खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली (पब्लिक वेलफेयर डेस्क): देश के करोड़ों गरीब, मजदूर और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए राशन कार्ड (Ration Card) उनके जीवन यापन का एक अहम हिस्सा है। केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' (PMGKAY) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत देश के 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन का लाभ मिल रहा है। लेकिन, अक्सर राशन दुकानों (सरकारी गल्ले की दुकानों) पर कोटेदारों की मनमानी, घटतौली (कम राशन तौलना), लंबी लाइनें और स्टॉक खत्म होने जैसी शिकायतें आम बात थीं।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर क्राइम: जब 'अवैध संबंधों' की आग में भस्म हुई दोस्ती; दोस्त ने पिलाई शराब, फिर घोंटा गला, पुलिस एनकाउंटर में कातिल गिरफ्तार
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इन सभी परेशानियों को जड़ से खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा (B.L. Verma) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब 'वन नेशन वन राशन कार्ड' (ONORC) योजना को और भी अधिक आधुनिक, पारदर्शी और जन-अनुकूल (User-friendly) बना दिया गया है। नई व्यवस्था के लागू होने से अब देश का कोई भी राशन कार्ड धारक राशन लेने के लिए किसी एक विशेष दुकान या डीलर पर निर्भर नहीं रहेगा।
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आइए, इस नई राशन व्यवस्था के हर पहलू, इसके फायदों और इसे कैसे इस्तेमाल करना है, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
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ATM की तर्ज पर काम करेगी नई राशन व्यवस्था: क्या है इसका मतलब?

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कल्पना कीजिए, जैसे आज से कई दशक पहले आपको अपने पैसे निकालने के लिए उसी बैंक की शाखा में जाना पड़ता था जहां आपका खाता खुला है। लेकिन ATM के आने से यह मजबूरी खत्म हो गई; अब आप अपने डेबिट कार्ड से देश के किसी भी एटीएम से पैसे निकाल सकते हैं।
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ठीक इसी 'पोर्टेबिलिटी' (Portability) के सिद्धांत पर अब वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) काम करेगा।
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    पुरानी व्यवस्था: पहले एक परिवार का नाम जिस कोटेदार (राशन डीलर) के पास दर्ज होता था, उसे उसी के पास जाकर महीने का पूरा राशन एक ही बार में उठाना पड़ता था।
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    नई व्यवस्था का 'एटीएम' मॉडल: अब ऐसा नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि अब व्यवस्था को पूरी तरह से लचीला बना दिया गया है। अगर आपके घर के पास वाली दुकान पर भीड़ है, या वहां केवल गेहूं उपलब्ध है और चावल का स्टॉक खत्म हो गया है, तो आपको निराश लौटने की जरूरत नहीं है। आप वहां से अपना गेहूं ले सकते हैं और बचे हुए कोटे का चावल अपने ही शहर या देश की किसी अन्य सरकारी राशन दुकान से प्राप्त कर सकते हैं। यह आंशिक उठान (Partial Lifting) की सुविधा इस योजना को 'गेम-चेंजर' बनाती है।
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प्रवासी मजदूरों और दिहाड़ी कामगारों के लिए 'संजीवनी'

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इस ऐतिहासिक बदलाव का सबसे बड़ा, सीधा और सकारात्मक असर देश के उन लाखों प्रवासी मजदूरों, दिहाड़ी कामगारों और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ेगा, जो अपनी आजीविका के लिए अपना गृह राज्य या गांव छोड़कर बड़े शहरों (जैसे- मुंबई, दिल्ली, सूरत, बेंगलुरु) में रहते हैं।
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    परिवार के लिए आधा, मजदूर के लिए आधा: मान लीजिए, एक परिवार बिहार या उत्तर प्रदेश के किसी गांव में रहता है और उस परिवार का मुखिया मजदूरी करने के लिए गुजरात में है। पुरानी व्यवस्था में राशन या तो गांव में मिलता था या पूरा शहर में। लेकिन अब, परिवार के सदस्य अपने हिस्से का राशन गांव की दुकान से ले सकते हैं, और वह मजदूर गुजरात में बैठे-बैठे उसी राशन कार्ड नंबर और अपने अंगूठे के निशान (Biometrics) के जरिए अपने हिस्से का राशन किसी भी गुजराती डीलर से प्राप्त कर सकता है।
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    कोई नया कार्ड बनवाने की झंझट नहीं: प्रवासी मजदूरों को अब दूसरे राज्य में जाकर नया राशन कार्ड बनवाने या अपना पता बदलवाने की लंबी कागजी कार्यवाही से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई है।
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तकनीक का प्रहार: घटतौली और डीलर की मनमानी पर लगेगी 'फुल स्टॉप'

