नई दिल्ली/गाजियाबाद (क्राइम डेस्क): अपराध की दुनिया में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो बॉलीवुड की किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की पटकथा को भी मात दे देती हैं। एक ऐसा ही खौफनाक और शातिर अपराधी, जो पिछले 26 सालों से पुलिस और कानून के साथ लुका-छिपी का खेल खेल रहा था, आखिरकार दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। अपहरण और हत्या के सनसनीखेज मामले में फरार चल रहा कुख्यात अपराधी सलीम वास्तिक उर्फ सलीम खान अब तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे है।READ ALSO:-बिजनौर में प्रशासन का चला हंटर: तालिब के बाद अब समधी मो. गाजी पर भी कसा शिकंजा, 13 के खिलाफ धोखाधड़ी की महा-FIR!
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अपनी पहचान छिपाने के लिए इस अपराधी ने हर हथकंडा अपनाया। पुलिस से बचने के लिए उसने न केवल अपने रहने के ठिकाने बदले, बल्कि अपनी धार्मिक और सामाजिक पहचान को भी एक 'एक्स-मुस्लिम' यूट्यूबर के रूप में पूरी तरह से बदल लिया था। लेकिन कहते हैं न कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, एक दिन वो अपने ही बुने जाल में फंस जाता है।
\r\n\r\n

 ये संदीप बंसल की तस्वीर है। 1995 में संदीप की हत्या कर दी गई थी। इस केस में कोर्ट ने सलीम वास्तिक को सजा सुनाई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

1995 का वो काला दिन और एक मां का 31 साल का दर्द

\r\n\r\n
इस पूरी कहानी की शुरुआत होती है आज से करीब 31 साल पहले, 20 जनवरी 1995 को। दिल्ली के एक जाने-माने सीमेंट कारोबारी सीताराम बंसल का 13 साल का बेटा संदीप रोज की तरह स्कूल गया था। लेकिन उस दिन वह लौटकर घर नहीं आया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सलीम की गिरफ्तारी (25 अप्रैल, 2026) के ठीक एक दिन बाद, 26 अप्रैल 2026 को संदीप की मां रेनू बंसल का एक बेहद भावुक और रुला देने वाला वीडियो सामने आया। इस वीडियो में एक मां का वो दर्द छलक रहा था, जिसे उसने 31 सालों तक अपने सीने में दबाए रखा था।
\r\n\r\n

 सलीम वास्तिक की यह तस्वीर गिरफ्तारी के दौरान की है। दिल्ली पुलिस ने गाजियाबाद के लोनी से 25 अप्रैल की सुबह उसे अरेस्ट किया था।

\r\n\r\n
रोते हुए रेनू बंसल बताती हैं, "मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती कि ये 31 साल हमारे परिवार पर कैसे गुजरे हैं। ऐसा कोई दिन नहीं बीता, जब हमें हमारे बेटे की याद न आई हो। 20 जनवरी की सुबह मैंने उसे खुद स्कूल भेजा था, मुझे क्या पता था कि मेरा बच्चा अब कभी लौटकर नहीं आएगा।" जब संदीप शाम तक घर नहीं पहुंचा, तो परिवार में हड़कंप मच गया। तलाश शुरू हुई, लेकिन मासूम का कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन 21 जनवरी की दोपहर संदीप के पिता सीताराम के पास एक खौफनाक कॉल आई। फोन करने वाले ने धमकी भरे लहजे में कहा कि उनका बेटा उनके कब्जे में है। सीताराम ने समझदारी दिखाते हुए तुरंत पुलिस को सूचना दी। शाम को परिवार को झूठी तसल्ली दी गई कि बच्चा मिल गया है और उसे लाया जा रहा है। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। रात के अंधेरे में जब संदीप की लाश घर की दहलीज पर पहुंची, तो पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रेनू बंसल कहती हैं, "जब मेरे बेटे की लाश आई, तो मैं बेसुध हो गई। मुझे मेरे बेटे की हत्या का बदला चाहिए। इस दरिंदे सलीम को फांसी की सजा ही होनी चाहिए, तभी मेरी आत्मा को शांति मिलेगी।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कानून से आंख-मिचौली: कैसे 26 साल तक बचता रहा सलीम?

\r\n\r\n
संदीप बंसल हत्याकांड ने उस दौर में दिल्ली को दहला कर रख दिया था। करीब 2 साल चली अदालती कार्रवाई के बाद, 1997 में दिल्ली की एक अदालत ने सलीम को इस जघन्य अपराध के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई। लेकिन यह शातिर अपराधी हार मानने वाला नहीं था। साल 2000 में किसी तरह वह अग्रिम जमानत पर बाहर आया और उसके बाद ऐसा गायब हुआ कि दिल्ली पुलिस 26 सालों तक उसकी परछाईं तक नहीं ढूंढ पाई।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
दिल्ली पुलिस की पूछताछ में सलीम ने जो खुलासे किए हैं, वो हैरान करने वाले हैं। फरार होने के बाद वह सबसे पहले मुजफ्फरनगर के खालापार इलाके में पहुंचा और पुलिस से छिपने के लिए एक मस्जिद में पनाह ली। जब वहां खतरा महसूस हुआ, तो वह एक रिश्तेदार की मदद से मेरठ के लिसाड़ीगेट इलाके में जा छिपा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उत्तर प्रदेश में पुलिस की सख्ती देखकर 2001 में वह भागकर हरियाणा चला गया। वहां उसने अंबाला और करनाल जैसी जगहों पर अपनी पहचान छिपाकर एक कारपेंटर (बढ़ई) के रूप में काम किया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
8 साल तक नहीं छुआ मोबाइल फोन: सलीम यह भली-भांति जानता था कि पुलिस उसे इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए ट्रैक कर सकती है। इसलिए इस खूंखार अपराधी ने 2015 तक, यानी करीब 8 सालों तक किसी भी मोबाइल फोन का इस्तेमाल ही नहीं किया। अगर उसे किसी रिश्तेदार से बात करनी भी होती थी, तो वह सिर्फ अपनी पत्नी या साले के फोन का ही इस्तेमाल करता था। साल 2010 में वह हरियाणा से गाजियाबाद के लोनी इलाके में आकर बस गया और यहीं से उसने अपनी एक नई दुनिया बसानी शुरू की।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

