खबरीलाल डेस्क
जमीन पर खड़ी पुलिस, बेबस परिजन और सैकड़ों की भीड़ चार घंटे तक उसकी मिन्नतें करती रही। सबसे रुला देने वाला मंजर वह था, जब 5 साल के एक मासूम बच्चे के हाथ में पुलिस ने लाउडस्पीकर थमा दिया और वह अपनी तोतली जुबान में रोते हुए चीखता रहा— "पापा नीचे आ जाओ, पापा प्लीज नीचे आ जाओ..."। लेकिन दुर्भाग्य से न तो बच्चे की मासूमियत पिता का दिल पिघला सकी और न ही पुलिस की समझाइश काम आई। अंततः संतुलन बिगड़ने से युवक सीधे टंकी के गहरे पानी में जा गिरा और उसकी दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है।
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क्या है पूरा मामला? कैसे शुरू हुआ विवाद

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​प्राप्त जानकारी और मौके से मिली रिपोर्ट के अनुसार, मृतक की पहचान 30 वर्षीय शुभम के रूप में हुई है, जो मूल रूप से सदर बाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली हसनपुर चुंगी का निवासी था। बताया जा रहा है कि शुभम और उसकी पत्नी शिवानी के बीच पिछले काफी समय से पारिवारिक कलह चल रही थी। यह विवाद इतना गहरा था कि पहले भी दोनों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हो चुकी थी। मामला महिला थाने तक भी पहुंचा था, जहां पुलिस और परिवार के बुजुर्गों के हस्तक्षेप के बाद दोनों के बीच समझौता करा दिया गया था।
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​समझौते के बावजूद, रिश्तों की दरार पूरी तरह से भर नहीं पाई थी। शुभम की पत्नी शिवानी कुछ समय से देहात कोतवाली क्षेत्र की कांशीराम कॉलोनी में रह रही थी। मंगलवार की शाम शुभम अपनी पत्नी शिवानी से मिलने के लिए कांशीराम कॉलोनी पहुंचा था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि शुभम उस वक्त शराब के नशे में था। वहां पहुंचते ही किसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच फिर से भयंकर कहासुनी शुरू हो गई। बातों ही बातों में विवाद इतना बढ़ गया कि शुभम अपना आपा खो बैठा और गुस्से में आकर कॉलोनी में बनी ऊंची पानी की टंकी की तरफ दौड़ पड़ा।
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टंकी पर चढ़ने का 4 घंटे का खौफनाक ड्रामा

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​गुस्से और नशे में धुत्त शुभम तेजी से सीढ़ियां चढ़ता हुआ पानी की टंकी के बिल्कुल ऊपरी हिस्से पर जा पहुंचा। जैसे ही स्थानीय लोगों ने उसे टंकी के ऊपर खड़ा देखा, पूरी कांशीराम कॉलोनी में हड़कंप मच गया। लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और नीचे भारी भीड़ जमा हो गई। तुरंत देहात कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई।
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​मौके पर भारी पुलिस बल पहुंचा। पुलिस ने आते ही स्थिति को संभालने की कोशिश की। लाउडस्पीकर मंगवाए गए और शुभम को नीचे उतारने के लिए लगातार अनाउंसमेंट की जाने लगी। क्षेत्रीय पार्षद राजकुमार शर्मा को भी जब इस घटना की भनक लगी, तो वह भी तुरंत मौके पर पहुंच गए। उन्होंने भी माइक के जरिए शुभम को काफी समझाने-बुझाने का प्रयास किया। उसे भरोसा दिलाया गया कि जो भी उसकी समस्या है, उसे बैठकर सुलझा लिया जाएगा, पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करेगी। लेकिन शुभम टंकी की मुंडेर पर खतरनाक तरीके से घूमता रहा और नीचे आने से साफ इनकार करता रहा। यह पूरा हाई-वोल्टेज ड्रामा करीब 4 घंटे तक चलता रहा।
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मासूम बेटे की रुला देने वाली पुकार और नम होती आंखें

