आज की तेज रफ्तार, तनाव (Stress) और कॉम्पिटिशन भरी लाइफस्टाइल में सिगरेट, तंबाकू और गांजा जैसे नशीले पदार्थ युवाओं के बीच तेजी से आम होते जा रहे हैं। कई युवा इन्हें सिर्फ वीकेंड की पार्टी, दोस्तों के साथ एन्जॉय करने या सोशल मीडिया के 'ट्रेंड' का हिस्सा मानकर इनका सेवन शुरू करते हैं। शुरुआत में ये आदतें हल्की और हानिरहित लगती हैं, लेकिन उन्हें इस बात का जरा भी इल्म नहीं होता कि धुएं का हर कश उनके शरीर और खासकर उनके दिमाग (Brain) की गहराइयों में किस तरह का जहर घोल रहा है।READ ALSO:-मेरठ: खत्री समाज ने सादगी और सम्मान के साथ मनाई पूर्व राज्यपाल लालजी टंडन की जयंती, युवाओं को दिया प्रेरणादायक संदेश
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हमेशा से यह तो बताया जाता रहा है कि धूम्रपान से फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) या हृदय रोग होते हैं, लेकिन हाल ही में सिगरेट और गांजे के सेवन को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली साइंटिफिक रिसर्च सामने आई है। इस रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि ये नशीले पदार्थ आपके सोचने, समझने और याद रखने की क्षमता को किस हद तक बर्बाद कर सकते हैं।
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क्या कहती है नई रिसर्च? (The Study in Addiction Journal)
\r\n\r\nहाल ही में मशहूर वैज्ञानिक पत्रिका 'एडिक्शन जर्नल' (Addiction Journal) में एक विस्तृत रिसर्च प्रकाशित हुई है। यह रिसर्च इस बात पर केंद्रित थी कि सिगरेट और गांजे जैसे 'न्यूरोएक्टिव पदार्थ' (Neuroactive Substances - वे पदार्थ जो सीधे नर्वस सिस्टम पर असर डालते हैं) इंसान के दिमाग की भौतिक संरचना (Physical Structure) को कैसे बदलते हैं।
\r\n\r\nइस स्टडी में वैज्ञानिकों ने अलग-अलग तरह के उन्नत डेटा सेट का इस्तेमाल किया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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- \r\n क्रॉस-सेक्शनल डेटा (Cross-sectional Data)\r\n \r\n
- \r\n लॉन्गिट्यूडिनल डेटा (Longitudinal Data)\r\n \r\n
- \r\n मेंडेलियन रैंडमाइजेशन (Mendelian Randomization - MR)\r\n \r\n
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दिमाग में आ रही है 'सिकुड़न' (Brain Shrinkage): रिसर्च के नतीजे बेहद चिंताजनक हैं। स्टडी में पाया गया कि लंबे समय तक इन पदार्थों का इस्तेमाल करने से इंसान के 'ब्रेन सेल्स' (मस्तिष्क की कोशिकाओं) और 'न्यूरल नेटवर्क' पर सीधा और नकारात्मक असर पड़ता है। सबसे डरावना तथ्य यह सामने आया कि जो लोग नियमित रूप से धूम्रपान या गांजे का सेवन करते हैं, उनके दिमाग के कई हिस्सों में सिकुड़न (Shrinkage) देखी गई है। यानी, उनका दिमाग भौतिक रूप से छोटा हो रहा है।
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तंबाकू का दिमाग पर असर: 'ग्रे मैटर' (Grey Matter) को पहुंच रहा नुकसान
\r\n\r\nस्टडी के अनुसार, गांजे की तुलना में तंबाकू (Tobacco/Cigarette) का असर दिमाग पर बहुत ज्यादा स्पष्ट, सीधा और विनाशकारी पाया गया है।
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- \r\n ग्रे मैटर में कमी: तंबाकू का लगातार सेवन करने वाले लोगों के दिमाग में 'ग्रे मैटर' (Grey Matter) का आकार और वॉल्यूम कम देखा गया है।\r\n \r\n
