खबरीलाल डेस्क
दुनिया भर में हर दिन करोड़ों लोग अपनी कारों, बाइकों और कमर्शियल वाहनों से सफर करते हैं। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने पिछले 100 सालों में इंजन, सेफ्टी, और डिजाइन में जबरदस्त तरक्की की है। आज हमारे पास ऐसी गाड़ियां हैं जो खुद ड्राइव कर सकती हैं (Autonomous vehicles), जो बिजली से चलती हैं (EVs), और जिनमें फाइव-स्टार सेफ्टी रेटिंग है। लेकिन इन सबके बावजूद, एक ऐसी बुनियादी चीज है जिसने 1888 (जब जॉन बॉयड डनलप ने पहला न्यूमेटिक टायर बनाया था) से लेकर आज तक हर ड्राइवर को परेशान किया है— और वह है टायर का पंचर होनाREAD ALSO:-टोल प्लाजा के नियमों में बड़ा बदलाव: अब जेब पर नहीं पड़ेगा भारी बोझ! सिर्फ 340 रुपये में बनवाएं महीने भर का अनलिमिटेड पास
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चाहे आप किसी जरूरी मीटिंग के लिए जा रहे हों, या परिवार के साथ किसी सुहावने सफर पर हों, एक छोटा सा कील या कांच का टुकड़ा आपकी गाड़ी के पहिए की हवा निकाल सकता है। ऐसे में बीच सड़क पर चिलचिलाती धूप या अंधेरी रात में टायर बदलना, या किसी मैकेनिक को ढूंढना एक भयानक सपने जैसा होता है।
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लेकिन, क्या हो अगर हम आपसे कहें कि भविष्य में आपको अपनी गाड़ी के टायरों में कभी हवा चेक ही नहीं करनी पड़ेगी? क्या हो अगर टायर पंचर होने का शब्द ही डिक्शनरी से गायब हो जाए?
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जापान की मशहूर टायर निर्माता कंपनी Bridgestone (ब्रिजस्टोन) ने इस सपने को हकीकत में बदल दिया है। कंपनी ने हाल ही में अपने क्रांतिकारी 'AirFree Tyre' (एयरफ्री टायर) तकनीक के थर्ड-जेनरेशन (तीसरी पीढ़ी) मॉडल का अनावरण किया है। यह टायर पूरी तरह से बिना हवा के चलता है और अब यह केवल एक 'ऑटो शो कॉन्सेप्ट' (Auto show concept) नहीं रहा, बल्कि प्रोडक्शन लाइन पर जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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आइए, इस विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट में समझते हैं कि यह 'बिना हवा वाला टायर' आखिर काम कैसे करता है, इसके क्या फायदे हैं, और यह मोबिलिटी (Mobility) के भविष्य को कैसे हमेशा के लिए बदल कर रख देगा।
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क्या है 'AirFree Tyre' टेक्नोलॉजी? (What is Airless Tire Technology?)

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तकनीकी भाषा में बिना हवा वाले टायरों को NPT (Non-Pneumatic Tires) कहा जाता है। पारंपरिक टायरों (Pneumatic tires) में रबर के एक मोटे आवरण के अंदर हवा भरी जाती है। यह संपीड़ित हवा (Compressed air) ही गाड़ी का पूरा वजन उठाती है और सड़क के झटकों को सोखकर एक आरामदायक सफर (Cushioning effect) प्रदान करती है। लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमजोरी यही हवा है; यदि कोई नुकीली चीज रबर को भेद दे, तो हवा बाहर निकल जाती है और टायर फ्लैट (Flat tire) हो जाता है।
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ब्रिजस्टोन का इनोवेटिव डिजाइन: Bridgestone के नए 'AirFree' टायर में हवा का कॉन्सेप्ट ही पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है।
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    हवा की जगह, इस टायर के अंदरुनी हिस्से में एक विशेष प्रकार का वेब-लाइक स्ट्रक्चर (Web-like structure) या जालीदार ढांचा होता है।
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    यह ढांचा अनगिनत मजबूत लेकिन लचीली 'स्पोक्स' (Spokes) से बना होता है।
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    ये स्पोक्स एक पहिए के केंद्र (Hub) से लेकर उसके बाहरी हिस्से (Tread) तक फैले होते हैं।
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    जब गाड़ी सड़क पर चलती है, तो ये स्पोक्स गाड़ी के वजन और सड़क के झटकों को बिल्कुल उसी तरह सहन करते हैं जैसे पारंपरिक टायरों में भरी हुई हवा करती है।
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Bridgestone का थर्ड जेनरेशन (3rd Gen) मॉडल क्यों है इतना खास?