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​इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक और भावुक कर देने वाला पहलू शुभम का पांच साल का बेटा था। जब पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारियों की कोई तरकीब काम नहीं आई, तो पुलिस ने एक आखिरी भावनात्मक दांव खेला। उन्होंने शुभम के छोटे बेटे को बुलाया और उसके हाथ में माइक थमा दिया।
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​मासूम बच्चा, जो शायद यह समझ भी नहीं पा रहा था कि उसके पिता किस खतरे में हैं, बस रोते हुए बार-बार लाउडस्पीकर पर कह रहा था— "पापा नीचे आ जाओ... पापा मुझे डर लग रहा है, नीचे आ जाओ..."। बच्चे की यह रुला देने वाली आवाज पूरी कॉलोनी में गूंज रही थी। नीचे खड़ी भीड़ में मौजूद कई महिलाओं और पुरुषों की आंखें इस दृश्य को देखकर नम हो गईं। हर किसी को उम्मीद थी कि अपने खून, अपने जिगर के टुकड़े की आवाज सुनकर शुभम का नशा उतर जाएगा और वह एक पिता होने के नाते नीचे उतर आएगा। लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था। शुभम अपनी जिद पर अड़ा रहा।
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पहले भी कर चुका था ऐसी हरकत, लेकिन इस बार दे बैठा जान

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​स्थानीय लोगों और पड़ोसियों से मिली जानकारी के अनुसार, शुभम का यह कोई पहला ड्रामा नहीं था। लोगों ने बताया कि शुभम अत्यधिक शराब पीने का आदी था और नशे की हालत में वह पहले भी कई बार इसी तरह लोगों को डराने के लिए पानी की टंकी पर चढ़ चुका था। हालांकि, पिछली हर बार वह कुछ देर हंगामा करने के बाद या तो खुद नीचे आ जाता था, या लोग उसे सुरक्षित उतार लेते थे।
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​शायद यही वजह थी कि शुरुआत में कुछ लोगों को लगा कि यह भी उसका रोज का एक तमाशा है और वह कुछ देर में थक कर वापस आ जाएगा। लेकिन इस बार शराब का नशा, मानसिक तनाव और बारिश/नमी के कारण पनपी फिसलन ने मिलकर एक जानलेवा संयोग बना दिया।
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हादसे का वह खौफनाक पल

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​शाम ढलने लगी थी और अंधेरा गहराने लगा था। 4 घंटे से टंकी के ऊपर खड़ा शुभम अब शायद शारीरिक रूप से थक चुका था। अचानक, उसका पैर फिसला। भीड़ के मुंह से एक तेज चीख निकली। शुभम अपना संतुलन खो बैठा और टंकी के बाहरी हिस्से की तरफ गिरने के बजाय, वह सीधे पानी की टंकी के अंदरूनी हिस्से में मौजूद गहरे पानी में जा गिरा।
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​टंकी के अंदर गिरने की तेज आवाज आते ही पुलिस और स्थानीय गोताखोर/युवक तुरंत हरकत में आए। आनन-फानन में लोग ऊपर चढ़े और बड़ी मशक्कत के बाद उसे पानी से बाहर निकाला गया। उसे तुरंत एंबुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद शुभम को मृत घोषित कर दिया। पानी में डूबने और ऊंचाई से गिरने के कारण उसे गंभीर चोटें आई थीं।
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पुलिस का बयान और आगे की जांच

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​इस दुखद घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिया है। एएसपी (ASP) मनोज कुमार यादव ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि युवक को बचाने के लिए प्रशासन और पुलिस ने अपनी तरफ से हरसंभव और अथक प्रयास किए। उसे सुरक्षित नीचे उतारने के लिए घंटों तक समझाया गया, उसके बेटे का सहारा लिया गया, लेकिन वह किसी की बात सुनने को तैयार नहीं था।
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​एएसपी ने स्पष्ट किया कि, "फिलहाल मृतक के परिजनों या पत्नी की तरफ से थाने में कोई भी लिखित शिकायत (तहरीर) नहीं दी गई है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों (डूबने से या चोट लगने से) की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी। यदि परिवार की ओर से कोई शिकायत आती है, तो पुलिस उसके आधार पर निष्पक्ष और सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।"
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​इस पूरी घटना ने समाज में बढ़ते नशे की लत और पारिवारिक टूट के खतरनाक नतीजों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। एक पिता की जिद और नशे ने एक मासूम के सिर से हमेशा के लिए साया छीन लिया है। इलाके में मातम का सन्नाटा पसरा हुआ है।