नई दिल्ली: स्पैम कॉल और ऑनलाइन धोखाधड़ी (फ्रॉड) से परेशान करोड़ों भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। सरकार ने एक नया और शक्तिशाली कॉलर आईडी सिस्टम शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस 'कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन' (CNAP सिस्टम) की टेस्टिंग देश के कुछ हिस्सों में शुरू हो गई है, और टेलीकॉम कंपनियाँ इसे धीरे-धीरे अपने नेटवर्क पर एक्टिवेट कर रही हैं। यह नया सिस्टम अनचाही कॉल्स और वित्तीय घोटालों से निपटने में बेहद कारगर साबित होगा।READ ALSO:-मेरठ: जिस घर में गूंजनी थी शहनाई, वहां गूंजी चीखें: शादी से 2 दिन पहले दूल्हे की दर्दनाक मौत, जिम सप्लीमेंट बना काल?
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क्या है CNAP सिस्टम और यह कैसे काम करेगा?
\r\n\r\nCNAP (Calling Name Presentation) एक सरकारी समर्थन प्राप्त कॉलर आईडी सिस्टम है। इसका मुख्य उद्देश्य कॉल करने वाले की पहचान को वेरिफाइड तरीके से दर्शाना है।
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- \r\n पहचान का आधार: जब आपके फोन पर कोई अनजान नंबर से कॉल आएगी, तो स्क्रीन पर सबसे पहले वह नाम दिखाई देगा जो कॉलर के सिम रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड्स या आधार कार्ड से लिंक्ड है।\r\n \r\n
- \r\n प्राथमिकता: यदि आपने उस नंबर को अपने कॉन्टैक्ट लिस्ट में किसी और नाम से सेव कर रखा है (जैसे 'मॉम'), तो कॉल आने पर पहले सरकारी रिकॉर्ड वाला नाम दिखेगा, और उसके बाद कॉन्टैक्ट लिस्ट वाला नाम दिखाई देगा।\r\n \r\n
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दूरसंचार विभाग (DoT) और ट्राई (TRAI) द्वारा अनुमोदित यह सुविधा डिफ़ॉल्ट रूप से सभी यूज़र्स को उपलब्ध होगी, हालांकि, जो यूज़र इसे नहीं चाहते वे इसे डिएक्टिवेट भी करा सकेंगे। टेलीकॉम कंपनियों ने इस सुविधा का ट्रायल पिछले साल मुंबई और हरियाणा सर्किल में सफलतापूर्वक किया था।
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CNAP Truecaller से क्यों अलग और बेहतर है?
\r\n\r\nआजकल कई लोग स्पैम कॉल को पहचानने के लिए ट्रूकॉलर (Truecaller) जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, CNAP सिस्टम इन ऐप्स से पूरी तरह अलग और अधिक विश्वसनीय है:
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| \r\n विशेषता \r\n | \r\n \r\n CNAP (कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन) \r\n | \r\n \r\n Truecaller (ट्रूकॉलर) \r\n | \r\n
| \r\n नाम का स्रोत \r\n | \r\n \r\n सरकारी वेरिफिकेशन (सिम/आधार लिंक्ड रिकॉर्ड्स)। \r\n | \r\n \r\n यूज़र्स द्वारा क्राउडसोर्स किया गया डेटा। \r\n | \r\n
| \r\n विश्वसनीयता \r\n | \r\n \r\n बहुत अधिक, क्योंकि यह सरकारी रिकॉर्ड पर आधारित है। \r\n | \r\n \r\n गलत या भ्रामक हो सकता है। \r\n | \r\n
| \r\n जरूरत \r\n | \r\n \r\n कोई थर्ड-पार्टी ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं। \r\n | \r\n \r\n ऐप डाउनलोड करना और डेटा शेयर करना अनिवार्य। \r\n | \r\n
यह सरकारी वेरिफिकेशन पर आधारित होने के कारण, फर्जी नाम दिखाकर फ्रॉड करने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।
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यूजर्स को CNAP सिस्टम से होने वाले फायदे
\r\n\r\nइस सिस्टम का राष्ट्रीय स्तर पर रोलआउट होने के बाद उपभोक्ताओं को कई बड़े फायदे होंगे:
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- \r\n फ्रॉड पर लगाम: CNAP सिस्टम से स्कैमर्स और फ्रॉड कॉलर्स की पहचान करना आसान हो जाएगा, जिससे 'डिजिटल अरेस्ट' और वित्तीय घोटालों जैसे साइबर अपराधों को रोकने में मदद मिलेगी।\r\n \r\n
- \r\n सुरक्षा और पारदर्शिता: कॉल्स में पारदर्शिता आने से उपभोक्ताओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, खासकर बुजुर्गों और महिलाओं के लिए सुरक्षा का स्तर बढ़ेगा।\r\n \r\n
- \r\n स्पैम से बचाव: किसी भी थर्ड-पार्टी ऐप को डाउनलोड करने या अपना निजी डेटा साझा करने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि यह सुविधा सीधे नेटवर्क पर काम करेगी।\r\n \r\n
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किसे मिलेगी CNAP से छूट?
\r\n\r\nसरकार ने स्पष्ट किया है कि कुछ विशेष यूजर्स को 'कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन रिस्ट्रिक्शन' (CLIR) की सुविधा मिलेगी। इसका अर्थ है कि कॉल करने पर उनका नाम नहीं दिखेगा। यह सुविधा आम तौर पर केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों, महत्वपूर्ण व्यक्तियों और कुछ सामान्य उपभोक्ताओं को दी जाती है, जिनकी सुरक्षा या गोपनीयता अत्यंत आवश्यक होती है। हालांकि, बल्क कनेक्शन, कॉल सेंटर और टेली मार्केटर इस सुविधा का लाभ नहीं उठा सकते हैं।
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दूरसंचार नियामक ट्राई ने पिछले महीने 29 अक्टूबर को इस सिस्टम को लागू करने की अनुमति दी थी। अब जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया जैसी बड़ी टेलीकॉम कंपनियां इस सिस्टम को अपने नेटवर्क पर इंस्टॉल कर रही हैं। DoT का मानना है कि CNAP सिस्टम देश की डिजिटल सिक्योरिटी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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सरकार ने स्पैम और फ्रॉड कॉल्स पर नकेल कसने के लिए CNAP सिस्टम की टेस्टिंग शुरू कर दी है। यह नया कॉलर आईडी सिस्टम कॉल करने वाले का आधार से लिंक्ड वेरिफाइड नाम दिखाएगा, जिससे ट्रूकॉलर जैसे ऐप्स की निर्भरता खत्म होगी और डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।