'एक्स-मुस्लिम' का चोला और यूट्यूब का विवादित सफर

\r\n\r\n
मूल रूप से शामली जिले का रहने वाला सलीम जब लोनी की अशोक विहार कॉलोनी में बसा, तो उसने अपना रंग रूप पूरी तरह बदल लिया। उसने खुद को एक 'एक्स-मुस्लिम' (धर्म छोड़ चुका व्यक्ति) के तौर पर स्थापित किया और डिबेट्स में हिस्सा लेने लगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उसने यूट्यूब पर ‘सलीम वास्तिक 0007’ नाम से अपना एक चैनल बनाया और इस्लाम व मदरसों की शिक्षा पर खुलकर सवाल उठाने लगा। वह हलाला, हदीस और तीन तलाक जैसे संवेदनशील विषयों पर वीडियो बनाता था। अपने तर्कों को सही साबित करने के लिए वह अक्सर कुरान की आयतों को भी कोट (Quote) करता था। उसके इस विवादित रूप ने उसे सोशल मीडिया पर रातों-रात सुर्खियों में ला दिया, लेकिन यही शोहरत उसकी बर्बादी का सबसे बड़ा कारण भी बनी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

फरवरी 2026 का वो जानलेवा हमला, जिसने खोल दिया राज

\r\n\r\n
यूट्यूब पर इस्लाम के खिलाफ बोलने के कारण सलीम कई कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गया था। 27 फरवरी, 2026 को दिनदहाड़े उसके लोनी स्थित ऑफिस में एक खौफनाक वारदात हुई। बिना नंबर प्लेट की बाइक पर आए नकाबपोश हमलावरों ने सलीम पर चाकू से ताबड़तोड़ 14 वार किए और उसका गला रेतने की कोशिश की। चीख-पुकार सुनकर जब तक पड़ोसी आते, हमलावर उसे अधमरा छोड़कर फरार हो गए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सलीम को गंभीर हालत में दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल रेफर किया गया, जहां से बाद में उसे मैक्स अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। वह करीब एक महीने तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा और उसके दो बड़े ऑपरेशन हुए। (बाद में पुलिस ने उस पर हमला करने वाले दोनों सगे भाइयों—गुलफाम और जीशान को एक एनकाउंटर में ढेर कर दिया था)।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

फिंगरप्रिंट, पुलिस का शक और वो आखिरी मास्टरस्ट्रोक

\r\n\r\n
यही वो मोड़ था जहां 26 साल पुराने एक राज से पर्दा उठा। अस्पताल में इलाज के दौरान रूटीन प्रक्रिया के तहत सलीम के फिंगरप्रिंट लिए गए। जब दिल्ली पुलिस के डेटाबेस में इन फिंगरप्रिंट्स का मिलान किया गया, तो सिस्टम में रेड अलर्ट बज उठा। पुलिस के होश उड़ गए जब उन्हें पता चला कि अस्पताल के बिस्तर पर पड़ा यह मशहूर यूट्यूबर कोई और नहीं, बल्कि 1995 के अपहरण और हत्या मामले का वांटेड अपराधी सलीम खान है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इसके बाद दिल्ली पुलिस ने बेहद गोपनीय ढंग से जाल बिछाया। पुलिस ने लोनी स्थित उसके घर और ऑफिस की रेकी शुरू कर दी। जांच के दौरान पुलिस को सलीम के घमंड का भी पता चला। एक पुरानी पिटाई में सलीम का पैर टूट गया था, जिस पर वह अक्सर अकड़ में कहता था, "मैंने बहुत बदमाश देखे हैं।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एक और बात जिसने पुलिस का शक पुख्ता किया, वह थी उसकी पत्नी की गैरमौजूदगी। एक महीने अस्पताल में रहने के बावजूद उसकी पत्नी अफसाना या बेटा उसे देखने नहीं आए। पुलिस के पूछने पर वह झूठ बोलता रहा कि पत्नी की तबीयत खराब है। जब पुलिस ने गुपचुप तरीके से लोनी में जांच की, तो पता चला कि वह वहां बिल्कुल अकेला रहता है और उसका परिवार उसके साथ नहीं रहता।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जैसे ही सलीम अस्पताल से डिस्चार्ज होकर अपने लोनी स्थित घर पहुंचा, दिल्ली पुलिस ने पूरी तरह से उसकी घेराबंदी कर ली। आखिरकार 25 अप्रैल, 2026 को पुलिस ने एक सटीक ऑपरेशन के तहत इस 26 साल से फरार मोस्ट वांटेड अपराधी को गिरफ्तार कर लिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अब सलीम वास्तिक उर्फ सलीम खान तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे अपने गुनाहों की सजा भुगतने का इंतजार कर रहा है, और संदीप की मां रेनू बंसल को 31 साल बाद इंसाफ की एक किरण नजर आई है।
विज्ञापन
विज्ञापन