- \r\n क्यों जरूरी है ग्रे मैटर? मानव मस्तिष्क में ग्रे मैटर वह हिस्सा है जो हमारी मेमोरी (याददाश्त), भावनाओं (Emotions), और निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making) को नियंत्रित करता है।\r\n \r\n
- \r\n जब इस हिस्से में सिकुड़न आती है, तो व्यक्ति की सोचने-समझने की गति धीमी हो जाती है, वह जल्दी चीजें भूलने लगता है और सही समय पर सही फैसले लेने में असमर्थ होने लगता है।\r\n \r\n
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गांजे (Marijuana) का असर: डर और भावनाओं का केंद्र हो रहा प्रभावित
\r\n\r\nगांजे (Cannabis) के प्रभाव को लेकर इस रिसर्च में जो नतीजे आए हैं, वे भी कम डरावने नहीं हैं। हालांकि गांजे के लंबे समय के असर पर अभी डेटा सीमित है और रिसर्च जारी है, लेकिन स्टडी में एक अहम बात सामने आई है।
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- \r\n अमिगडाला (Amygdala) का छोटा होना: रिसर्च में पाया गया कि जो लोग गांजे का सेवन करते हैं, उनमें से कुछ लोगों के दिमाग का एक खास हिस्सा, जिसे 'अमिगडाला' कहते हैं, साइज में छोटा पाया गया।\r\n \r\n
- \r\n अमिगडाला का काम क्या है? यह हमारे दिमाग का वह हिस्सा है जो मुख्य रूप से हमारी भावनाओं (खासकर डर और चिंता) और सर्वाइवल इंस्टिंक्ट (Survival Instinct) को प्रोसेस करता है। इसके प्रभावित होने से व्यक्ति को घबराहट, एंग्जाइटी (Anxiety) और डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, यह असर हर व्यक्ति में एक समान नहीं देखा गया है।\r\n \r\n
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डबल अटैक: जब सिगरेट और गांजा दोनों का एक साथ हो इस्तेमाल
\r\n\r\nआजकल युवाओं में तंबाकू (सिगरेट) और गांजा दोनों को एक साथ या मिलाकर (जैसे जॉइंट में) पीने का चलन भी काफी बढ़ गया है।
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रिसर्च में चेतावनी दी गई है कि जब कोई व्यक्ति इन दोनों खतरनाक पदार्थों का एक साथ 'कॉम्बिनेशन' इस्तेमाल करता है, तो इसका दिमाग पर असर बेहद जटिल (Complex) और खतरनाक हो जाता है। हालांकि इस कॉम्बिनेशन के दीर्घकालिक प्रभावों पर अभी पर्याप्त वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ब्रेन हेल्थ के लिए एक 'डबल रिस्क' (Double Risk) है। यह न केवल मानसिक संतुलन बिगाड़ सकता है, बल्कि इंसान की लंबी और स्वस्थ उम्र को भी तेजी से घटा सकता है।
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समय रहते संभलना है जरूरी
\r\n\r\nयह रिसर्च इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि 'थोड़ा सा धुआं' आपके दिमाग की वायरिंग को हमेशा के लिए खराब कर सकता है। सिगरेट और गांजा न सिर्फ कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बनते हैं, बल्कि ये आपके दिमाग को खोखला कर रहे हैं। यदि आप भी इस लत का शिकार हैं, तो आज ही इसे छोड़ने का संकल्प लें। योग, मेडिटेशन और स्वस्थ आहार (Healthy Diet) को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
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(Disclaimer: यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स और पब्लिक डोमेन में मौजूद विभिन्न रिसर्च स्टडीज पर आधारित है। खबरीलाल मीडिया इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। किसी भी लत को छोड़ने या स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए हमेशा किसी योग्य डॉक्टर या मनोवैज्ञानिक से परामर्श लें।)