अक्सर हमारे साथ ऐसा होता है कि कपड़े धोते वक्त पेंट की जेब में रखा ₹10 या ₹20 का नोट पानी में भीगकर गल जाता है, या फिर बाजार में लेन-देन के दौरान पुराना नोट फट जाता है। ऐसे कटे-फटे नोटों को चलाने या बैंक में बदलने में आम आदमी को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब, बहुत जल्द इस बड़ी समस्या का हमेशा के लिए अंत होने वाला है।READ ALSO:-मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में बड़ा एक्शन: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खुली 44 संपत्तियों की सील, बुलडोजर से बचने के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम!
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भारतीय करेंसी (Indian Currency) के इतिहास में एक बेहद क्रांतिकारी और आधुनिक बदलाव होने जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब पारंपरिक कागज के नोटों की जगह पॉलीमर (Polymer) यानी प्लास्टिक के नोट बाजार में उतारने की पूरी तैयारी कर चुका है। केंद्र सरकार ने इस ऐतिहासिक कदम को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
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हाल ही में संसद के मानसून सत्र के दौरान वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में देश को यह अहम जानकारी दी। आइए, विस्तार से समझते हैं कि यह पॉलीमर नोट क्या हैं, इनकी खासियत क्या होगी, और पुराने नोटों का भविष्य क्या होगा।
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क्या है RBI का 200 करोड़ नोटों का 'महा-ट्रायल'?
\r\n\r\nबाजार में सीधे तौर पर पूरी करेंसी बदलने से पहले, रिजर्व बैंक इसे एक पायलट प्रोजेक्ट (ट्रायल) के रूप में शुरू कर रहा है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार:
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- \r\n नोटों की वैल्यू: शुरुआती चरण में केवल ₹10 और ₹20 मूल्य वर्ग के नोट ही प्लास्टिक (पॉलीमर) के रूप में छापे जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n नोटों की संख्या: इस ट्रायल के तहत कुल 200 करोड़ नए पॉलीमर नोट छापे जाएंगे। इनमें 100 करोड़ नोट ₹10 के होंगे और 100 करोड़ नोट ₹20 के होंगे।\r\n \r\n
- \r\n अगला कदम: अगर आम जनता के बीच इन नोटों का इस्तेमाल सफल रहता है और मशीनें इन्हें आसानी से रीड कर पाती हैं, तो भविष्य में ₹50, ₹100 या ₹500 के नोट भी पॉलीमर में छापे जा सकते हैं।\r\n \r\n
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सबसे बड़ा सवाल: क्या पुराने ₹10 और ₹20 के कागजी नोट बंद हो जाएंगे?
\r\n\r\nजैसे ही बाजार में नए नोटों के आने की खबर फैलती है, लोगों के मन में 'नोटबंदी' (Demonetization) का डर सताने लगता है। लेकिन सरकार और रिजर्व बैंक ने स्थिति को बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है।
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पुराने नोट पूरी तरह से वैध (Legal Tender) रहेंगे: पॉलीमर नोट आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपके पास रखे पुराने कागजी नोट बेकार हो जाएंगे। बाजार में नए प्लास्टिक नोट और पुराने कागजी नोट एक साथ (Co-existence) चलते रहेंगे। यह बदलाव धीरे-धीरे और फेज़ मैनर (चरणबद्ध तरीके) में किया जाएगा। जैसे-जैसे पुराने कागजी नोट खराब होकर वापस RBI के पास पहुंचेंगे, बैंक उन्हें नष्ट करके उनकी जगह नए पॉलीमर नोट सर्कुलेशन में डालता जाएगा। इसलिए जनता को पैनिक करने या बैंक की लाइनों में लगने की कोई आवश्यकता नहीं है।
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कागज के बजाय प्लास्टिक (Polymer) के नोट ही क्यों? जानें 4 बड़े फायदे
\r\n\r\nभारतीय अर्थव्यवस्था में पॉलीमर बैंकनोट्स की एंट्री कोई रातों-रात लिया गया फैसला नहीं है। इसके पीछे बड़े आर्थिक और सुरक्षात्मक कारण छिपे हैं:
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- \r\n लंबी उम्र और बेहतरीन टिकाऊपन (Long Shelf Life): पॉलीमर नोट कागज की तुलना में बहुत अधिक मजबूत होते हैं। ये नोट पानी में गिरने से नहीं गलते, धूल-मिट्टी से गंदे नहीं होते और इन्हें आसानी से फाड़ा भी नहीं जा सकता। जहां एक सामान्य कागजी नोट 1 से 2 साल में खराब हो जाता है, वहीं पॉलीमर नोट 4 से 5 साल तक बिल्कुल नए जैसे रहते हैं।\r\n \r\n
- \r\n नकली नोटों के कारोबार पर सर्जिकल स्ट्राइक: भारत में नकली नोट (Fake Currency) हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहे हैं। पॉलीमर शीट की बनावट इतनी जटिल होती है कि इसमें ट्रांसपेरेंट विंडो (पारदर्शी खिड़की) और होलोग्राफिक इमेज जैसे एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स (Advanced Security Features) बड़ी आसानी से जोड़े जा सकते हैं। आम जालसाजों के लिए इन नोटों की नकल करना या इन्हें छापना लगभग नामुमकिन होगा।\r\n \r\n
- \r\n छपाई के हजारों करोड़ रुपये की बचत: ₹10 और ₹20 के नोट बाजार में सबसे ज्यादा हाथ बदलते हैं (High Circulation), इसलिए ये सबसे जल्दी फटते हैं। इन खराब नोटों को रिप्लेस करने के लिए RBI को हर साल अरबों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में ही RBI ने कागजी नोटों की छपाई पर करीब ₹6,372.8 करोड़ खर्च किए थे। प्लास्टिक नोट लंबे समय तक चलेंगे, जिससे देश के खजाने का हजारों करोड़ रुपया बचेगा।\r\n \r\n
- \r\n क्लीन नोट पॉलिसी (Clean Note Policy) को बढ़ावा: कागज के नोटों पर बैक्टीरिया और वायरस आसानी से चिपक जाते हैं (खासकर कोविड के बाद यह एक बड़ी चिंता बन गई थी)। प्लास्टिक नोटों की सतह चिकनी होती है, इसलिए ये स्वास्थ्य के नजरिए से भी ज्यादा साफ-सुथरे (Hygienic) माने जाते हैं।\r\n \r\n
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कब तक हमारी जेब में आएंगे ये हाई-टेक नोट? (What is the Timeline?)
