यह टीएनटी (TNT) से कई गुना अधिक शक्तिशाली होता है। मात्र 2 किलो आरडीएक्स से किसी भीड़भाड़ वाले बाजार, रेलवे स्टेशन, या किसी बड़ी सरकारी इमारत को खंडहर में तब्दील किया जा सकता है। इसमें सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी। भारत ने अतीत में मुंबई हमले, पुलवामा और कई अन्य बड़े आतंकी हमलों में आरडीएक्स की विनाशकारी ताकत को देखा है। इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक का मिलना इस बात का सीधा संकेत है कि साजिश कितनी खौफनाक थी और 'टारगेट' कितना बड़ा था।
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बराड़ा में 5 घंटे तक थमी रहीं सांसें: 2 घंटे हाईवे रहा सील
\r\n\r\nविस्फोटक की बरामदगी के बाद अंबाला पुलिस और प्रशासन ने कोई जोखिम नहीं लिया। स्थिति की गंभीरता और संभावित खतरे (Live Bomb Threat) को देखते हुए तुरंत 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SOP) लागू किया गया।
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- \r\n हाईवे सील: दोसड़का से बराड़ा जाने वाले मुख्य मार्ग को सुरक्षा बलों ने तुरंत अपने नियंत्रण में ले लिया और इसे आम यातायात के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया।\r\n \r\n
- \r\n एक किलोमीटर की बैरिकेडिंग: घटनास्थल से एक किलोमीटर के दायरे में दोनों तरफ भारी बैरिकेडिंग कर दी गई ताकि कोई भी नागरिक गलती से भी खतरे के क्षेत्र में प्रवेश न कर सके। इस दौरान लोगों में भारी दहशत का माहौल रहा।\r\n \r\n
- \r\n बम निरोधक दस्ते (BDS) का एक्शन: सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) अपनी विशेष किट और स्निफर डॉग्स (Sniffer Dogs) के साथ मौके पर पहुंचा। जान की परवाह किए बिना, विशेषज्ञों की टीम ने अत्यधिक सावधानी बरतते हुए बरामद विस्फोटक की जांच की और उसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय (Defuse) करवाया।\r\n \r\n
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कार्रवाई के दौरान करीब दो घंटे तक तो मुख्य मार्ग पूरी तरह से बंद रहा, जिसके कारण लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। वहीं, एसटीएफ, आईबी (IB) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की टीमें दोपहर 3 बजे से लेकर रात 8 बजे तक (करीब 5 घंटे) मौके पर कैंप किए रहीं और चप्पे-चप्पे की तलाशी ली।
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'ऑपरेशन क्लीन' में जुटी मेरठ पुलिस: 'आनस' की कुंडली खंगाल रही UP ATS
\r\n\r\nअंबाला में जैसे ही 'आनस' का नाम सामने आया, उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस और खुफिया महकमे में हड़कंप मच गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मेरठ, पहले भी कई बार स्लीपर सेल और आतंकी गतिविधियों को लेकर जांच एजेंसियों के रडार पर रहा है।
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आनस की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही मेरठ पुलिस, उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (UP ATS) और स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) पूरी तरह से 'एक्शन मोड' में आ गई है।
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- \r\n जड़ें खंगालने की कवायद: मेरठ पुलिस की विशेष टीमें आनस के घर, उसके परिवार, उसके दोस्तों और उसके कार्यस्थल (यदि कोई हो) की सघन जांच कर रही हैं।\r\n \r\n
- \r\n लोकल स्लीपर सेल की तलाश: एटीएस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आनस मेरठ में कोई लोकल मॉड्यूल चला रहा था? क्या उसके साथ शहर के कुछ और युवा भी इस नापाक साजिश में शामिल थे?\r\n \r\n
- \r\n फंडिंग का नेटवर्क: आखिर एक आम युवक को इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक खरीदने या ट्रांसपोर्ट करने के लिए पैसा (Terror Funding) कहां से मिल रहा था? इसके बैंक अकाउंट और हवाला ट्रांजेक्शन की भी जांच की जा रही है। पुलिस उसके मोहल्ले और आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है ताकि उसका पूरा 'क्रिमिनल प्रोफाइल' तैयार किया जा सके।\r\n \r\n
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आज कोर्ट में पेशी और रिमांड का चक्रव्यूह: STF के तरकश में हैं ये बड़े सवाल
\r\n\r\nआज (शनिवार को) एसटीएफ पुलिस कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच तीनों खूंखार आरोपियों (जंगवीर, आनस और अली अकबर) को अंबाला की संबंधित अदालत में पेश करेगी। जांच एजेंसियां अदालत से इनकी अधिकतम कस्टडी रिमांड (Police Remand) की मांग करेंगी।
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रिमांड मिलने के बाद इन आतंकियों से जॉइंट इंटेरोगेशन सेंटर (JIC) में कड़ी पूछताछ की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियों को इन अहम सवालों के जवाब तलाशने हैं:
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- \r\n विस्फोटक का सोर्स: यह 2 किलो आरडीएक्स भारत में कैसे दाखिल हुआ? क्या इसे पंजाब या राजस्थान सीमा पर ड्रोन के जरिए गिराया गया था?\r\n \r\n
- \r\n टारगेट क्या था: इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक लेकर वे कहां जा रहे थे? क्या कोई बड़ा नेता, रेलवे स्टेशन या धार्मिक स्थल उनके निशाने पर था?\r\n \r\n
- \r\n हैंडलर की पहचान: सोशल मीडिया ऐप पर उन्हें निर्देश देने वाला पाकिस्तानी हैंडलर कौन है?\r\n \r\n
- \r\n स्लीपर सेल का नेटवर्क: भारत में फैले उनके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग संलिप्त हैं जो उन्हें पनाह (Shelter) या रसद दे रहे थे?\r\n \r\n
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यह गिरफ्तारी भारत की सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी का एक शानदार उदाहरण है। समय रहते की गई इस कार्रवाई ने न केवल एक बड़े खून-खराबे को रोक लिया है, बल्कि सरहद पार बैठी आतंकी ताकतों को यह कड़ा संदेश भी दिया है कि भारत का खुफिया तंत्र उन्हें उनके नापाक मंसूबों में कभी कामयाब नहीं होने देगा।
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(देश की आंतरिक सुरक्षा, टेरर नेटवर्क के खुलासे और मेरठ पुलिस की कार्रवाई से जुड़े पल-पल के एक्सक्लूसिव अपडेट्स के लिए लगातार पढ़ते रहें 'खबरीलाल' न्यूज़ पोर्टल।)
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