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एयरलेस टायर का विचार कोई रातों-रात नहीं आया है। ऑटोमोबाइल इंजीनियर पिछले एक दशक से इस पर काम कर रहे हैं। ब्रिजस्टोन ने भी अपना पहला 'एयरफ्री कॉन्सेप्ट' कई साल पहले पेश किया था। लेकिन तब वे केवल गोल्फ कार्ट (Golf carts) या छोटी साइकिलों का वजन ही उठा पाते थे।
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हाल ही में पेश किया गया थर्ड जेनरेशन (Third Generation) मॉडल एक बहुत बड़ा मील का पत्थर (Milestone) है।
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    कार और भारी वाहनों के लिए तैयार: नया 3rd Gen मॉडल इतनी मजबूती के साथ डिजाइन किया गया है कि यह अब फुल-साइज पैसेंजर कारों (Passenger Cars) और यहां तक कि भारी इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का वजन और तेज गति (High speed) को आसानी से संभाल सकता है।
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    नई सामग्री (Advanced Materials): इसमें उपयोग की जाने वाली स्पोक्स को एक विशेष प्रकार के थर्मोप्लास्टिक रेजिन (Thermoplastic Resin) और उच्च गुणवत्ता वाले रबर के मिश्रण से बनाया गया है। यह सामग्री अत्यधिक गर्मी और ठंड में भी अपना लचीलापन (Flexibility) नहीं खोती।
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    कॉन्सेप्ट से प्रोडक्शन तक: पहले यह केवल लैब टेस्टिंग और ऑटो एक्सपो तक सीमित था। लेकिन अब कंपनी का स्पष्ट दावा है कि उन्होंने गति, शोर (Road noise), और हैंडलिंग से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों को पार कर लिया है और यह 'प्रोडक्शन रेडी' (Production Ready) स्टेज पर पहुंच चुका है। इसका मतलब है कि इसे अब बड़े पैमाने पर फैक्ट्रियों में बनाया जा सकता है।
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एयरलेस टायर (AirFree Tyres) के 5 सबसे बड़े फायदे (Major Benefits)

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अगर यह तकनीक पूरी तरह से बाजार में आ जाती है, तो यह केवल ड्राइवरों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक 'गेम चेंजर' (Game Changer) साबित होगी। आइए इसके प्रमुख फायदों पर नजर डालते हैं:
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1. पंचर और ब्लोआउट का पूर्ण अंत (No Puncture, No Blowout): इसका सबसे स्पष्ट और सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये टायर कभी पंचर नहीं हो सकते। चाहे आप इसे कीलों से भरी सड़क पर चलाएं, या किसी नुकीले पत्थर के ऊपर से गुजारें, यह टायर कभी 'फ्लैट' नहीं होगा। इसके अलावा, हाईवे पर तेज गति में पारंपरिक टायरों के फटने (Tyre Blowout) से होने वाले भयानक हादसों पर पूरी तरह से लगाम लग जाएगी। यह सड़क सुरक्षा (Road Safety) के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व क्रांति होगी।
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2. जीरो मेंटेनेंस (Zero Maintenance): आज के समय में हर कार मालिक को समय-समय पर अपने टायरों का 'टायर प्रेशर' (Tire Pressure) चेक कराना पड़ता है। मौसम बदलने पर हवा कम या ज्यादा होती है। अगर हवा कम है, तो गाड़ी का माइलेज गिर जाता है; अगर हवा ज्यादा है, तो टायर बीच में से घिसने लगता है। एयरलेस टायरों के साथ, आपको कभी भी एयर-पंप की आवश्यकता नहीं होगी। यह एक 'लगाओ और भूल जाओ' (Fit and Forget) तकनीक है।
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3. पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल (Eco-Friendly & 100% Recyclable): क्या आप जानते हैं कि हर साल दुनिया भर में करोड़ों टायर सिर्फ इसलिए कबाड़ में फेंक दिए जाते हैं क्योंकि वे पंचर हो गए थे, कट गए थे, या गलत हवा के दबाव के कारण असमान रूप से घिस गए थे? यह रबर का कचरा (Rubber Waste) पर्यावरण के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। Bridgestone का एयरफ्री टायर पर्यावरण के अनुकूल है।
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    इसके स्पोक्स बनाने में इस्तेमाल होने वाला थर्मोप्लास्टिक रेजिन 100% रिसाइकल (Recyclable) करने योग्य है।
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    जब टायर का बाहरी हिस्सा (Tread) घिस जाएगा, तो आपको पूरा टायर फेंकने की जरूरत नहीं होगी; इसे दोबारा 'री-ट्रेड' (Retread) किया जा सकेगा।
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4. इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए वरदान: इलेक्ट्रिक वाहन (Electric Vehicles) अपने भारी बैटरी पैक के कारण पेट्रोल/डीजल कारों की तुलना में काफी भारी होते हैं। इस अतिरिक्त वजन के कारण पारंपरिक टायरों पर ज्यादा दबाव पड़ता है और वे जल्दी घिसते हैं। एयरलेस टायरों का जालीदार ढांचा वजन को बहुत समान रूप से (Evenly) वितरित करता है, जिससे यह EVs के लिए एकदम सही विकल्प बन जाता है।
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5. डिक्की में मिलेगी ज्यादा जगह (No Need for a Spare Tire): चूंकि ये टायर पंचर नहीं होते, इसलिए कार निर्माताओं को गाड़ी की डिक्की (Boot space) में 'स्पेयर टायर' (Stepney) देने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे गाड़ी का कुल वजन (Curb weight) कम होगा, जिससे माइलेज (या EV की रेंज) बढ़ेगी, और ग्राहकों को सामान रखने के लिए ज्यादा जगह (Extra Trunk Space) मिलेगी।
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कैसे काम करता है एयरफ्री टायर? इसके पीछे का विज्ञान (The Science Behind NPT)

