खबरीलाल डेस्क
टेक्नोलॉजी की दुनिया में Google ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने कंप्यूटिंग के भविष्य की दिशा बदल दी है। Google ने अपने नए 'Willow' क्वांटम प्रोसेसर के साथ दुनिया की पहली 'वेरिफिएबल क्वांटम एडवांटेज' (verifiable quantum advantage) हासिल कर ली है।READ ALSO:-सरकारी कर्मचारियों के लिए 2025 में बदले रिटायरमेंट के नियम: पेंशन की गारंटी वाली 'UPS' योजना सहित 5 बड़े बदलाव लागू, भविष्य हुआ सुरक्षित
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कंपनी का दावा है कि उसका नया 'Quantum Echoes' एल्गोरिदम दुनिया के सबसे ताकतवर और तेज सुपर कंप्यूटर से भी 13,000 गुना तेज काम करता है। यह विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि यह पहली बार है जब किसी क्वांटम कंप्यूटर की स्पीड को न केवल मापा गया है, बल्कि उसे अन्य क्वांटम सिस्टम द्वारा सत्यापित (verify) भी किया जा सकता है।
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Google की ऐतिहासिक 'क्वांटम एडवांटेज'
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Google के CEO सुंदर पिचाई ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) पर इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, ”आज Nature जर्नल में हमारी नई क्वांटम एल्गोरिद्म प्रकाशित हुई है। हमारे Willow चिप ने दुनिया की पहली बार साबित की जा सकने वाली (verifiable) क्वांटम बढ़त हासिल की है। इसने हमारे नए एल्गोरिदम Quantum Echoes को चलाया, जो दुनिया के सबसे फास्ट सुपर कंप्यूटर पर मौजूद बेहतरीन क्लासिकल एल्गोरिदम से 13,000 गुना फास्ट है।”
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पिचाई ने आगे बताया कि यह खोज कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने लिखा, "यह एल्गोरिदम न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (NMR) तकनीक का उपयोग करके यह समझाने में मदद करता है कि किसी अणु में परमाणु आपस में कैसे जुड़ते और प्रतिक्रिया करते हैं। इससे भविष्य में नई दवाओं की खोज और नई सामग्रियों (materials) के विकास में बड़ी मदद मिल सकती है।"
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इस खोज की सबसे खास बात इसका 'वेरिफिएबल' होना है, यानी अन्य क्वांटम कंप्यूटर या प्रयोग इसे दोहरा सकते हैं। यह उपलब्धि क्वांटम कंप्यूटिंग को थ्योरी से निकालकर असली, व्यावहारिक इस्तेमाल की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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क्या है 'Quantum Echoes' एल्गोरिदम?

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Quantum Echoes एक क्रांतिकारी नया एल्गोरिदम है जो Out-of-Time-Ordered Correlator (OTOC) नामक एक जटिल क्वांटम माप की तेजी से गणना कर सकता है।
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सरल भाषा में, यह एल्गोरिदम अणुओं और परमाणुओं के बीच होने वाले उन बेहद सूक्ष्म बदलावों और प्रतिक्रियाओं को समझ सकता है, जिन्हें पकड़ पाना सामान्य कंप्यूटरों के बस की बात नहीं है। यह nuclear magnetic resonance के जरिए उन इंटरैक्शन को दिखाता है, जो नई दवाओं की खोज (drug discovery) और नए पदार्थों के विज्ञान (materials science) के अध्ययन के लिए बेहद ज़रूरी हैं।
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सुपर कंप्यूटर से 13,000 गुना फास्ट होने का मतलब

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Google के अनुसार, Quantum Echoes एल्गोरिदम ने एक विश्व-स्तरीय सुपर कंप्यूटर की तुलना में 13,000 गुना तेज परफॉर्मेंस दिखाया। यह स्पीड के मामले में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि है जो किसी 'वेरिफिएबल' क्वांटम हार्डवेयर पर हासिल की गई है। यह इस बात का पक्का सबूत है कि क्वांटम प्रोसेसर अब सिर्फ सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक प्रयोगों के लिए भी तैयार हो रहे हैं।
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'Willow' चिप की तकनीकी ताकत

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इस ऐतिहासिक कारनामे के केंद्र में Google का 'Willow' चिप है। इस चिप में 105 हाई-फिडेलिटी क्यूबिट्स (high-fidelity qubits) शामिल हैं, जो असाधारण सटीकता और स्थिरता (stability) प्रदान करते हैं। ये क्यूबिट्स जटिल क्वांटम कैलकुलेशन को एक साथ संभालने में सक्षम हैं, जिससे डेटा प्रोसेसिंग की रफ्तार हजारों गुना बढ़ गई है। यह तकनीकी सुधार भविष्य के और भी शक्तिशाली क्वांटम प्रोसेसर के लिए आधार बनेगा।
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विज्ञान और इंडस्ट्री पर क्या होगा असर?

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अगर अन्य रिसर्च इंस्टीट्यूट Google के इन रिजल्ट्स को दोहराने में सफल होते हैं, तो यह क्वांटम कंप्यूटिंग को सीधे तौर पर ड्रग डिजाइन, मटेरियल रिसर्च और मॉलिक्यूल केमिस्ट्री (अणुओं के रसायन) में वास्तविक उपयोग तक पहुंचा सकता है।
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Google Quantum AI के अनुसार, यह उपलब्धि "क्वांटम कंप्यूटिंग के प्रयोगात्मक युग (experimental era) से अनुप्रयोगिक युग (application era) की शुरुआत है।"