लखनऊ, शनिवार: उत्तर प्रदेश में पिछले कई दिनों से चल रहे 'आई लव मोहम्मद' विवाद ने अब राजधानी लखनऊ में एक नया मोड़ ले लिया है। कानपुर से शुरू हुए इस मामले को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी और विरोध-प्रदर्शन के बीच, शनिवार को लखनऊ की सड़कों पर 'आई लव योगी आदित्यनाथ' और 'आई लव बुलडोजर' लिखे होर्डिंग्स देखे गए।READ ALSO:-बरेली बवाल पर गरजे CM योगी: "मौलाना भूल गया शासन किसका है, पीढ़ियां दंगे करना भूल जाएंगी"; लखनऊ में लगे 'आई लव बुलडोजर' के होर्डिंग
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यह होर्डिंग्स भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM), लखनऊ के महासचिव अमित त्रिपाठी द्वारा शहर के कई प्रमुख स्थानों पर लगवाए गए हैं। इन पोस्टरों की तस्वीरें सामने आते ही प्रदेश के सियासी गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n#WATCH लखनऊ (उत्तर प्रदेश): 'आई लव मुहम्मद' विरोध प्रदर्शन के बाद भाजपा युवा मोर्चा लखनऊ के महासचिव अमित त्रिपाठी ने शहर के कई हिस्सों में 'आई लव श्री योगी आदित्यनाथ जी' और 'आई लव बुलडोजर' का पोस्टर लगाया। pic.twitter.com/DHUF24JKkC
\r\n— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 27, 2025
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क्या है पूरा मामला?
\r\n\r\nशनिवार सुबह लखनऊ के कई इलाकों में लोगों का ध्यान उन बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स ने खींचा, जिन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के साथ 'आई लव योगी आदित्यनाथ' और बुलडोजर की तस्वीर के साथ 'आई लव बुलडोजर' लिखा हुआ था। इन होर्डिंग्स को 'आई लव मोहम्मद' विवाद के सीधे जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। होर्डिंग लगवाने वाले BJYM नेता अमित त्रिपाठी ने इसे अपनी और संगठन की भावना का प्रदर्शन बताया है।
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कहां से शुरू हुआ था विवाद?
\r\n\r\nइस पूरे 'पोस्टर वॉर' की जड़ें कानपुर में 9 सितंबर को हुए एक घटनाक्रम से जुड़ी हैं:
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- \r\n 9 सितंबर, कानपुर: बारावफात के जुलूस के दौरान एक सार्वजनिक मार्ग पर 'आई लव मोहम्मद' लिखे हुए बोर्ड लगाए गए थे।\r\n \r\n
- \r\n पुलिस की कार्रवाई: इस मामले में पुलिस ने इसे सार्वजनिक मार्ग पर यातायात बाधित करने और सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास मानते हुए 9 नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी।\r\n \r\n
- \r\n ओवैसी का बयान: मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बयान दिया कि 'आई लव मोहम्मद' कहना या लिखना कोई अपराध नहीं है।\r\n \r\n
- \r\n विवाद का विस्तार: इसके बाद यह मामला उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों से होता हुआ उत्तराखंड और कर्नाटक तक पहुंच गया, जहां इस मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन और पुलिस की सख्ती भी देखने को मिली।\r\n \r\n
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सियासी मायने: पोस्टर के जरिये संदेश देने की कोशिश
\r\n\r\nलखनऊ में लगे इन नए पोस्टरों को भाजपा युवा मोर्चा द्वारा एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। 'योगी आदित्यनाथ' का नाम प्रदेश में मौजूदा शासन और 'बुलडोजर' कानून-व्यवस्था के सख्त मॉडल का प्रतीक बन चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि इन होर्डिंग्स के जरिए विपक्ष को यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि प्रदेश में योगी सरकार की नीतियां और उनका नेतृत्व ही सर्वोपरि है। इस घटना ने प्रदेश में पहले से ही गर्म राजनीतिक माहौल को और बढ़ा दिया है।