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एक पारंपरिक टायर हवा के 'प्रेशर' (Air pressure) पर काम करता है, जो गाड़ी के वजन को बाहर की तरफ धकेलता है। लेकिन एयरलेस टायर पूरी तरह से भौतिकी (Physics) और सामग्री विज्ञान (Material Science) के एक अलग सिद्धांत पर काम करता है, जिसे 'टेंशन-बेस्ड स्ट्रक्चर' (Tension-based structure) कहा जाता है।
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जब कार एयरलेस टायर पर खड़ी होती है, तो टायर का वह हिस्सा जो सीधे जमीन के संपर्क में होता है (Contact patch), वह संकुचित (Compress) नहीं होता, बल्कि टायर के ऊपरी हिस्से के स्पोक्स में 'खिंचाव' (Tension) पैदा होता है। यानी, कार हवा के दबाव पर नहीं बैठी है, बल्कि वह टायर के ऊपरी हिस्से से "लटक" (Hanging on the top spokes) रही है।
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यह तकनीक बिलकुल वैसी ही है जैसे एक सस्पेंशन ब्रिज (Suspension Bridge) काम करता है। जब कार सड़क के गड्ढों से गुजरती है, तो ये स्पोक्स एक स्प्रिंग (Spring) की तरह काम करते हैं और झटके को सोखकर वापस अपने मूल आकार में आ जाते हैं। यही कारण है कि थर्मोप्लास्टिक रेजिन (Thermoplastic Resin) का इस्तेमाल किया गया है, क्योंकि यह लाखों बार मुड़ने और सीधे होने के बाद भी टूटता नहीं है।
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चुनौतियां और रुकावटें: यह तकनीक अब तक बाजार में क्यों नहीं आई? (Challenges)

