केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने देशभर के स्कूलों में अपनी बहुचर्चित सीबीएसई थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। बोर्ड द्वारा सोमवार को जारी की गई इन नई गाइडलाइंस ने छात्रों और अभिभावकों के बीच चल रही कई तरह की दुविधाओं को खत्म कर दिया है। सबसे बड़ी राहत 10वीं कक्षा के मौजूदा बैच के स्टूडेंट्स को मिली है, जिन्हें इस नई तीन-भाषा नीति के तहत तीन भाषाएं पढ़ने से पूरी तरह छूट दी गई है। शिक्षा के क्षेत्र में यह एक बड़ा कदम है जो छात्रों के पाठ्यक्रम के बोझ को संतुलित करने के लिए उठाया गया है। READ ALSO:-सीसीएसयू मेरठ विवाद: डॉ. हरे कृष्णा पर भ्रष्टाचार, जानलेवा हमले और उत्पीड़न का आरोप, न्याय के लिए आमरण अनशन पर बैठे पीड़ित कर्मी शंकर सिंह नेगी
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9वीं कक्षा के छात्रों के लिए क्या है सीबीएसई का नया नियम?
\r\n\r\nसेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने अपनी गाइडलाइंस में स्पष्ट किया है कि क्लास 9 के स्टूडेंट्स को इस साल एक बार की विशेष छूट दी जा रही है। बोर्ड के अनुसार, अभी के 9वीं कक्षा के बैच को तीन भाषाएं अनिवार्य रूप से पढ़नी होंगी, लेकिन उन्हें भाषाओं के चुनाव में लचीलापन दिया गया है। छात्र चाहें तो दो विदेशी भाषाएं और केवल एक भारतीय भाषा का अध्ययन कर सकते हैं।
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यह महत्वपूर्ण डेवलपमेंट सीबीएसई की उस पिछली घोषणा के ठीक एक महीने से ज़्यादा समय बाद आया है, जिसमें बोर्ड ने कहा था कि 1 जुलाई से क्लास 9 के स्टूडेंट्स के लिए कम से कम दो देसी भारतीय भाषाओं समेत कुल तीन भाषाएं पढ़ना जरूरी होगा। इस पुराने फैसले का भारी विरोध हुआ था और कई स्टूडेंट्स तथा अभिभावकों ने सीबीएसई के इस आदेश के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। अब इस नई छूट से अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।
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सीबीएसई थ्री लैंग्वेज पॉलिसी और भविष्य की परीक्षाएं
\r\n\r\nसीबीएसई की एकेडमिक्स निदेशक प्रज्ञा एम सिंह ने इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “क्लास 10 के मौजूदा बैच पर सीबीएसई थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू नहीं होगी। इन छात्रों को पहले की तरह ही अपनी मौजूदा पढ़ाई जारी रखनी है और उन पर किसी नई भाषा का दबाव नहीं डाला जाएगा।”
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इसके साथ ही, जूनियर कक्षाओं के लिए भी भविष्य की रूपरेखा स्पष्ट कर दी गई है। प्रज्ञा एम सिंह ने बताया कि जो छात्र अभी कक्षा 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ रहे हैं, उन्हें भी आगे चलकर 10वीं क्लास में तीसरी भाषा का कोई बोर्ड एग्जाम देने की आवश्यकता नहीं होगी। यह फैसला छात्रों को तनावमुक्त शिक्षा प्रदान करने की दिशा में लिया गया है ताकि वे मुख्य विषयों पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकें।
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मैथ और साइंस में आएगा टू-लेवल सिस्टम (Two-Level System)
\r\n\r\nभाषाओं के अलावा, सीबीएसई ने अप्रैल महीने में विज्ञान और गणित (Math and Science) विषयों के लिए भी बड़े बदलावों की घोषणा की थी। बोर्ड ने क्लास 6 से तीन-भाषा फ़ॉर्मूले को धीरे-धीरे (Phase-wise) लागू करने का फैसला किया है। इसके साथ ही, 2026-27 एकेडमिक सेशन से क्लास 9 के लिए गणित और विज्ञान जैसे जटिल विषयों में 'दो-लेवल सिस्टम' शुरू करने का भी निर्णय लिया गया है।
