खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली/नेशनल डेस्क: सड़कों पर चलते समय अचानक किसी तेज धमाके या कान फोड़ देने वाली आवाज से आपका भी दिल दहल गया होगा। आजकल युवाओं में अपनी मोटरसाइकिल (विशेषकर रॉयल एनफील्ड बुलेट) या कारों को 'हटके' दिखाने का एक ऐसा जानलेवा शौक पनप रहा है, जो दूसरों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। इस शौक का नाम है— वाहन मॉडिफिकेशन (Vehicle Modification) और मॉडिफाइड साइलेंसर (Modified Silencer)।READ ALSO:-"बेटा देश के लिए हुआ शहीद, आज बेबस मां न्याय के लिए खा रही धक्के..." बिजनौर में दबंग किरायेदारों का आतंक, मकान खाली कराने गई शहीद की मां पर फायरिंग का आरोप
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सड़क पर भौकाल जमाने और दिखावा करने की इस अंधी दौड़ ने न केवल ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) को खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया है, बल्कि हादसों को भी खुला निमंत्रण दिया है। अब इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए देशभर की ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग (RTO) ने 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपना ली है। जगह-जगह सघन चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों की गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन तक रद्द किए जा रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि मॉडिफाइड वाहनों पर क्या हैं सख्त नियम, क्यों यह कानूनन अपराध है और पुलिस की इस पर क्या तैयारी है।
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क्या है मॉडिफाइड साइलेंसर का क्रेज़ और इसका खतरनाक 'पटाखा' पैटर्न?

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आजकल युवाओं के बीच एक अजीब सा चलन शुरू हो गया है। नई बाइक या कार खरीदते ही सबसे पहला काम उसके ओरिजिनल साइलेंसर (Original Silencer) को हटाकर एक 'आफ्टर-मार्केट' (After-market) मॉडिफाइड साइलेंसर लगवाना होता है। खासकर बुलेट जैसी भारी बाइकों में ऐसे साइलेंसर लगाए जा रहे हैं जो बिल्कुल बंदूक की गोली या तेज पटाखे (Firecracker) जैसी आवाज निकालते हैं।
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खतरे की घंटी: जब कोई युवा भीड़भाड़ वाले इलाके या किसी शांत रिहायशी कॉलोनी से यह तेज आवाज करता हुआ गुजरता है, तो इसका सबसे बुरा असर उन लोगों पर पड़ता है जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं।
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    हृदय रोगियों के लिए जानलेवा: अचानक तेज धमाके की आवाज से दिल के मरीजों को हार्ट अटैक (Heart Attack) आने का खतरा रहता है।
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    बुजुर्गों और बच्चों में दहशत: तेज आवाज छोटे बच्चों को डरा देती है और बुजुर्गों में घबराहट और ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) बढ़ने की समस्या पैदा कर सकती है।
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    सड़क हादसों का डर: वाहन चलाते समय अचानक तेज आवाज सुनकर कोई भी घबरा सकता है, जिससे गाड़ी का संतुलन बिगड़ने और गंभीर दुर्घटना होने की पूरी आशंका बनी रहती है।
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कानून की नज़र में: मोटर व्हीकल एक्ट (MV Act) के सख्त नियम

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भारत में वाहनों के निर्माण और उनके संचालन को लेकर मोटर व्हीकल एक्ट में बहुत सख्त प्रावधान किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेशों और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 52 के अनुसार, किसी भी मोटर वाहन में उस तरह का कोई भी फेरबदल (Modification) नहीं किया जा सकता, जो वाहन निर्माता कंपनी के मूल प्रमाण पत्र (Original specifications) से अलग हो।
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जुर्माना और सजा के प्रावधान:

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    धारा 190(2) का प्रयोग: यदि कोई वाहन सड़क पर खतरनाक धुआं छोड़ता है या तय डेसिबल से अधिक ध्वनि प्रदूषण करता है, तो मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) के तहत पहली बार पकड़े जाने पर 10,000 रुपये तक का भारी चालान या जेल का प्रावधान है।
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    साइलेंसर जब्ती: ट्रैफिक पुलिस अब सिर्फ चालान काटकर नहीं छोड़ रही है। मौके पर ही मैकेनिक को बुलाकर अवैध साइलेंसर को उखाड़ लिया जाता है।
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    रोड रोलर से कुचलने की कार्रवाई: युवाओं में कड़ा संदेश देने के लिए पुलिस जब्त किए गए सैकड़ों मॉडिफाइड साइलेंसरों को सड़क पर रखकर उन पर रोड रोलर (Road Roller) चलवा रही है।
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    रजिस्ट्रेशन (RC) रद्द: बार-बार इस अपराध को दोहराने पर संबंधित आरटीओ (RTO) द्वारा उस वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता है।
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वाहन मॉडिफिकेशन: क्या है लीगल और क्या है पूरी तरह से इलीगल?

