बिजनौर (क्राइम डेस्क): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से इस वक्त एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। जिले में अपराध और जालसाजी पर लगाम कसने के लिए प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। बिजनौर पुलिस और प्रशासनिक अमले ने एक बड़े धोखाधड़ी के नेक्सस (Nexus) का पर्दाफाश करते हुए एक ऐसा प्रहार किया है, जिसकी गूंज पूरे जिले में सुनाई दे रही है। मौहल्ला चाहशीरी के रहने वाले मौ. तालिब पर शिकंजा कसने के बाद अब प्रशासन का हंटर उनके करीबियों और रिश्तेदारों पर भी चल गया है। ताजा अपडेट के अनुसार, तालिब के समधी मो. गाजी समेत कुल 13 लोगों के खिलाफ शेरकोट थाने में धोखाधड़ी (420 IPC) और जालसाजी की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।READ ALSO:-बिजनौर में तेज रफ्तार का खौफनाक कहर: डंपर की टक्कर से धड़ से अलग हुआ युवक का सिर और पैर; जिस घर में बजनी थी शहनाई, वहां उठी अर्थी
\r\n\r\n\r\n\r\n
क्या है पूरा मामला और कैसे चला प्रशासन का चाबुक?
\r\n\r\nबिजनौर के शेरकोट इलाके में लंबे समय से कुछ संदिग्ध गतिविधियों और धोखाधड़ी की शिकायतें प्रशासन को मिल रही थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत जब बिजनौर प्रशासन ने इन शिकायतों की फाइल खोली, तो कई चौंकाने वाले नाम सामने आए। शुरुआती जांच में मुख्य रूप से मौ. तालिब (निवासी कोतवाली शहर, बिजनौर) का नाम रडार पर आया। लेकिन जैसे-जैसे पुलिस और जांच एजेंसियों ने इस मामले की परतों को उधेड़ना शुरू किया, तो पता चला कि यह कोई अकेला व्यक्ति नहीं, बल्कि एक पूरा गिरोह है जो एक सुनियोजित साजिश के तहत काम कर रहा था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि इस फर्जीवाड़े की जड़ें काफी गहरी हैं और इसमें रिश्तेदारियां भी खूब निभाई गई हैं। तालिब की जांच की आंच जल्द ही उनके समधी, मो. गाजी (निवासी कोहिनूर कालोनी, शेरकोट) तक पहुँच गई। मो. गाजी पर भी गंभीर आरोप लगे हैं और पुलिस ने सबूतों के आधार पर उन्हें भी इस महा-मुकदमे में नामजद किया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
शेरकोट सहकारी आवास समिति का कनेक्शन
\r\n\r\nइस एफआईआर (FIR) में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम 'वसीम' का है। वसीम कोई आम व्यक्ति नहीं, बल्कि 'शेरकोट सहकारी आवास समिति लिमिटेड' (Sherkot Sahkari Awas Samiti Ltd.) का अध्यक्ष है। आवास समितियों का मुख्य काम लोगों को सही और उचित दामों पर प्लॉट या घर मुहैया कराना होता है। लेकिन जब किसी समिति का अध्यक्ष ही धोखाधड़ी के मामले में नामजद हो जाए, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि यह मामला जमीन, प्लॉटिंग, कागजातों की हेराफेरी या आम लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पने से जुड़ा हुआ एक बड़ा स्कैम हो सकता है।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
आवास समिति के अध्यक्ष वसीम (निवासी नौधना, शेरकोट) के साथ-साथ उनके परिवार और करीबियों (शमीम, नसीम, मुनीर) का भी नाम इस लिस्ट में शामिल है। यह दर्शाता है कि कैसे पदों का दुरुपयोग करके एक पारिवारिक और संस्थागत स्तर पर फर्जीवाड़े का जाल बुना गया था।
\r\n\r\n
आरोपियों की पूरी कुंडली: कौन-कौन हैं एफआईआर में नामजद?
