उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। उमस भरी गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन अब यह राहत एक बड़ी आफत में तब्दील होती नजर आ रही है। प्रदेश भर में मानसूनी बादल जमकर बरस रहे हैं, जिससे कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। नदियां उफान पर हैं, सड़कें तालाब बन चुकी हैं और गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से त्राहिमाम मचा हुआ है।
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उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से मानसूनी सिस्टम पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। सोमवार तड़के से ही राजधानी लखनऊ, औद्योगिक नगरी कानपुर, और धर्म नगरी वाराणसी-मिर्जापुर समेत प्रदेश के 10 प्रमुख शहरों में झमाझम बारिश का दौर जारी है। बारिश का यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है, जिसके चलते शहरी इलाकों में भयंकर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आज प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश ने मैदानी इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गंगा, घाघरा और शारदा समेत 10 प्रमुख नदियां खतरे के निशान के करीब या उससे ऊपर बह रही हैं।Read also:-गाजियाबाद की दर्दनाक घटना: दूसरों का डिप्रेशन दूर करने वाली महिला मनोचिकित्सक ने 5वीं मंजिल से कूदकर दी जान!
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बिजनौर और पश्चिमी यूपी में मंडराया बाढ़ का खतरा: टापू बने गांव

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला बिजनौर इस वक्त कुदरत के सीधे प्रहार का सामना कर रहा है। पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश के कारण गंगा नदी विकराल रूप धारण कर चुकी है। बिजनौर के चांदपुर क्षेत्र के खादर इलाके में गंगा नदी के भारी उफान के चलते बिल्कुल बाढ़ जैसे खौफनाक हालात बन गए हैं।
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नदी का पानी तटबंधों को पार करते हुए खादर इलाके के 6 गांवों में पूरी तरह से घुस गया है। आलम यह है कि इन गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कटने लगा है और ये गांव किसी टापू की तरह नजर आ रहे हैं। सड़कों पर 3 से 4 फीट तक गहरा पानी भर चुका है, जिसके कारण दुपहिया और चौपहिया वाहनों का निकलना असंभव हो गया है। ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकलने और रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए अब पूरी तरह से नाव, बैलगाड़ी और ट्रैक्टर-ट्रॉली पर निर्भर हो गए हैं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है, लेकिन पानी का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
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हाईवे पर बह रहा गंगा का पानी, सांसत में फंसी एंबुलेंस की जान

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गंगा नदी के रौद्र रूप का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 5 दिनों से गंगा नदी का पानी बहसूमा-ठाकुरद्वारा स्टेट हाईवे के ऊपर से तेज बहाव के साथ बह रहा है। यातायात को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने नारनौर गांव के पास बैरिकेडिंग लगाकर इस हाईवे के कुछ हिस्सों को पूरी तरह से बंद कर दिया है।
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इसी हाईवे पर रविवार दोपहर एक दिल दहला देने वाला वाकया सामने आया। बाढ़ के तेज पानी में पांडवनगर चौकी के पास एक एंबुलेंस अचानक फंस गई। यह एंबुलेंस मेरठ के एक अस्पताल में मरीज को भर्ती कराकर वापस लौट रही थी। पानी का बहाव इतना तेज था कि एंबुलेंस का इंजन बंद हो गया और वह बीच सड़क पर ही डूबने लगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय ग्रामीण तुरंत मदद के लिए दौड़े और कड़ी मशक्कत के बाद एक भारी ट्रैक्टर-ट्रॉली की मदद से एंबुलेंस को सुरक्षित बाहर निकाला गया। गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई।
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वाराणसी में आस्था पर भारी पड़ा सैलाब, कानपुर-लखनऊ भी बेहाल