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अक्सर शिकायतें आती थीं कि कोटेदार 5 किलो राशन की जगह 4 किलो या साढ़े 4 किलो ही तौलकर देते हैं। इसे 'घटतौली' कहा जाता है। सरकार ने इस भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का पूरा 'डिजिटलीकरण' कर दिया है।
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    ई-पॉस (e-PoS) मशीन और इलेक्ट्रॉनिक कांटे का एकीकरण: अब देश की 99% से अधिक सरकारी राशन दुकानों पर इलेक्ट्रॉनिक वेइंग मशीन (इलेक्ट्रॉनिक कांटा) को सीधे ई-पॉस (इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल) मशीनों से लिंक कर दिया गया है।
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    तौल के बिना रसीद नहीं: इसका मतलब है कि जब तक मशीन पर पूरा 5 किलो (या निर्धारित मात्रा) अनाज नहीं रखा जाएगा, तब तक e-PoS मशीन से पर्ची बाहर निकलेगी ही नहीं और राशन वितरण सर्वर पर दर्ज नहीं होगा।
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    बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (Biometric Authentication): राशन केवल उसी व्यक्ति को मिलेगा जिसका अंगूठा या आइरिस (आंख की पुतली) स्कैन मशीन पर मैच करेगा। इससे किसी और के हिस्से का राशन कोई दूसरा व्यक्ति नहीं मार सकेगा।
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''मेरा राशन 2.0' (Mera Ration 2.0) मोबाइल ऐप: आपके फोन में आपका सरकारी गल्ला

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इस पूरी व्यवस्था को आम जनता के लिए और भी आसान बनाने के लिए सरकार ने हाल ही में 'मेरा राशन 2.0' मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। यह ऐप राशन कार्ड धारकों के लिए एक 'डिजिटल डायरी' की तरह काम करता है।
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इस ऐप के प्रमुख फायदे:

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    आस-पास की दुकान खोजें: आप ऐप में 'लोकेट डीलर' (Locate Dealer) फीचर का इस्तेमाल करके अपने आस-पास मौजूद सभी सरकारी राशन दुकानों की लोकेशन मैप पर देख सकते हैं।
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    स्टॉक और कोटे की जानकारी: दुकान पर जाने से पहले ही आप चेक कर सकते हैं कि उस विशेष दुकान पर अभी गेहूं, चावल या बाजरा का स्टॉक उपलब्ध है या नहीं। साथ ही, आपको इस महीने कितना राशन मिलना है और आप कितना ले चुके हैं, इसका पूरा हिसाब (Transaction History) ऐप पर मौजूद रहता है।
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    आधार लिंकिंग का स्टेटस: आपके परिवार के कितने सदस्यों का आधार कार्ड राशन कार्ड से लिंक है और किसका पेंडिंग है, इसकी जानकारी भी ऐप पर मिलती है।
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ध्यान दें: नए नियमों का लाभ उठाने के लिए 'आधार लिंकिंग' है अनिवार्य

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सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC), 'एटीएम जैसी सुविधा' और मुफ्त राशन का लाभ बिना किसी रुकावट के पाने के लिए सबसे अहम शर्त है— आधार कार्ड (Aadhaar Card) का राशन कार्ड से लिंक होना।
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    यदि परिवार के किसी सदस्य का आधार राशन कार्ड से लिंक नहीं है (Aadhaar Seeding), तो उसका नाम कोटे से काटा जा सकता है।
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    यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य की गई है कि योजना का लाभ केवल असली और पात्र (Eligible) लोगों को मिले, और फर्जी राशन कार्डों (Ghost Beneficiaries) पर हमेशा के लिए लगाम लगाई जा सके।
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एक मजबूत, पारदर्शी और गरीब-कल्याण को समर्पित भारत की ओर कदम

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राशन वितरण प्रणाली में किया गया यह बदलाव केवल एक तकनीकी अपग्रेड नहीं है; यह भारत के सामाजिक कल्याण (Social Welfare) के ढांचे में एक मील का पत्थर है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि कोई भी गरीब व्यक्ति, चाहे वह देश के किसी भी कोने में हो, भूखा न सोए।
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ATM की तरह राशन देने की यह सुविधा कोटेदारों के 'एकाधिकार' (Monopoly) को तोड़ती है। अब अगर कोई डीलर खराब व्यवहार करता है या राशन देने में आनाकानी करता है, तो ग्राहक (लाभार्थी) के पास पूरी आजादी है कि वह अपनी पसंद की किसी दूसरी दुकान पर जाकर अपना हक ले सके। यह कदम 'डिजिटल इंडिया' और 'सबका साथ, सबका विकास' के उस विजन को धरातल पर उतारता है, जहां देश का हर नागरिक सरकारी योजनाओं का पूरा और बिना किसी बिचौलिए के सीधा लाभ प्राप्त कर सके।