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कई लोगों को यह गलतफहमी होती है कि गाड़ी उनकी अपनी संपत्ति है, तो वे उसमें अपनी मर्जी से कोई भी बदलाव कर सकते हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। आइए समझते हैं कि मॉडिफिकेशन के नाम पर क्या-क्या करना अपराध की श्रेणी में आता है:
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क्या है पूरी तरह से गैरकानूनी (Illegal)?

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    इंजन में बदलाव: गाड़ी के ओरिजिनल इंजन को निकालकर कोई और हाई-कैपेसिटी का इंजन (Engine Swapping) लगाना पूरी तरह अवैध है।
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    चेसिस (Chassis) से छेड़छाड़: वाहन के ढांचे या लंबाई-चौड़ाई को काटना या बढ़ाना।
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    विशाल टायर लगाना (Oversized Tyres): ऐसे टायर जो गाड़ी की बॉडी से बाहर निकले हों, यह गाड़ी का बैलेंस बिगाड़ते हैं।
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    रंग बदलना (Color Change): आरटीओ (RTO) की पूर्व अनुमति के बिना अपनी कार या बाइक का बेस कलर बदलना।
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    काले शीशे (Tinted Glass): कार की खिड़कियों पर तय मानक से अधिक डार्क फिल्म लगाना या पूरी तरह से काले शीशे लगाना।
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    प्रेशर हॉर्न (Pressure Horn): मल्टी-टोन या हूटर और सायरन वाले प्रेशर हॉर्न लगाना, जो आपातकालीन वाहनों (जैसे पुलिस या एंबुलेंस) के लिए रिजर्व होते हैं।
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क्या बदलाव किए जा सकते हैं (Legal)?

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    हल्के-फुल्के कॉस्मेटिक बदलाव जैसे—गाड़ी के अंदर के सीट कवर बदलना।
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    विंडो वाइजर और रेन गार्ड (Rain Guard) लगाना।
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    छोटे-मोटे स्टीकर (बिना रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट को छिपाए) लगाना।
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पर्यावरण पर पड़ता है गहरा और जानलेवा असर

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मॉडिफाइड साइलेंसर न केवल ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी जहर समान हैं। दरअसल, कंपनियों द्वारा लगाए गए 'ओरिजिनल साइलेंसर' में कैटेलिटिक कन्वर्टर (Catalytic Converter) लगा होता है। इसका काम इंजन से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड (Carbon Monoxide) और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों को छानकर (Filter) कम हानिकारक गैसों में बदलना होता है।
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जब युवा तेज आवाज के चक्कर में इस असली साइलेंसर को हटाकर लोहे का खोखला पाइप (Free-flow exhaust) लगा लेते हैं, तो वह जहरीला धुआं सीधे हवा में घुलने लगता है। इससे वायु प्रदूषण (Air Pollution) के स्तर में भयानक वृद्धि होती है, जो अंततः हमारे और आपके फेफड़ों को ही नुकसान पहुंचाता है।
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दिखावा नहीं, जीवन की सुरक्षा है सबसे ज़रूरी

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सड़क किसी की निजी जागीर नहीं है, यह एक सार्वजनिक संपत्ति है जिसका उपयोग समाज का हर वर्ग करता है। यह समझना बेहद आवश्यक है कि तेज़ आवाज़ करने वाले साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न और अजीबोगरीब दिखने वाले वाहन सड़क पर आपकी 'टशन' या 'रसूख' को नहीं दर्शाते, बल्कि यह आपकी गैर-जिम्मेदारी और दूसरों के प्रति असंवेदनशीलता को उजागर करते हैं।
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आज के युवाओं को यह बात गहराई से समझनी होगी कि "दिखावा नहीं, सुरक्षा ज़रूरी है।"

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असली शान नियमों को तोड़ने में नहीं, बल्कि उनका पालन करके एक आदर्श नागरिक बनने में है। अगर आप अपने वाहन को उसकी ओरिजिनल स्थिति में रखते हैं, सही गति में वाहन चलाते हैं और हेलमेट व सीटबेल्ट का प्रयोग करते हैं, तो आप न केवल भारी चालान से बचेंगे, बल्कि अपनी और दूसरों की कीमती जान भी सुरक्षित रख पाएंगे। इसलिए, एक समझदार नागरिक बनें, ट्रैफिक नियमों का पालन करें और सड़क पर सुरक्षित रहें।