\r\n\r\nप्रशासन ने इस मामले में किसी को भी नहीं बख्शा है। शेरकोट थाने में दर्ज एफआईआर में एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने इन सभी के पते और नाम सार्वजनिक कर दिए हैं, जो इस प्रकार हैं:
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
- \r\n
- \r\n मौ. तालिब (पिता: मौहम्मद ताहिर) - पता: मौहल्ला चाहशीरी, कोतवाली शहर, बिजनौर। (मुख्य आरोपियों में से एक, जिसके खिलाफ सबसे पहले सुगबुगाहट शुरू हुई।)\r\n \r\n
- \r\n सलीम अहमद (पिता: इशितियाक अहमद) - पता: मौहल्ला मनिहारान, शेरकोट, बिजनौर।\r\n \r\n
- \r\n श्री फय्याज अहमद (पिता: मौ0 याकूब) - पता: मौहल्ला मनिहारान, शेरकोट, बिजनौर।\r\n \r\n
- \r\n वसीम (अध्यक्ष, शेरकोट सहकारी आवास समिति लिमिटेड) (पिता: मौ अली) - पता: मौहल्ला नौधना कस्बा व थाना शेरकोट, बिजनौर। (इस केस का एक बड़ा मास्टरमाइंड माना जा रहा है।)\r\n \r\n
- \r\n शमीम (पिता: मौ अली) - पता: मौहल्ला नौधना, शेरकोट।\r\n \r\n
- \r\n नसीम (पिता: मौ अली) - पता: मौहल्ला नौधना, शेरकोट।\r\n \r\n
- \r\n मुनीर (पिता: मौ अली) - पता: मौहल्ला नौधना, शेरकोट।\r\n \r\n
- \r\n शौकत अली (पिता: हशमतुल्ला) - पता: मौहल्ला नौधना, शेरकोट।\r\n \r\n
- \r\n नसीमा खातून (पति: शौकत अली) - पता: मौहल्ला नौधना, शेरकोट। (इस गिरोह में महिलाओं की संलिप्तता भी सामने आई है, जो फर्जीवाड़े को अंजाम देने में मददगार रही होंगी।)\r\n \r\n
- \r\n मौ0 गाजी (पिता: मौ खुर्शीद) - पता: मौहल्ला कोहिनूर कालोनी, शेरकोट। (तालिब के समधी, जिन पर प्रशासन ने अब कड़ा एक्शन लिया है।)\r\n \r\n
- \r\n मौ कमाल (पिता: मौ0 खुर्शीद) - पता: मौहल्ला कोहिनूर कालोनी, शेरकोट।\r\n \r\n
- \r\n मौ0 मुजाहिद (पिता: मौ0 खुर्शीद) - पता: मौहल्ला कोहिनूर कालोनी, शेरकोट।\r\n \r\n
- \r\n मौ दानिश (पिता: मौ0 खुर्शीद) - पता: मौहल्ला कोहिनूर कालोनी, शेरकोट।\r\n \r\n
\r\n\r\n
कानूनी शिकंजा: आगे क्या होगा एक्शन?
\r\n\r\nशेरकोट थाने में इन 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने इन सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर दी हैं। जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है, वे गैर-जमानती प्रकृति की हो सकती हैं, जिससे आरोपियों का बच पाना बेहद मुश्किल है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n दबिश और छापेमारी: पुलिस अब आरोपियों के ठिकानों—विशेषकर मौहल्ला नौधना, कोहिनूर कालोनी और चाहशीरी में दबिश दे रही है।\r\n \r\n
- \r\n संपत्तियों की जांच: प्रशासन केवल गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। इन आरोपियों द्वारा धोखाधड़ी से अर्जित की गई बेनामी संपत्तियों, बैंक खातों और जमीनों का ब्योरा भी खंगाला जा रहा है। भविष्य में इन पर बुलडोजर एक्शन या संपत्ति कुर्क (Attachment of Property) करने की कार्रवाई भी देखने को मिल सकती है।\r\n \r\n
- \r\n आवास समिति के रिकॉर्ड की जब्ती: शेरकोट सहकारी आवास समिति के अध्यक्ष वसीम के नामजद होने के बाद, प्रशासन जल्द ही इस समिति के सभी पुराने कागजातों, रजिस्ट्रियों और वित्तीय लेन-देन (Financial Transactions) को सील कर सकता है। जिन आम लोगों ने इस समिति के जरिए पैसा लगाया था, उनकी भी पूछताछ की जा सकती है ताकि पीड़ितों की सही संख्या का पता लगाया जा सके।\r\n \r\n
\r\n\r\n
आम जनता में चर्चा का विषय
\r\n\r\nइस एफआईआर के दर्ज होते ही बिजनौर और खासकर शेरकोट इलाके में यह खबर आग की तरह फैल गई है। चौराहों से लेकर चाय की दुकानों तक, हर जगह तालिब, उनके समधी गाजी और आवास समिति के अध्यक्ष वसीम के कारनामों की चर्चा हो रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे रसूखदार लोगों पर हाथ डालने से प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। जो लोग आम जनता की गाढ़ी कमाई के साथ धोखाधड़ी करते हैं, उन्हें सलाखों के पीछे जाना ही होगा।
\r\n\r\nन्याय की उम्मीद
\r\n\r\n\r\n\r\n
बिजनौर पुलिस की यह कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है। धोखाधड़ी के मामलों में अक्सर रसूखदार लोग कानून की कमियों का फायदा उठाकर बच निकलते हैं, लेकिन एक साथ 13 लोगों (जिसमें पूरा परिवार और रिश्तेदार शामिल हैं) पर मुकदमा दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि पुलिस के पास इनके खिलाफ पुख्ता सबूत मौजूद हैं। अब देखना यह होगा कि इस मामले में पहली गिरफ्तारी किसकी होती है और जांच के दौरान और कितने सफेदपोश चेहरों से नकाब उतरता है। बिजनौर की जनता की निगाहें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
\r\n\r\n
Sabse pehle comment karne wale banein.