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अगर यह तकनीक इतनी ही अच्छी है, तो यह अब तक हमारी कारों में क्यों नहीं है? कॉन्सेप्ट से प्रोडक्शन तक का सफर इतना लंबा क्यों रहा? इसके पीछे कई गंभीर इंजीनियरिंग चुनौतियां (Engineering Challenges) रही हैं:
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    सड़क का शोर और वाइब्रेशन (NVH Levels): पारंपरिक टायरों में भरी हवा एक बेहतरीन 'साउंड एब्जॉर्बर' (Sound absorber) का काम करती है। शुरुआती एयरलेस टायरों में सबसे बड़ी समस्या यह थी कि जब वे तेज गति (High Speeds) पर चलते थे, तो स्पोक्स के बीच से गुजरने वाली हवा बहुत तेज 'सीटी' जैसी आवाज (Road Noise) करती थी और कार में बहुत ज्यादा कंपन (Vibrations) महसूस होता था। Bridgestone ने अपने थर्ड जेनरेशन मॉडल में स्पोक्स के डिजाइन (Aerodynamics) को बदलकर इस शोर को काफी हद तक कम कर लिया है।
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    गर्मी (Heat Dissipation): जब रबर और प्लास्टिक तेज गति से सड़क पर रगड़ खाते हैं, तो बहुत अधिक गर्मी (Friction heat) पैदा होती है। पारंपरिक टायरों में हवा इस गर्मी को बांट देती है। लेकिन एयरलेस टायरों में प्लास्टिक स्पोक्स के पिघलने या कमजोर होने का डर था। नई हीट-रेजिस्टेंट (Heat-resistant) सामग्रियों ने इस समस्या को भी हल कर दिया है।
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    उत्पादन लागत (High Manufacturing Cost): वर्तमान में, इस तरह के विशेष 3D जालीदार टायरों को बनाने की लागत पारंपरिक न्यूमेटिक टायरों की तुलना में काफी अधिक है। जब तक मास प्रोडक्शन (Mass Production) शुरू नहीं होता, तब तक ये टायर आम आदमी के बजट से थोड़े बाहर रह सकते हैं।
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भारत जैसी सड़कों के लिए एयरलेस टायर की प्रासंगिकता (Relevance for Indian Roads)

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भारत में सड़क परिवहन एक बहुत बड़ी चुनौती है। यहाँ आपको विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे भी मिलेंगे और ऐसे ग्रामीण रास्ते भी, जो पूरी तरह से कच्चे और गड्ढों से भरे हैं। भारत में टायर पंचर होना एक रोजमर्रा की समस्या है।
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    खराब सड़कों से मुकाबला: भारतीय सड़कों पर अक्सर नुकीले पत्थर, कांच के टुकड़े या निर्माण सामग्री पड़ी रहती है। ऐसी सड़कों पर एयरलेस टायर एक वरदान साबित हो सकते हैं, क्योंकि ड्राइवर को टायर कटने या फटने का कोई डर नहीं होगा।
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    कमर्शियल वाहनों के लिए लाभ: भारत का पूरा लॉजिस्टिक सेक्टर (Trucks and Delivery Vans) सड़क मार्ग पर निर्भर है। ट्रकों के टायर पंचर होने से डिलीवरी में घंटों की देरी होती है। ब्रिजस्टोन की यह तकनीक 'लास्ट-माइल डिलीवरी' (Last-mile delivery) वाहनों के लिए 'डाउनटाइम' (Downtime) को लगभग शून्य कर देगी, जिससे व्यापारिक मुनाफा बढ़ेगा।
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    मौसम का प्रभाव: भारत में अत्यधिक गर्मी पड़ती है, जिससे पारंपरिक टायरों में हवा फैलती है और अक्सर गर्मियों में हाईवे पर टायर फटने के मामले बढ़ जाते हैं। एयरलेस टायरों में हवा न होने के कारण ब्लोआउट (Blowout) का यह खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
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भविष्य की ओर बढ़ता कदम: कब तक सड़कों पर नजर आएंगे ये टायर?

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ब्रिजस्टोन (Bridgestone) ने स्पष्ट रूप से 'सोशल इम्प्लीमेंटेशन' (Social Implementation) की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इसका मतलब है कि वे अब इस तकनीक को समाज और बाजार के लिए सुलभ बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
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लॉन्च की संभावित समय-सीमा:

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    शुरुआती चरण (कमर्शियल उपयोग): विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलेस टायरों का पहला वास्तविक उपयोग (Commercial Rollout) सीधे आम पैसेंजर कारों में नहीं होगा। शुरुआत में इन्हें धीमी गति से चलने वाले छोटे डिलीवरी वाहनों, गोल्फ कार्ट्स, और ऑटोनॉमस शटल (Autonomous Shuttles) में फ्लीट ऑपरेटरों को दिया जाएगा।
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    पैसेंजर कारों के लिए: पैसेंजर कारों के लिए यह तकनीक संभवतः 2026-2028 के बीच प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहनों (Premium EVs) में एक 'ऑप्शनल अपग्रेड' (Optional Upgrade) के रूप में देखने को मिल सकती है। जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ेगा और लागत कम होगी, यह हर आम कार का हिस्सा बन जाएगी।
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गौरतलब है कि इस रेस में ब्रिजस्टोन अकेली कंपनी नहीं है। फ्रांस की टायर निर्माता कंपनी मिशेलिन (Michelin) भी अपने 'Uptis' (Unique Puncture-proof Tire System) पर काम कर रही है और उसने जनरल मोटर्स (General Motors) के साथ मिलकर इसकी टेस्टिंग भी शुरू कर दी है। इससे यह साफ हो जाता है कि पूरी टायर इंडस्ट्री अब एक नए 'एयरलेस युग' (Airless Era) की ओर बढ़ रही है।
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मोबिलिटी का एक नया युग (Conclusion)