\r\n\r\nयह प्रक्रिया अभी अपने शुरुआती लेकिन बेहद अहम चरण में है।
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- \r\n ग्लोबल टेंडर (Global Tender): RBI की नोट-प्रिंटिंग यूनिट ने इन नोटों को छापने के लिए विशेष प्रकार की 'पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट' (Polymer Substrate Sheet) की सप्लाई के लिए दुनिया भर की कंपनियों से 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EOI) आमंत्रित किया है।\r\n \r\n
- \r\n डेडलाइन: दुनिया भर के मैन्युफैक्चरर्स को अपनी बोलियां और तकनीकी प्रस्ताव जमा करने के लिए 18 अगस्त तक का समय दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n छपाई: एक बार टेंडर पास होने और कच्चा माल (Polymer Sheet) भारत पहुंचने के बाद, भारतीय प्रेसों में इन नोटों की छपाई शुरू होगी। उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ महीनों में ये नोट भारतीय बाजार में नजर आने लगेंगे।\r\n \r\n
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क्या भारत ऐसा करने वाला पहला देश है?
\r\n\r\nबिल्कुल नहीं! दुनिया भर के कई विकसित देश कागज के नोटों को बहुत पहले ही अलविदा कह चुके हैं। वर्तमान में दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पूरी तरह या आंशिक रूप से पॉलीमर बैंकनोट्स का इस्तेमाल हो रहा है।
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- \r\n ऑस्ट्रेलिया (Australia): यह दुनिया का पहला देश था जिसने 1988 में पॉलीमर नोट जारी किए थे।\r\n \r\n
- \r\n इसके अलावा कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (UK), न्यूजीलैंड, सिंगापुर और रोमानिया जैसे देशों में प्लास्टिक करेंसी का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। अब भारत भी इस ग्लोबल स्टैंडर्ड का हिस्सा बनने जा रहा है।\r\n \r\n
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फ्लैशबैक: भारत में नोट बदलने और नोटबंदी का इतिहास
\r\n\r\nभारत के इतिहास में करेंसी बदलने या बड़े नोटों को बंद करने के कई बड़े फैसले लिए जा चुके हैं:
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- \r\n पहली नोटबंदी (जनवरी 1946): आजादी से ठीक पहले ब्रिटिश भारत में ₹500, ₹1000 और ₹10,000 के नोटों को काले धन पर प्रहार करने के लिए बंद कर दिया गया था। (बाद में 1954 में इन्हें फिर से शुरू किया गया)।\r\n \r\n
- \r\n दूसरी नोटबंदी (जनवरी 1978): मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार ने भ्रष्टाचार और चुनाव में काले धन के इस्तेमाल को रोकने के लिए ₹1,000, ₹5,000 और ₹10,000 के बड़े नोटों को अमान्य कर दिया।\r\n \r\n
- \r\n तीसरी और सबसे बड़ी नोटबंदी (8 नवंबर 2016): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 500 और 1000 रुपये के नोटों को रातों-रात चलन से बाहर कर दिया। इसकी जगह ₹500 और ₹2000 के नए नोट आए।\r\n \r\n
- \r\n क्लीन नोट पॉलिसी (मई 2023): RBI ने ₹2,000 के गुलाबी नोटों की छपाई रोक दी और इन्हें चलन (सर्कुलेशन) से वापस ले लिया।\r\n \r\n
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(वर्तमान में भारत में ₹10, ₹20, ₹50, ₹100, ₹200 और ₹500 के कागजी नोट चलन में हैं।)
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प्लास्टिक करेंसी की तरफ भारत का यह कदम देश के वित्तीय ढांचे को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक है। अब वह दिन दूर नहीं जब फटे और टेप लगे नोट सिर्फ इतिहास के पन्नों या म्यूजियम में ही नजर आएंगे। 18 अगस्त को टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद RBI जल्द ही नए नोटों के डिजाइन और लॉन्च डेट का आधिकारिक ऐलान कर सकता है।