उत्तर प्रदेश में अपराधियों और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति का एक और बड़ा उदाहरण गाजियाबाद में देखने को मिला है। राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद के लोनी इलाके में चर्चित यूट्यूबर सलीम अहमद उर्फ़ सलीम वास्तिक (Salim Wastik) पर हुए बर्बर हमले के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने इतिहास की सबसे तेज कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है।Read also:-मेरठ सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण का खौफ: व्यापारियों ने लगाए 'बिकाऊ' के पोस्टर, खुद उखाड़ रहे शटर और लाइटें, RTI कार्यकर्ता पर फूटा गुस्सा
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दिनदहाड़े एक निहत्थे व्यक्ति पर 14 बार चाकू से वार करने वाले दोनों मुख्य आरोपियों—जीशान और गुलफाम—को पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर दो अलग-अलग एनकाउंटर (मुठभेड़) में ढेर कर दिया है। यह घटना न केवल पूरे प्रदेश में बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
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क्या है पूरा मामला? (The Salim Wastik Case Attack)

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घटना 27 फरवरी की है। गाजियाबाद का लोनी इलाका, जो अपनी घनी आबादी के लिए जाना जाता है, वहाँ की अशोक विहार कॉलोनी में रोजमर्रा की तरह चहल-पहल थी। 50 वर्षीय सलीम अहमद उर्फ़ सलीम वास्तिक अपने ऑफिस में बैठे थे। तभी बिना नंबर प्लेट की एक बाइक पर सवार होकर दो नकाबपोश बदमाश वहाँ पहुँचते हैं।
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 यूट्यूबर सलीम वास्तिक के शरीर पर चाकू से हमले के 14 निशान मिले हैं। (फाइल फोटो)

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चश्मदीदों और पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, बदमाशों ने बिना कोई मौका दिए सलीम वास्तिक पर ताबड़तोड़ चाकुओं से हमला कर दिया। हमलावरों के सिर पर खून सवार था; उन्होंने सलीम के शरीर पर एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे 14 बार चाकू से वार किए। हमलावरों ने उनका गला रेतने की भी खौफनाक कोशिश की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनका इरादा केवल डराना नहीं, बल्कि जान से मारना ही था।
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खून से लथपथ सलीम को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें दिल्ली के जीटीबी (GTB) अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिलहाल, सलीम वास्तिक जिंदगी और मौत के बीच एक लंबी जंग लड़ रहे हैं।
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कौन हैं सलीम वास्तिक और क्यों हुए वो निशाने पर?

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सलीम वास्तिक पर हुए इस हमले की जड़ें उनकी सोशल मीडिया उपस्थिति और उनके बेबाक विचारों में छिपी हैं।
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    यूट्यूब चैनल: सलीम यूट्यूब पर 'सलीम वास्तिक 0007' नाम से एक चैनल चलाते हैं, जिसके करीब 30 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं।
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    विचारधारा: सलीम खुद को एक 'एक्स-मुस्लिम' (Ex-Muslim) बताते हैं। वह अक्सर अपने वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट्स के माध्यम से इस्लाम धर्म, मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा और विभिन्न धार्मिक अंधविश्वासों पर खुलकर सवाल उठाते रहे हैं।
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    धमकियों का सिलसिला: उनके इन बेबाक विचारों के कारण उन्हें अक्सर कट्टरपंथियों के निशाने पर रहना पड़ता था। हमले से ठीक पहले सलीम ने अपने एक वीडियो में खुलासा किया था कि लगातार रिपोर्टिंग के कारण उनका फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट करवा दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि वह इन हथकंडों से डरने वाले नहीं हैं और अपनी बात रखते रहेंगे।
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ऑपरेशन क्लीन: 48 घंटे में पुलिस का पलटवार

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हमले के तुरंत बाद गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कई टीमें गठित कीं। सलीम के बेटे उस्मान की तहरीर पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) नेता समेत 7 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज की। परिजनों का स्पष्ट आरोप था कि सलीम की हत्या की एक गहरी और सुनियोजित साजिश रची गई थी।
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पुलिस की सर्विलांस और स्वाट (SWAT) टीमें लगातार हमलावरों की तलाश में दबिश दे रही थीं। और फिर शुरू हुआ यूपी पुलिस का एक्शन।
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पहला एनकाउंटर: 1 मार्च को मुख्य आरोपी जीशान ढेर

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हमले के कुछ ही दिनों बाद, 1 मार्च की रात को लोनी इलाके में पुलिस को मुख्य आरोपियों के छिपे होने की गुप्त सूचना मिली। जब पुलिस ने घेराबंदी की, तो बदमाशों ने सरेंडर करने के बजाय पुलिस टीम पर ही फायरिंग शुरू कर दी।
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    इस भीषण मुठभेड़ में मुख्य आरोपी जीशान को पुलिस की गोली लगी और वह मारा गया।
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    जीशान इतना शातिर था कि उस पर पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
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    बदमाशों की तरफ से हुई फायरिंग में लोनी थाना प्रभारी की बुलेटप्रूफ जैकेट में गोली लगी, जिससे उनकी जान बाल-बाल बची। इसके अलावा दो अन्य पुलिसकर्मी भी इस ऑपरेशन में घायल हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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दूसरा एनकाउंटर: मंगलवार रात भाई गुलफाम का भी खात्मा

