खबरीलाल डेस्क
देश में रसोई गैस (LPG) की बढ़ती मांग और कभी-कभी होने वाली किल्लत की खबरों के बीच, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने एक बेहद अहम कदम उठाया है। अक्सर यह शिकायतें मिलती रहती थीं कि सब्सिडी वाले घरेलू गैस सिलेंडरों को ब्लैक में (कालाबाजारी) कमर्शियल इस्तेमाल के लिए होटलों और ढाबों पर ऊंचे दामों में बेच दिया जाता है, और असली उपभोक्ता गैस के लिए परेशान होता रहता है।READ ALSO:-Chardham Yatra 2026: चारधाम यात्रा का भव्य आगाज, 5 दिन में 1.30 लाख के पार पहुंचा श्रद्धालुओं का आंकड़ा, केदारनाथ में उमड़ी सबसे भारी भीड़
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इस धांधली और कालाबाजारी (Black Marketing) पर पूरी तरह से लगाम कसने, और सिलेंडर सही उपभोक्ता के घर तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए कंपनियों ने Delivery Authentication Code (DAC) सिस्टम को अनिवार्य कर दिया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह DAC कोड क्या है, यह कैसे काम करता है और अगर किसी वजह से आपको यह कोड नहीं मिलता है, तो आप इसे दोबारा कैसे प्राप्त कर सकते हैं।
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क्या है यह DAC (Delivery Authentication Code)?

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DAC यानी डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड मूल रूप से एक वन-टाइम पासवर्ड (OTP) की तरह ही काम करता है। जब भी आप अपने गैस प्रदाता (चाहे वह Indane हो, HP Gas हो या Bharatgas) के पास अपने गैस सिलेंडर की बुकिंग करते हैं, तो बुकिंग कन्फर्म होने के साथ ही आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक मैसेज आता है।
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इस मैसेज में बुकिंग रेफरेंस नंबर के साथ-साथ एक 4 से 6 अंकों का गुप्त कोड (DAC) भी दिया होता है।
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    डिलीवरी के समय है अनिवार्य: जब गैस एजेंसी का डिलीवरी बॉय सिलेंडर लेकर आपके घर पहुंचता है, तो आपको उसे खाली सिलेंडर और पैसे देने के साथ-साथ यह DAC कोड भी बताना होगा।
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    सिस्टम में होता है फीड: डिलीवरी बॉय अपने मोबाइल में मौजूद कंपनी के डिलीवरी ऐप में आपके द्वारा बताए गए कोड को दर्ज करेगा। कोड सही होने (Authenticate) पर ही डिलीवरी की प्रक्रिया पूरी (Closed) मानी जाएगी और वह आपको भरा हुआ सिलेंडर सौंपेगा।
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    गलत हाथों में जाने से बचाव: अगर यह कोड मैच नहीं होता है या आप कोड नहीं बता पाते हैं, तो सिस्टम डिलीवरी को मंजूरी नहीं देगा। इसका सीधा फायदा यह है कि कोई भी फर्जी व्यक्ति या डिलीवरी बॉय आपके नाम का बुक किया हुआ सिलेंडर किसी और को नहीं बेच सकेगा।
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अगर बुकिंग के बाद DAC कोड न मिले या डिलीट हो जाए, तो क्या करें?

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भारत में आज भी बड़ी संख्या में लोग फीचर फोन का इस्तेमाल करते हैं या कई बार नेटवर्क की समस्या के कारण एसएमएस (SMS) समय पर नहीं पहुंच पाता है। इसके अलावा, कई बार गलती से ग्राहकों से वह मैसेज डिलीट भी हो जाता है जिसमें DAC कोड लिखा होता है।
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ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या कोड न होने पर डिलीवरी बॉय सिलेंडर वापस ले जाएगा? जवाब है- नहीं, आपको बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है। गैस कंपनियों ने इस सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया है कि असली उपभोक्ता को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े:
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    डिलीवरी बॉय से करें अनुरोध: अगर आपके पास कोड नहीं है, तो आप अपने दरवाजे पर खड़े डिलीवरी बॉय से कोड को दोबारा भेजने (Resend Code) का अनुरोध कर सकते हैं। डिलीवरी बॉय के ऐप में 'Resend DAC/OTP' का विकल्प मौजूद होता है। जैसे ही वह उस पर क्लिक करेगा, आपके रजिस्टर्ड नंबर पर तुरंत एक नया कोड आ जाएगा।
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    रजिस्टर्ड नंबर का पास होना जरूरी: इस प्रक्रिया के लिए यह बेहद जरूरी है कि गैस एजेंसी में आपका जो मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड है, वह फोन उस समय आपके पास मौजूद और चालू (Active) अवस्था में हो।
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ऐप, WhatsApp और SMS से खुद ऐसे करें DAC कोड जेनरेट

