खबरीलाल डेस्क
लखनऊ (उत्तर प्रदेश): दूध और दुग्ध उत्पादों के नाम पर सफेद जहर बेच रहे माफियाओं और मिलावटखोरों की अब उत्तर प्रदेश में खैर नहीं है। राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आम जनता के स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला लिया है। प्रदेश भर में एनालॉग (Analog) पनीर, क्रीम, घी, छेना, और खोवा के उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।READ ALSO:-टीवी ब्रेक पर नहीं रहेगी कोई पाबंदी! केंद्र सरकार ने हटाया 12 मिनट विज्ञापन का नियम; जानिए आपकी टीवी स्क्रीन पर क्या बदलेगा
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खाद्य सुरक्षा विभाग की लगातार मिल रही शिकायतों और सैंपलिंग के दौरान सामने आए चौंकाने वाले सच के बाद सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है। अब अगर कोई भी व्यक्ति या कंपनी दूध के असली रूप के साथ छेड़छाड़ करती पाई गई, तो सिर्फ जुर्माना नहीं होगा, बल्कि पूरी फैक्ट्री सील कर दी जाएगी और सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज होगी।
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क्या होता है 'एनालॉग' डेयरी प्रोडक्ट (Analog Dairy Products)?

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सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सरकार ने जिस 'एनालॉग' शब्द का इस्तेमाल किया है, उसका मतलब क्या है। 'एनालॉग डेयरी उत्पाद' वे उत्पाद होते हैं जो देखने में बिल्कुल असली दूध, पनीर, घी या खोवा जैसे लगते हैं, लेकिन असल में वे दूध से नहीं बने होते हैं।
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इन उत्पादों को बनाने के लिए दूध की प्राकृतिक वसा (Dairy Fat) को निकाल लिया जाता है और उसकी जगह सस्ते वनस्पति वसा (Vegetable Fat), पाम ऑयल, सोयाबीन या कृत्रिम रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। आसान भाषा में कहें तो यह सिंथेटिक या नकली पनीर और घी होता है, जो बाजार में असली बताकर महंगे दामों पर बेचा जाता है। इससे मुनाफाखोर तो अमीर हो रहे थे, लेकिन आम जनता को बीमारियों के दलदल में धकेला जा रहा था।
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इन खतरनाक रसायनों से बन रहा था आपका खाना: सामने आई खौफनाक सच्चाई

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राज्य के कई जिलों में जब खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने दूध और डेयरी उत्पादों के सैंपल लेकर उन्हें लैब में परीक्षण के लिए भेजा, तो जो रिपोर्ट सामने आई, उसने शासन की नींद उड़ा दी। रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में बिक रहे पनीर, दूध और खोवे में दूध नाम की कोई चीज बची ही नहीं थी।
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अधिकारियों ने दूध और डेयरी उत्पादों में जिन जानलेवा मिलावटों (Adulterants) की पुष्टि की है, उनकी सूची बेहद डरावनी है:
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    टैल्कम पाउडर और डिटर्जेंट: दूध और पनीर में गाढ़ापन और झाग लाने के लिए वाशिंग पाउडर और टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो सीधे तौर पर पेट और आंतों को गलाने का काम करता है।
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    वनस्पति वसा और सोयाबीन: सस्ते तेलों और वनस्पति वसा का प्रयोग कर नकली घी बनाया जा रहा था, जो हार्ट अटैक और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है।
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    टाइटेनियम डाइऑक्साइड (Titanium Dioxide): यह एक सफेद रंग का केमिकल (पेंट और कॉस्मेटिक्स में इस्तेमाल होने वाला) है, जिसे नकली पनीर को चमचमाता हुआ सफेद रंग देने के लिए मिलाया जा रहा था।
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    हाइड्रोजन पेरोक्साइड (Hydrogen Peroxide): दूध को लंबे समय तक फटने से बचाने के लिए इस केमिकल का इस्तेमाल हो रहा था।
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    लिक्विड ग्लूकोज और न्यूट्रलाइजर: स्वाद बदलने और खट्टापन छिपाने के लिए।
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सरकार के आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि ऐसे मिलावटी पदार्थों से बने दुग्ध उत्पाद उपभोक्ताओं के लिए धीमे जहर (Slow Poison) का काम कर रहे हैं और इनका उपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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योगी सरकार का 'जीरो टॉलरेंस' एक्शन प्लान: मिलावटखोरों को मिलेगी सख्त सजा

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उत्तर प्रदेश सरकार ने आदेश जारी करते हुए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI), 2006 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। खाद्य सुरक्षा आयुक्त को इस महा-अभियान की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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इस नए आदेश के तहत मिलावटखोरों पर तीन तरफा वार किया जाएगा:

