गाजियाबाद (मोदीनगर)। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मोदीनगर कस्बे से सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के बीच हिंसक टकराव का एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और आपसी रंजिश इस कदर हावी हो गई कि नेताओं ने सरेआम कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दीं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व जिला उपाध्यक्ष नितिन मित्तल को भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के मंडल उपाध्यक्ष और उनके दर्जनों समर्थकों ने बीच सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर बुरी तरह पीटा। रविवार देर रात हुई इस हिंसक वारदात ने इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।READ ALSO:-यूपी में आसमानी आफत: बिजनौर में बाढ़ का तांडव, गंगा-घाघरा उफान पर; मौसम विभाग का 75 जिलों में भारी बारिश का 'रेड अलर्ट'
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इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसमें सत्ता पक्ष के नेता एक-दूसरे के खून के प्यासे नजर आ रहे हैं। इस पूरी घटना के तार दो महीने पहले हुए एक बड़े विवाद से जुड़े हैं, जब नितिन मित्तल पर पार्टी की ही एक महिला पदाधिकारी को कथित रूप से अश्लील मैसेज भेजने का गंभीर आरोप लगा था। उसी दिन से पार्टी के अंदर सुलग रही रंजिश की आग रविवार रात को ज्वालामुखी बनकर सड़क पर फूट पड़ी। आइए, सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर सत्ता के गलियारों से शुरू हुआ यह विवाद सड़क छाप गुंडागर्दी तक कैसे पहुंच गया।
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विवाद की जड़: दो महीने पहले का 'अश्लील मैसेज' कांड
\r\n\r\nइस खूनी संघर्ष की पटकथा रातों-रात नहीं लिखी गई, बल्कि इसकी नींव ठीक दो महीने पहले ही पड़ गई थी। उस वक्त भाजपा के तत्कालीन जिला उपाध्यक्ष नितिन मित्तल अचानक एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गए थे। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने भाजपा महिला मोर्चा की एक प्रमुख पदाधिकारी को व्हाट्सएप पर आपत्तिजनक और कथित अश्लील संदेश भेजे हैं।
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सत्ताधारी पार्टी के इतने बड़े पदाधिकारी पर जब ऐसा संगीन आरोप लगा, तो पार्टी के भीतर भूचाल आ गया। मामला सामने आते ही महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने भारी आक्रोश व्यक्त किया। महिला कार्यकर्ताओं ने नितिन मित्तल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया और उनके खिलाफ पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई। इस घटना ने पार्टी की काफी फजीहत कराई और संगठन के भीतर दो फाड़ की स्थिति पैदा कर दी।
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\r\n\r\nविधायक के सम्मेलन में भारी हंगामा और पद से छुट्टी
\r\n\r\nमामला यहीं शांत नहीं हुआ। अश्लील मैसेज कांड के करीब एक महीने बाद, जब एक स्थानीय भाजपा विधायक द्वारा कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया था, तब यह विवाद फिर से उभर कर सामने आ गया। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष भी बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। उनकी मौजूदगी में ही पार्टी के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं ने नितिन मित्तल के खिलाफ जमकर नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया।
\r\n\r\n\r\n\r\nकार्यकर्ताओं की ओर से मंच के सामने नितिन मित्तल को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित करने की जोरदार मांग उठाई गई। इस भारी दबाव और मामले में दर्ज हुई एफआईआर (FIR) के बाद संगठन को कड़ा कदम उठाना पड़ा। पार्टी की छवि धूमिल होने के डर से और विवाद को लगातार बढ़ता देख, भाजपा के तत्कालीन जिला अध्यक्ष चेनपाल सिंह ने कड़ा फैसला लेते हुए नितिन मित्तल को जिला उपाध्यक्ष के पद से तुरंत हटा दिया। नितिन के पद से हटते ही स्थानीय भाजपा स्पष्ट रूप से दो विरोधी गुटों में बंट गई और दोनों खेमों के बीच की राजनीतिक और व्यक्तिगत रंजिश लगातार गहरी होती चली गई।
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रविवार की रात: होटल में आमना-सामना और फिर सड़क पर तांडव