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पूर्वांचल की बात करें तो वहां भी हालात कुछ अच्छे नहीं हैं। फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ का पानी 3-4 गांवों में प्रवेश कर गया है। वहीं, धार्मिक नगरी वाराणसी में भी भारी बारिश और गंगा के बढ़े हुए जलस्तर ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों की सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। घाट किनारे बने 50-60 छोटे-बड़े मंदिरों के गर्भ गृह तक में पानी भर गया है।
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हालांकि, इस कुदरती आफत के बीच भी शिवभक्तों की आस्था अडिग नजर आई। भारी बारिश और जलभराव के बीच काशी विश्वनाथ मंदिर के बाहर भीगते हुए भी भक्तों की लंबी-लंबी कतारें दिखाई दीं। दूसरी तरफ, राजधानी लखनऊ में सोमवार तड़के 3 बजे से ही रुक-रुक कर फुहारें पड़ रही हैं, जिससे मौसम सुहावना तो हुआ है, लेकिन यातायात धीमा पड़ गया है। कानपुर में भारी बारिश ने नगर निगम की पोल खोल दी है, जहां मुख्य सड़कों पर भारी जलभराव से लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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आखिर क्यों मेहरबान हुआ मानसून? मौसम वैज्ञानिक ने बताई वजह

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लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने इस अचानक हुए मौसम परिवर्तन के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के ऊपर एक बहुत ही मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय था। अब यह वेदर सिस्टम खिसक कर उत्तर प्रदेश की ओर आ गया है।
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इसके साथ ही, बंगाल की खाड़ी से लगातार आ रही नमी भरी मानसूनी हवाओं (Moisture-laden winds) ने प्रदेश के वायुमंडल में बारिश की गतिविधियों को अचानक बहुत तेज कर दिया है। इसी 'डबल इफेक्ट' के कारण अगले 4 से 5 दिनों तक पूरे उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ अच्छी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
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IMD का अलर्ट: जानिए आपके जिले में कितनी होगी बारिश?

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मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा सैटेलाइट और रडार डेटा के आधार पर प्रदेश को बारिश की तीव्रता के आधार पर तीन अलग-अलग जोन में बांटा गया है। गोरखपुर-सीतापुर समेत कई जिलों में भारी तबाही की आशंका जताई गई है:
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बहुत भारी बारिश का अलर्ट (18 जिले): आपदा प्रबंधन विभाग ने इन जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, बाराबंकी, गोंडा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, महाराजगंज, कुशीनगर, गोरखपुर और देवरिया में बहुत भारी बारिश की संभावना है।
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भारी बारिश की चेतावनी (33 जिले): सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, हापुड़, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, गाजियाबाद, अलीगढ़, बदायूं, कासगंज, फर्रुखाबाद, हरदोई, कन्नौज, उन्नाव, लखनऊ, कानपुर नगर, रायबरेली, अमेठी, अयोध्या, अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, और बलिया। इन क्षेत्रों में प्रशासन को जलभराव और ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
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हल्की से मध्यम बारिश (24 जिले): मथुरा, आगरा, मैनपुरी, हाथरस, एटा, फिरोजाबाद, इटावा, औरैया, कानपुर देहात, फतेहपुर, कौशांबी, प्रयागराज, भदोही, वाराणसी, मिर्जापुर, चंदौली, सोनभद्र, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, महोबा, जालौन, झांसी, और ललितपुर।
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लंबी अवधि का पूर्वानुमान: क्या आगे कम होगी बारिश?

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वर्तमान में भले ही नदियां उफान पर हैं और प्रदेश पानी-पानी हो रहा है, लेकिन भविष्य का पूर्वानुमान कुछ और ही इशारा कर रहा है। मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने एक चिंताजनक जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि इस साल प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में ला नीना (La Nina) जैसी स्थितियां अब खत्म हो रही हैं और यह पैटर्न अल नीनो (El Nino) की ओर बढ़ने के स्पष्ट संकेत दे रहा है।
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अल नीनो की स्थिति अक्सर भारतीय उपमहाद्वीप में कम वर्षा का कारण बनती है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के अपने सामान्य स्तर से कमजोर रहने के संकेत हैं। इसके अतिरिक्त, एक और बड़ा कारण यह है कि इस साल जनवरी से मार्च के महीनों में उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में बर्फबारी भी काफी कम हुई है। यह कम बर्फबारी भी मानसूनी हवाओं के चक्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है, जिससे आने वाले महीनों (अगस्त के अंत और सितंबर) में बारिश का ग्राफ नीचे गिर सकता है। किसानों को इस संभावित सूखे जैसी स्थिति के लिए कृषि विभाग की सलाह के अनुसार अपनी फसलों की योजना बनानी चाहिए।
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