नोएडा: हाईटेक सिटी नोएडा (Noida News) में साइबर पुलिस और थाना फेस-1 की संयुक्त टीम ने एक ऐसे हाई-प्रोफाइल गैंग का भंडाफोड़ किया है, जो सात समंदर पार बैठे भारतीयों को अपना शिकार बनाता था। पुलिस ने गुरुवार को इस गैंग की मास्टरमाइंड 25 वर्षीय कनिष्का समेत 6 शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। यह गैंग फर्जी कॉल सेंटर के जरिए सस्ते दामों पर नेटफ्लिक्स, अमेजॉन प्राइम और अन्य ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स की मेंबरशिप बेचने का झांसा देकर ठगी करता था।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर: मस्जिद के मुअज्जिन ने दी दारोगा की गर्दन काटने की खुली तालिबानी धमकी; वीडियो वायरल होने पर FIR दर्ज, आरोपी फरार
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BA पास कनिष्का और बीटेक दोस्त ने रची साजिश
\r\n\r\nपुलिस की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस पूरे सिंडिकेट की मास्टरमाइंड 25 साल की कनिष्का है, जिसने कोविड काल में इग्नू (IGNOU) से बीए पास किया था। कनिष्का की मुलाकात बीटेक पास अनिल बघेल से हुई थी। दोनों ने पहले कई आईटी कंपनियों में काम किया और वहां से ओटीटी सब्सक्रिप्शन की टेक्निकल बारीकियां सीखीं।
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इसके बाद इन्होंने 'WEBBIZ SERVICES LLC' नाम से एक फर्जी कंपनी बनाई और नोएडा के सेक्टर-2 में 1.5 लाख रुपये महीने के किराये पर एक आलीशान ऑफिस खोला। यहां से वे ठगी का अपना काला कारोबार चला रहे थे।
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100-300 डॉलर में बेचते थे सपना, 4 महीने में करते थे 'ब्लैकआउट'
\r\n\r\nएसीपी साइबर क्राइम ने बताया कि यह गैंग मुख्य रूप से विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों (NRIs) को टारगेट करता था।
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- \r\n सस्ते का लालच: आरोपी सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर 100 से 300 डॉलर (करीब 9,000 से 27,000 रुपये) में 24 महीने के लिए नेटफ्लिक्स और अन्य प्रीमियम एप्स का सब्सक्रिप्शन देने का वादा करते थे।\r\n \r\n
- \r\n ठगी का तरीका: पैसे लेने के बाद वे ग्राहक को सर्विस देते थे, लेकिन 24 महीने की जगह सिर्फ 4 महीने बाद ही सब्सक्रिप्शन बंद कर देते थे।\r\n \r\n
- \r\n बहाना: जब ग्राहक शिकायत करते, तो वे "पेड वीडियो" या "तकनीकी खराबी" का बहाना बनाकर उन्हें टाल देते और दोबारा नया प्लान लेने के लिए मनाते थे।\r\n \r\n
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फर्राटेदार अंग्रेजी और टेक्निकल हैकिंग का खेल
\r\n\r\nपुलिस के मुताबिक, गैंग में शामिल सभी लोग अपने-अपने काम में माहिर थे। कॉल सेंटर में काम करने के लिए उन लोगों को ही रखा जाता था जो फर्राटेदार अंग्रेजी बोल सकें।
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गैंग के सदस्यों की भूमिका:
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- \r\n अनिल बघेल (28): टेक्निकल हैकर। इसका काम IPTV बॉक्स सेटअप करना, लाइव चैनल कैप्चर करना और सर्वर बदलकर ओटीटी अनलॉक करना था।\r\n \r\n
- \r\n मनीष त्रिपाठी (32): डेटा मैनेजर। विदेशों में रहने वाले भारतीयों का डेटा जुटाना और पेमेंट ट्रेल छिपाना इसकी जिम्मेदारी थी।\r\n \r\n
- \r\n गौरव बघेल (23): ऑपरेशन्स हेड। सब्सक्रिप्शन कटने पर ग्राहकों को कॉल करना और मॉनिटरिंग करना।\r\n \r\n
- \r\n राधा बल्लभ (30): सॉफ्टवेयर ऑपरेटर। कस्टम पैनल बनाना और फर्जी ऐप चलाना।\r\n \r\n
- \r\n योगेश बघेल (20): मार्केटिंग। फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर विज्ञापन चलाकर शिकार फंसाना।\r\n \r\n
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लग्जरी लाइफस्टाइल और सीज खाते
\r\n\r\nमास्टरमाइंड कनिष्का ही गैंग के सारे फाइनेंस मैनेज करती थी। ऑफिस का किराया, वर्करों की सैलरी और लग्जरी गाड़ियों का खर्चा उसी के हाथ में था। पुलिस ने इनके पास से लैपटॉप, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। जांच में 6 बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिनमें लाखों का ट्रांजैक्शन हुआ है। पुलिस ने इन सभी खातों को फ्रीज कर दिया है और ट्रांजैक्शन की हिस्ट्री खंगाल रही है।
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नोएडा पुलिस (Noida Police) की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी चाहे कितने भी शातिर हों, कानून की नजर से नहीं बच सकते। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनाधिकृत प्लेटफॉर्म से सस्ता सब्सक्रिप्शन खरीदने के लालच में न आएं, यह आपकी निजी जानकारी और पैसों दोनों के लिए खतरा हो सकता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.