\r\n\r\nअंदरखाने चल रही यही रंजिश रविवार रात करीब 11 बजे उस वक्त सड़क पर आ गई, जब दोनों गुटों का आमना-सामना हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोदीनगर के एक स्थानीय होटल में पूर्व जिला उपाध्यक्ष नितिन मित्तल और भाजयुमो से जुड़े कार्यकर्ता रोहित सक्सेना का अचानक आमना-सामना हो गया।
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चश्मदीदों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच पुरानी बातों और मुकदमों को लेकर पहले तीखी नोकझोंक और कहासुनी हुई। कुछ ही देर में यह बहस इतनी उग्र हो गई कि दोनों तरफ से गालियां और फिर लात-घूंसे चलने लगे। देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और रोहित सक्सेना व उनके समर्थकों ने नितिन मित्तल पर धावा बोल दिया। नितिन मित्तल को जान बचाने के लिए भागना पड़ा, लेकिन हमलावरों ने उन्हें बीच सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इस हिंसक झड़प में बीच-बचाव करने के लिए आगे आए कई अन्य लोग भी घायल हो गए। सड़क पर मची इस अफरातफरी से राहगीर भी सहम गए।
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आरोप-प्रत्यारोप: दोनों पक्षों ने गढ़ी अलग-अलग कहानी
\r\n\r\nइस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद दोनों पक्षों की ओर से पुलिस के सामने अलग-अलग दावे पेश किए गए हैं, जो मामले को और भी उलझा रहे हैं:
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- \r\n नितिन मित्तल का दावा: पूर्व जिला उपाध्यक्ष नितिन मित्तल ने अपने ऊपर हुए इस हमले को एक 'सुनियोजित साजिश' करार दिया है। उनका कहना है कि विरोधियों ने उन्हें जान से मारने की नीयत से यह जानलेवा हमला किया है। उन्होंने खुलेआम कुछ लोगों से अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस से सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है।\r\n \r\n
- \r\n रोहित सक्सेना का काउंटर आरोप: वहीं दूसरी तरफ, भाजयुमो कार्यकर्ता रोहित सक्सेना ने पुलिस को बिल्कुल अलग ही कहानी बताई है। रोहित का आरोप है कि घटना की शुरुआत नितिन मित्तल की तरफ से हुई थी। रोहित के मुताबिक, नितिन मित्तल अपने कई गुंडों और साथियों के साथ उनके मामा की चाऊमीन की ठेली पर पहुंचे थे। वहां उन्होंने गुंडागर्दी दिखाते हुए रोहित को जबरन अपनी गाड़ी में बैठाकर अपहरण करने की कोशिश की। जब रोहित और उनके परिजनों ने इस अपहरण का विरोध किया, तो नितिन के साथियों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। रोहित का दावा है कि इस बचाव और हाथापाई के दौरान उनके भाई के हाथ की हड्डी टूट गई है।\r\n \r\n
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आधी रात को थाने में बवाल, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
\r\n\r\nसड़क पर चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद दोनों गुटों के समर्थक भारी संख्या में मोदीनगर थाने पहुंच गए। थाने के घेराव और एक-दूसरे के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर देर रात तक पुलिस स्टेशन परिसर में भारी हंगामा चलता रहा। इसी बीच, सड़क पर हुई इस पूरी मारपीट का किसी ने वीडियो बना लिया, जो सोमवार सुबह तक सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो गया। वायरल वीडियो ने पुलिस-प्रशासन और सत्ताधारी पार्टी, दोनों पर भारी दबाव बना दिया है।
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मोदीनगर के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) भास्कर वर्मा ने इस पूरी घटना पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया है कि पुलिस ने मामले का संज्ञान ले लिया है। एसीपी ने स्पष्ट किया कि प्राप्त तहरीर के आधार पर फिलहाल रोहित सक्सेना के खिलाफ सुसंगत धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो फुटेज का बारीकी से विश्लेषण कर रही है। दोनों पक्षों की मेडिकल रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए अन्य अहम साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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इस घटना ने एक बार फिर से राजनीतिक दलों के भीतर चल रही अनुशासनहीनता और गुटबाजी को सार्वजनिक कर दिया है, जिससे पार्टी आलाकमान की भी किरकिरी हो रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस जांच के बाद इस मामले में क्या नई परतें खुलती हैं और पार्टी संगठन इस सड़क छाप गुंडागर्दी पर अपने नेताओं के खिलाफ क्या कड़ा एक्शन लेता है।


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