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प्रस्तावित नई संरचना के तहत, मैथ और साइंस विषयों के दो अलग-अलग लेवल होंगे – पहला अनिवार्य मानक (Standard) और दूसरा ऑप्शनल एडवांस्ड कोर्स (Advanced Course)।
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- \r\n परीक्षा का पैटर्न: इस नए सिस्टम में सभी स्टूडेंट्स को एक कॉमन 80-मार्क्स का एग्जाम देना होगा।\r\n \r\n
- \r\n एडवांस्ड लेवल: जो स्टूडेंट्स इन विषयों में उच्च दक्षता (High Proficiency) चुनते हैं, वे एक अतिरिक्त एडवांस्ड-लेवल पेपर दे सकते हैं। इस अतिरिक्त पेपर का मुख्य मकसद छात्रों की गहरी वैचारिक समझ (Conceptual Understanding) और उच्च-क्रम की सोच (Higher-order thinking skills) का टेस्ट करना है।\r\n \r\n
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सीबीएसई के अनुसार, इस नए टू-लेवल सिस्टम (स्टैंडर्ड और एडवांस्ड) के तहत पहली क्लास 10 बोर्ड परीक्षा वर्ष 2028 में आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा उन छात्रों के लिए होगी जो 2026-27 सत्र में क्लास 9 में प्रवेश लेंगे।
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विदेशी भाषा चुनने के नियम और शर्ते
\r\n\r\nभाषाओं के चुनाव को लेकर 15 मई को बोर्ड ने एक और अहम घोषणा की थी। बोर्ड ने साफ किया था कि जो छात्र किसी विदेशी भाषा का अध्ययन करना चाहते हैं, वे दो भारतीय भाषाएं पढ़ने के बाद ही इसे चुन सकते हैं। ऐसे में विदेशी भाषा को सिर्फ तीसरी भाषा (Third Language) के तौर पर या फिर एक अतिरिक्त चौथी भाषा (Fourth Language) के तौर पर ही चुना जा सकेगा। इस कदम का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और साथ ही वैश्विक भाषाओं को सीखने का विकल्प खुला रखना है। (External link: source URL)
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कुल मिलाकर, सीबीएसई थ्री लैंग्वेज पॉलिसी और पाठ्यक्रम में किए गए अन्य बदलाव शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला और छात्र-अनुकूल बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम हैं। 10वीं के छात्रों को दी गई छूट और 9वीं के लिए विषय चयन में दी गई आंशिक स्वतंत्रता से बच्चों पर से अनावश्यक दबाव कम होगा। यह नई नीति न केवल छात्रों को अपनी पसंद की भाषाएं और विषय चुनने का अधिकार देती है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए उन्हें एक मजबूत शैक्षणिक आधार भी प्रदान करती है। आने वाले वर्षों में इन नीतियों का शिक्षा स्तर पर गहरा प्रभाव देखने को मिलेगा।
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सीबीएसई ने तीन-भाषा नीति (Three-Language Policy) के नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। 10वीं के मौजूदा छात्रों को इस नीति से छूट दी गई है, जबकि 9वीं के छात्र अब दो विदेशी और एक भारतीय भाषा चुन सकते हैं। 7वीं, 8वीं और 9वीं के छात्रों को भी 10वीं में तीसरी भाषा का बोर्ड एग्जाम नहीं देना होगा। इसके अलावा, 2026-27 सत्र से 9वीं कक्षा के लिए गणित और विज्ञान में 'स्टैंडर्ड' और 'एडवांस्ड' लेवल का टू-लेवल सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसकी पहली 10वीं बोर्ड परीक्षा 2028 में होगी।