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    पूरी यूनिट होगी सील (Factory Seizure): यदि किसी भी निर्माण इकाई (फैक्ट्री या डेयरी) में मिलावटी दूध या दुग्ध उत्पाद पाए जाते हैं, तो सिर्फ वह उत्पाद नहीं, बल्कि उस पूरी फैक्ट्री का सारा माल जब्त कर लिया जाएगा। जनस्वास्थ्य को खतरा देखते हुए उस यूनिट को तत्काल प्रभाव से बंद (सील) कर दिया जाएगा।
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    दर्ज होगी FIR (Criminal Action): यदि जांच के दौरान उत्पादों में हानिकारक रसायनों (जैसे डिटर्जेंट, यूरिया या टाइटेनियम डाइऑक्साइड) का इस्तेमाल पाया जाता है, तो खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 34 के तहत तत्काल प्रतिबंध आदेश जारी होगा और संबंधित मालिक के खिलाफ सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कर उसे जेल भेजा जाएगा।
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    बाहरी ब्रांड्स पर भी लगेगी रोक (Ban on Out-of-State Brands): यह आदेश सिर्फ यूपी की कंपनियों के लिए नहीं है। अगर राज्य के बाहर (जैसे दिल्ली, हरियाणा या राजस्थान) निर्मित किसी डेयरी ब्रांड के उत्पाद में हानिकारक रसायन या वनस्पति वसा की मौजूदगी यूपी की लैब में साबित होती है, तो उस ब्रांड की पूरे उत्तर प्रदेश में बिक्री प्रतिबंधित कर दी जाएगी। इसके साथ ही उसका खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण तत्काल निलंबित कर दिया जाएगा।
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कानून क्या कहता है? (खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006)

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राज्य सरकार का यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (Food Safety and Standards Act, 2006) के सख्त प्रावधानों पर आधारित है। इस कानून में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि "दूध और दुग्ध उत्पादों को उनके प्राकृतिक और असली रूप में ही बेचा जाना चाहिए।" यदि कोई उत्पाद डेयरी विकल्प के रूप में बेचा जा रहा है, तो उस पर स्पष्ट रूप से 'एनालॉग' या 'वनस्पति उत्पाद' लिखा होना चाहिए, लेकिन बाजार में इन कृत्रिम उत्पादों को 'शुद्ध देसी घी' या 'शुद्ध पनीर' के लेबल के साथ बेचा जा रहा था, जो उपभोक्ताओं के साथ सीधा धोखा (Fraud) है।
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प्रतिबंध लगाने वाला यूपी इकलौता राज्य नहीं

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हालांकि, एनालॉग पनीर और नकली डेयरी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के मामले में उत्तर प्रदेश देश का इकलौता राज्य नहीं है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और मिलावट के बढ़ते मामलों को देखते हुए, देश के कई अन्य राज्यों ने भी वनस्पति वसा से बने डेयरी विकल्पों के खिलाफ जंग छेड़ रखी है।
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उत्तर प्रदेश से पहले निम्नलिखित राज्य भी इस तरह के उत्पादों पर सख्त प्रतिबंध लगा चुके हैं:
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    उत्तराखंड
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    मध्य प्रदेश
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    गुजरात
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    महाराष्ट्र
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    छत्तीसगढ़
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इन सभी राज्यों का एक ही उद्देश्य है—नागरिकों को शुद्ध पौष्टिक आहार मिले और सिंथेटिक दूध माफियाओं के सिंडिकेट को जड़ से खत्म किया जा सके।
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कैसे करें असली और नकली पनीर की पहचान? (घरेलू उपाय)

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चूंकि बाजार में अभी भी पुराना स्टॉक हो सकता है, ऐसे में आम जनता को भी जागरूक रहने की जरूरत है। आप घर बैठे इन आसान तरीकों से पनीर की शुद्धता जांच सकते हैं:
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    आयोडीन टेस्ट: पनीर के एक छोटे टुकड़े को पानी में उबाल लें। ठंडा होने पर इसमें आयोडीन टिंचर की कुछ बूंदें डालें। अगर पनीर का रंग नीला हो जाए, तो समझ लें कि उसमें कृत्रिम कार्बोहाइड्रेट या मैदा मिलाया गया है।
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    मसल कर देखें: असली पनीर हाथों से मसलने पर आसानी से टुकड़ों में टूट जाता है क्योंकि वह दूध की प्राकृतिक वसा से बना होता है। जबकि नकली (एनालॉग) पनीर रबड़ की तरह खिंचता है और थोड़ा कड़क होता है।
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    अरहर की दाल का पानी: थोड़ा सा पनीर लें और उसमें अरहर की दाल का उबला हुआ पानी मिलाएं। अगर पनीर का रंग हल्का लाल होने लगे, तो इसका मतलब है कि उसमें डिटर्जेंट या यूरिया मिला हुआ है।
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योगी सरकार का यह फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के करोड़ों नागरिकों, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए उठाया गया एक संजीवनी कदम है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि खाद्य सुरक्षा विभाग इस आदेश को जमीनी स्तर पर कितनी सख्ती से लागू करता है। फिलहाल, इस कड़े फैसले से प्रदेश भर के मिलावटखोरों और सिंथेटिक दूध माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।