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जीशान के मारे जाने के बाद उसका बड़ा भाई और हमले का दूसरा मुख्य आरोपी, गुलफाम फरार था। लेकिन उसकी फरारी ज्यादा लंबी नहीं चल सकी। एडिशनल डीसीपी (DCP) क्राइम पीयूष सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार रात स्वाट टीम और स्थानीय पुलिस इंदिरापुरम के वसुंधरा इलाके में सघन चेकिंग अभियान चला रही थी।
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    घटनाक्रम: रात के अंधेरे में बाइक सवार दो संदिग्ध आते हुए दिखाई दिए। जब पुलिस ने टॉर्च की रोशनी से उन्हें रुकने का इशारा किया, तो उन्होंने भागने की कोशिश की और खुद को घिरता देख सीधे पुलिस टीम पर गोलियां बरसाने लगे।
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    20 राउंड से ज्यादा फायरिंग: बदमाशों की पहली गोलीबारी में एक सिपाही घायल हो गया। इसके बाद बदमाश अपनी बाइक वहीं छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए भागने लगे। पुलिस ने मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई की। दोनों तरफ से लगभग 20 राउंड से ज्यादा फायरिंग हुई।
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    गुलफाम की मौत: इस क्रॉस-फायरिंग में एक बदमाश को गोली लगी और वह जमीन पर गिर पड़ा, जबकि उसका दूसरा साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। घायल बदमाश को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
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    पहचान और बरामदगी: मृतक की शिनाख्त गुलफाम पुत्र बुनियाद अली (निवासी सैद नगली, जिला अमरोहा) के रूप में हुई। पुलिस ने उसके पास से एक पिस्टल, एक तमंचा, भारी मात्रा में जिंदा कारतूस और एक आधार कार्ड बरामद किया है।
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कानून-व्यवस्था का कड़ा संदेश (The Zero Tolerance Message)

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गाजियाबाद में हुए ये लगातार दो एनकाउंटर उत्तर प्रदेश सरकार की अपराध नियंत्रण नीति का एक और बड़ा उदाहरण पेश करते हैं। अमरोहा के सैद नगली के रहने वाले इन दोनों भाइयों (जीशान और गुलफाम) ने शायद यह नहीं सोचा था कि दिनदहाड़े गाजियाबाद जैसे वीआईपी (VIP) जिले में इस तरह की दुस्साहसिक वारदात को अंजाम देने के बाद वे बच निकलेंगे।
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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है। चाहे कोई वैचारिक मतभेद हो या आपसी रंजिश, दिनदहाड़े चाकुओं से गोदकर किसी की हत्या का प्रयास करना सीधे तौर पर राज्य की कानून-व्यवस्था को चुनौती देना है, और पुलिस ऐसी चुनौतियों का जवाब उसी की भाषा में देना जानती है।
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आगे क्या? (What's Next in the Investigation?)

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भले ही हमले को अंजाम देने वाले दोनों मुख्य शूटर (जीशान और गुलफाम) पुलिस मुठभेड़ में मारे गए हों, लेकिन यह केस अभी बंद नहीं हुआ है। पुलिस की जांच अब इस साजिश के 'मास्टरमाइंड' (Mastermind) तक पहुँचने पर केंद्रित है।
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    साजिशकर्ताओं की तलाश: एफआईआर में नामजद AIMIM नेता और अन्य आरोपियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन दोनों भाइयों को सलीम वास्तिक की हत्या की सुपारी किसने दी थी और इसके पीछे की फंडिंग (Funding) कहाँ से आई थी।
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    फरार साथी की खोज: इंदिरापुरम एनकाउंटर में अंधेरे का फायदा उठाकर भागने वाले गुलफाम के दूसरे साथी की तलाश में कॉम्बिंग ऑपरेशन अभी भी जारी है।
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सलीम वास्तिक पर हुआ यह हमला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उस पर उठने वाले खतरों की एक डरावनी तस्वीर पेश करता है। वैचारिक असहमति के कारण किसी की जान लेने का प्रयास करना एक सभ्य समाज में कतई स्वीकार्य नहीं है। यूपी पुलिस ने 48 घंटे के भीतर दोनों हमलावरों को मार गिराकर यह साफ संदेश दे दिया है कि अपराधियों के लिए अब उत्तर प्रदेश में कोई सुरक्षित पनाहगाह नहीं है। फिलहाल, सभी की दुआएं सलीम वास्तिक के साथ हैं, जो दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
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