लखनऊ/बरेली: बरेली में जुमे की नमाज के बाद हुए हिंसक बवाल पर अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और बेहद सख्त संदेश दिया है. एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा, "मौलाना भूल गया कि शासन किसका है... ऐसा सबक सिखाएंगे कि तुम्हारी आने वाली पीढ़ियां दंगे करना भूल जाएंगी." मुख्यमंत्री का यह बयान उस वक्त आया है जब बरेली पुलिस इस मामले में ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है.READ ALSO:-बरेली में बवाल: 'आई लव मोहम्मद' के नारे से गिरफ्तारी तक, मौलाना तौकीर रजा समेत 8 गिरफ्तार, पुलिस ने दर्ज किए 11 मुकदमे
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'शासन' की सीधी चेतावनी, मौलाना को सीधा संदेश
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में दंगा और अव्यवस्था फैलाने वालों को कड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा, "वो मानता था कि धमकी देंगे और जबरदस्ती जाम कर देंगे. हमने कहा कि जाम नहीं होगा. कर्फ्यू भी नहीं लगने देंगे." उनका यह बयान सीधे तौर पर आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा पर हमले के तौर पर देखा जा रहा है, जिन्हें इस पूरे बवाल का मास्टरमाइंड माना जा रहा है.
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बरेली में पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन'
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मुख्यमंत्री के सख्त रुख के साथ ही बरेली में पुलिस का एक्शन भी तेज हो गया है:
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    मौलाना 14 दिन के लिए जेल में: गिरफ्तार किए गए मौलाना तौकीर रजा को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
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    8 गिरफ्तार, 2000 पर FIR: मौलाना समेत कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. वहीं, 5 थानों में 2000 अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं.
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    शिकंजे में तौकीर रजा: दर्ज हुए कुल 10 मुकदमों में से 7 में सीधे तौर पर मौलाना तौकीर रजा का नाम शामिल है.
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लखनऊ की सड़कों पर 'पोस्टर वॉर', बाराबंकी में भी हंगामा
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बरेली की आग अब प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी सुलगती दिख रही है.
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    'आई लव योगी' के होर्डिंग: राजधानी लखनऊ की सड़कों पर रातों-रात नए होर्डिंग लग गए हैं, जिन पर लिखा है- 'आई लव श्री योगी आदित्यनाथ जी' और 'आई लव बुलडोजर'. इसे बरेली की घटना पर एक तरह की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है.
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    पोस्टर फाड़ने पर बवाल: उधर, बाराबंकी में देर रात 'आई लव मोहम्मद' के पोस्टर फाड़े जाने को लेकर दो समुदाय आमने-सामने आ गए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया. भारी पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला.
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विवाद की जड़: कानपुर से बरेली तक
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यह पूरा विवाद 4 सितंबर को कानपुर से शुरू हुआ था. बारावफात के जुलूस के दौरान 'I Love Muhammad' लिखे एक लाइटबोर्ड को लेकर हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई थी. पुलिस ने बैनर हटाकर केस दर्ज किया, लेकिन तब तक यह नारा एक मुहिम बन चुका था, जिसके समर्थन और विरोध में प्रदेश के कई शहरों में पोस्टर लगने शुरू हो गए. बरेली में इसी मुहिम के तहत मौलाना तौकीर रजा ने प्रदर्शन का आह्वान किया था, जबकि प्रशासन ने धारा 144 (अब बीएनएस की धारा 163) लागू होने का हवाला देते हुए इसकी अनुमति नहीं दी थी.
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"यह मोहम्मद से मोहब्बत नहीं, चीप पब्लिसिटी है": सुप्रीम कोर्ट की वकील
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इस पूरे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की वकील फराह फैज ने तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा, "'आई लव मोहम्मद' का नारा लगाना महज चीप पब्लिसिटी है. यह मोहम्मद से मोहब्बत जताने का तरीका नहीं हो सकता. उन्होंने इंसानियत और राष्ट्रप्रेम की राह दिखाई थी. जो लोग ऐसे नारे लगा रहे हैं, उन्हें पहले 'मदीना चार्टर' पढ़ना चाहिए. कानून और संविधान से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए."
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