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अगर आप किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं और अपना DAC कोड खुद जेनरेट या रिकवर करना चाहते हैं, तो तेल कंपनियों ने इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कई आसान और सुलभ विकल्प दिए हैं:
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1. गैस कंपनी के आधिकारिक मोबाइल ऐप के जरिए (Via Mobile App): अगर आप स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, तो यह सबसे आसान तरीका है।
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    सबसे पहले अपनी गैस कंपनी का आधिकारिक ऐप (जैसे- IndianOil ONE, HP Pay, या Hello BPCL) खोलें।
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    अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लॉगिन करें।
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    इसके बाद 'Order History' या 'Recent Bookings' के सेक्शन (Details) में जाएं।
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    यहां आपको अपनी मौजूदा बुकिंग की पूरी जानकारी दिखेगी। यहीं पर आपको आपका DAC कोड भी लिखा हुआ दिख जाएगा। अगर कोड एक्सपायर हो गया है, तो आप 'Generate DAC' विकल्प पर क्लिक करके नया कोड बना सकते हैं।
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2. व्हाट्सएप के जरिए (Via WhatsApp): आजकल लगभग हर स्मार्टफोन में व्हाट्सएप होता है और गैस कंपनियों ने इसे भी बुकिंग और सेवाओं से जोड़ दिया है।
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    अपनी गैस एजेंसी के आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर को अपने फोन में सेव करें।
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    उस नंबर पर अपने रजिस्टर्ड मोबाइल से 'Hi' लिखकर भेजें।
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    इसके बाद एक मेन्यू खुलेगा, जिसमें से आपको 'Other Services' (अन्य सेवाएं) का विकल्प चुनना होगा।
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    वहां 'Get DAC Code' या 'Delivery Code' के विकल्प पर टैप करें। कुछ ही सेकंड में आपको व्हाट्सएप पर ही आपका कोड भेज दिया जाएगा।
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3. साधारण SMS के जरिए (Via SMS): अगर आपके पास स्मार्टफोन या इंटरनेट नहीं है, तो आप साधारण मैसेज भेजकर भी कोड मंगा सकते हैं।
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    अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के मैसेज बॉक्स में जाएं।
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    वहां अपनी कंपनी के तय फॉर्मेट के अनुसार LPG या REFILL लिखें।
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    इसे अपनी गैस कंपनी के आधिकारिक एसएमएस (SMS) नंबर पर भेज दें।
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    अगर आपके नंबर पर पहले से कोई बुकिंग मौजूद है, तो रिप्लाई (Reply) मैसेज में आपको बुकिंग स्टेटस के साथ-साथ आपका DAC कोड और डिलीवरी की अनुमानित तारीख की जानकारी तुरंत मिल जाएगी।
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महत्वपूर्ण बात: तुरंत अपडेट करा लें अपना मोबाइल नंबर

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यह पूरा DAC सिस्टम और सुरक्षा प्रक्रिया केवल तभी काम करेगी जब आपका सही और चालू मोबाइल नंबर आपकी गैस एजेंसी के पास रजिस्टर्ड (Linked) होगा। अगर आपका पुराना नंबर बंद हो गया है या आपने सिम बदल लिया है, तो आपको न तो बुकिंग का मैसेज आएगा और न ही DAC कोड मिलेगा।
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इसलिए, किसी भी असुविधा से बचने के लिए आज ही अपनी गैस एजेंसी जाकर या ऑनलाइन माध्यम (e-KYC) से अपना वर्तमान मोबाइल नंबर जरूर अपडेट करा लें।
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DAC कोड का यह नया नियम शुरुआत में कुछ लोगों को झंझट लग सकता है, लेकिन यह पूरी तरह से ग्राहकों के हित और उनके अधिकार (सब्सिडी) को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है। डिजिटल इंडिया (Digital India) के इस दौर में थोड़ी सी जागरूकता हमें कालाबाजारी और धोखाधड़ी से बचा सकती है। अगली बार जब भी सिलेंडर बुक करें, तो अपना DAC कोड संभाल कर रखें!