देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर जोरदार धमाकों से दहल उठी है। यह घटना सोमवार (10 नवंबर 2025) को लाल किले के पास मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास हुई है। यहां खड़ी एक कार में अचानक जोरदार धमाका हुआ, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। इस घटना ने 20 साल पहले भी दहली थी दिल्ली के उस भयावह दिल्ली सीरियल ब्लास्ट के दर्द को एक बार फिर ताजा कर दिया, जब 29 अक्टूबर 2005 को एक के बाद एक तीन धमाकों ने राजधानी को खून और चीखों से भर दिया था।READ ALSO:-दिल्ली धमाके के बाद UP में High Alert! CM योगी ने दिए सख्त निर्देश
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लाल किले के पास धमाका और नुकसान
\r\n\r\nसोमवार को लाल किले के पास हुए इस धमाके से दहशत फैल गई।
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- \r\n धमाके का केंद्र: लाल किले के पास मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास खड़ी एक कार।\r\n \r\n
- \r\n नुकसान: धमाका होते ही कार में भीषण आग लग गई, जिसने पास खड़ी दो अन्य कारों को भी अपनी चपेट में ले लिया।\r\n \r\n
- \r\n हताहत: इस जोरदार धमाके में अब तक 11 की मौत, 24 घायल होने की जानकारी मिली है। घायलों को एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।\r\n \r\n
- \r\n एक्शन: घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और राष्ट्रीय जांच एजेंसियां (NIA) मौके पर पहुंच गईं और जांच शुरू कर दी गई है।\r\n \r\n

29 अक्टूबर 2005 - खुशियों पर मातम
\r\n\r\nसोमवार की इस घटना ने सीधे 29 अक्टूबर 2005 के उस दिन को याद दिला दिया, जब दीपावली से ठीक पहले, धनतेरस के दिन, लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने दिल्ली को निशाना बनाया था। उस दिन तीन जगहों पर हुए बम धमाकों में 60 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे।
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1. पहला धमाका: पहाड़गंज, नेहरू मार्केट
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- \r\n समय: शाम 5 बजकर 38 मिनट\r\n \r\n
- \r\n घटना: पहाड़गंज की भीड़भाड़ वाली नेहरू मार्केट में हुए पहले विस्फोट ने त्योहार की खुशियों को दहशत में बदल दिया। दुकानों के शीशे टूटे, और सड़कों पर अफरातफरी मच गई।\r\n \r\n
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2. दूसरा धमाका: डीटीसी बस, ओखला
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- \r\n समय: शाम 5 बजकर 52 मिनट\r\n \r\n
- \r\n घटना: पहाड़गंज के धमाके के कुछ मिनट बाद, बाहरी मुद्रिका की एक डीटीसी बस में दूसरा विस्फोट हुआ। बस कंडक्टर द्वारा संदिग्ध बैग को देखकर ड्राइवर कुलदीप सिंह को सावधान किया गया। ड्राइवर कुलदीप सिंह की बहादुरी ने कई लोगों की जान बचाई, हालांकि इस प्रयास में वे गंभीर रूप से झुलस गए और उनकी एक आंख की रोशनी चली गई।\r\n \r\n
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3. तीसरा और विनाशकारी धमाका: सरोजिनी नगर
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- \r\n समय: शाम 5 बजकर 56 मिनट\r\n \r\n
- \r\n घटना: सबसे विनाशकारी धमाका सरोजिनी नगर के सबसे भीड़भाड़ वाले बाजार में हुआ। जूस और चाट की दुकानों के पास रखे एक बैग में विस्फोट हुआ। इस विस्फोट के बाद गैस सिलेंडर में आग लगने से आग और फैल गई। अकेले इस बाजार में 37 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।\r\n \r\n
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Trauma of 2005: 60 जानें, अनसुलझा दर्द
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- \r\n पीड़ित: 2005 के इन धमाकों में कुल 60 लोग मारे गए थे और करीब 200 लोग घायल हुए थे।\r\n \r\n
- \r\n दोषी: जांच में सामने आया था कि इन धमाकों को लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने अंजाम दिया था। कई सालों तक मुकदमा चला, लेकिन कुछ दोषियों को सजा नहीं मिल पाई। बहादुर ड्राइवर कुलदीप सिंह ने हमेशा इस बात का अफसोस जताया कि सभी दोषियों को सजा नहीं मिली।\r\n \r\n
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आतंकवाद की काली छाया
\r\n\r\nसोमवार को लाल किले के पास फिर दिखा वही मंजर, जिससे राजधानी में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे आतंकवादी एंगल से भी जोड़कर देखना शुरू कर दिया है। 2005 की घटना के बाद, यह ताजा घटना एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। दिल्लीवासी 20 साल बाद फिर से आतंकवाद की उस काली छाया को महसूस कर रहे हैं, जिसने रोशनी के त्योहार को मातम में बदल दिया था। जांच एजेंसियां अब धमाके के कारणों और इसके पीछे के इरादों का पता लगाने में जुटी हैं।
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