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पिछले सौ सालों से हम टायरों में हवा भरते आ रहे हैं। यह एक ऐसी आदत बन गई है जिसे हम मोबिलिटी का एक अनिवार्य हिस्सा मान चुके हैं। लेकिन Bridgestone के 'AirFree Tyre' का यह 3rd जेनरेशन मॉडल इस बात का प्रमाण है कि मानव नवाचार (Human Innovation) की कोई सीमा नहीं है।
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पंचर से मुक्ति, जीरो मेंटेनेंस, पर्यावरण संरक्षण, और बेहतर सुरक्षा— ये सभी विशेषताएं एयरलेस टायर को ऑटोमोबाइल उद्योग के इतिहास में इंजन से ईवी (EV) में बदलाव जितना ही बड़ा और महत्वपूर्ण कदम बनाती हैं। वह दिन अब ज्यादा दूर नहीं जब हम अपनी अगली पीढ़ी को यह कहानी सुनाएंगे कि "हमारे जमाने में, हम टायरों में हवा भरा करते थे और वे बीच सड़क पर पंचर हो जाया करते थे!" भविष्य हवा-रहित (Airless) है, और यह भविष्य अब हमारी दहलीज पर खड़ा है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs - Bridgestone AirFree Tyre)

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प्रश्न 1: 'एयरलेस टायर' (Airless Tyre) क्या होता है? उत्तर: एयरलेस टायर, जिसे NPT (Non-Pneumatic Tire) भी कहा जाता है, एक ऐसा टायर है जिसमें पारंपरिक टायरों की तरह संपीड़ित हवा (Compressed air) नहीं भरी जाती। हवा के बजाय, इसमें एक विशेष जालीदार (Web-like) रबर और रेजिन का ढांचा होता है जो गाड़ी का वजन उठाता है।
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प्रश्न 2: Bridgestone के 'AirFree' टायर का सबसे बड़ा फायदा क्या है? उत्तर: इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कभी पंचर (Puncture) नहीं हो सकता। इससे हाईवे पर टायर फटने (Blowout) का खतरा टल जाता है और हवा का दबाव (Tire pressure) बार-बार चेक करने की झंझट खत्म हो जाती है।
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प्रश्न 3: क्या एयरलेस टायरों से गाड़ी के माइलेज पर असर पड़ेगा? उत्तर: पारंपरिक टायरों में हवा कम होने पर रोलिंग रेजिस्टेंस (Rolling resistance) बढ़ जाता है, जिससे माइलेज गिरता है। चूंकि एयरलेस टायरों का आकार हमेशा स्थिर रहता है, इसलिए वे लंबे समय तक बेहतर और एक समान माइलेज (या EVs के लिए बेहतर रेंज) प्रदान कर सकते हैं।
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प्रश्न 4: क्या ये टायर भारत की खराब सड़कों के लिए सुरक्षित हैं? उत्तर: जी हाँ। इन टायरों का लचीला स्पोक-स्ट्रक्चर (Spoke structure) खराब सड़कों और गड्ढों के झटकों को सोखने के लिए ही डिजाइन किया गया है। नुकीले पत्थरों या कीलों से भी इस टायर को कोई नुकसान नहीं होता, इसलिए यह भारतीय सड़कों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। 
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प्रश्न 5: हम इन एयरलेस टायरों को आम कारों में कब तक देख पाएंगे? उत्तर: ब्रिजस्टोन इसे 'प्रोडक्शन रेडी' बता चुका है। शुरुआत में इसे कमर्शियल डिलीवरी वाहनों में इस्तेमाल किया जाएगा। उम्मीद है कि अगले 2 से 4 वर्षों (2026-2028) में यह तकनीक आम पैसेंजर कारों के लिए भी उपलब्ध हो जाएगी।