मेरठ/लखनऊ (विशेष संवाददाता): उत्तर प्रदेश, और विशेष रूप से पश्चिमी यूपी (Western UP), इन दिनों भीषण गर्मी और लू (Heatwave) के थपेड़ों का सामना कर रहा है। तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है। ऐसे में बेतहाशा बिजली कटौती ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। इस गंभीर बिजली संकट और विभागीय अधिकारियों की घोर लापरवाही को लेकर उत्तर प्रदेश शासन ने अब बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की सख्त नाराजगी के बाद 'यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन' (UP Power Transmission Corporation) के प्रबंध निदेशक (MD) मयूर माहेश्वरी ने एक बड़ी और ऐतिहासिक दंडात्मक कार्रवाई करते हुए दो वरिष्ठ अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। इस ताबड़तोड़ एक्शन से पूरे बिजली विभाग में हड़कंप मच गया है।READ ALSO:-हापुड़ में खौफनाक वारदात: नशीला पदार्थ सुंघाकर युवक का अपहरण, बेरहमी से पिटाई के बाद 10 हजार की लूट, सड़क किनारे फेंका
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इन बड़े अधिकारियों पर गिरी निलंबन की गाज
\r\n\r\nशासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई इस कार्रवाई में पश्चिमी यूपी के दो महत्वपूर्ण जिलों के अधिकारियों को नापा गया है:
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- \r\n योगेश कुमार (अधिशासी अभियंता - XEN, पारेषण मेरठ): मेरठ क्षेत्र में लगातार हो रही ट्रिपिंग और मेंटेनेंस के अभाव के चलते इन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n राहुल (अधिशासी अभियंता - XEN, पारेषण गाजियाबाद पश्चिम): गाजियाबाद जैसे अति-महत्वपूर्ण और औद्योगिक जिले में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में विफल रहने पर इन्हें भी निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान एक्सईएन राहुल को मेरठ मुख्यालय से संबद्ध (Attach) कर दिया गया है।\r\n \r\n
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यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के एमडी मयूर माहेश्वरी का यह एक्शन स्पष्ट संदेश देता है कि जनता की सुविधाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
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आखिर क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई? (The Root Cause of Suspension)
\r\n\r\nविभागीय सूत्रों और रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों पर यह गाज अचानक नहीं गिरी है। बीते कुछ दिनों से मेरठ और गाजियाबाद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली महत्वपूर्ण 132 केवी (132 KV) की मुख्य ट्रांसमिशन लाइनों में लगातार बड़ी तकनीकी गड़बड़ियां सामने आ रही थीं। इन गड़बड़ियों ने पूरे सिस्टम की पोल खोल कर रख दी। अधिकारियों ने समय रहते न तो लाइनों का मेंटेनेंस किया और न ही फॉल्ट होने पर उन्हें त्वरित गति से ठीक करने की जहमत उठाई।
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निलंबन का मुख्य आधार बनीं ये दो बड़ी घटनाएं:
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- \r\n 19 मई 2026 की घटना (कंडक्टर टूटना): इस दिन 132 केवी की अत्यंत महत्वपूर्ण मोदीनगर-2 कंकरखेड़ा मुख्य लाइन पर अचानक भारी फॉल्ट आ गया और लाइन ट्रिप हो गई। जांच में पता चला कि टावर संख्या 33 और 34 के बीच का भारी-भरकम कंडक्टर (मुख्य बिजली का तार) जर्जर होने के कारण टूटकर नीचे गिर गया था। यदि समय रहते पेट्रोलिंग और मेंटेनेंस किया गया होता, तो इस बड़े हादसे को टाला जा सकता था।\r\n \r\n
- \r\n 20 मई 2026 की घटना (टावर क्षतिग्रस्त होना): इसके ठीक अगले ही दिन यानी 20 मई को लापरवाही की एक और बड़ी तस्वीर सामने आई। 132 केवी की मोदीनगर-2 बेदवापुर लाइन भी ओवरलोड या फॉल्ट के चलते ट्रिप हो गई। इस घटना में टावर संख्या 8 और 9 के बीच मिड स्पैन ज्वाइंट (Mid Span Joint) से न सिर्फ कंडक्टर टूट कर गिरा, बल्कि झटके के कारण टावर का ऊपरी हिस्सा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। यह ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के लिए एक बहुत बड़ा ढांचागत नुकसान था और इससे कई इलाकों की बिजली घंटों तक गुल रही।\r\n \r\n
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इन दोनों बड़े हादसों के बाद कॉरपोरेशन के उच्चाधिकारियों ने रिपोर्ट तलब की। जांच में सामने आया कि यह सीधे तौर पर संबंधित अधिशासी अभियंताओं (XEN) की घोर लापरवाही, मॉनिटरिंग की कमी और संवेदनहीनता का नतीजा है।
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बिजली संकट पर आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लेंगे बड़ी बैठक
\r\n\r\nराज्य में बेकाबू होती बिजली व्यवस्था, आए दिन टूटते तार, ट्रांसफॉर्मरों का फुंकना और जगह-जगह हो रहे जनता के उग्र धरने-प्रदर्शनों का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद कड़ा संज्ञान लिया है। बिजली विभाग की इस लचर कार्यप्रणाली से नाराज मुख्यमंत्री आज (शनिवार) सुबह 10:30 बजे राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में एक 'हाई-लेवल समीक्षा बैठक' (High-Level Review Meeting) करने जा रहे हैं।
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इस महत्वपूर्ण बैठक के मुख्य एजेंडे:
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- \r\n आपूर्ति और मांग की समीक्षा: प्रदेश भर में पड़ रही भीषण गर्मी के अनुपात में बिजली की कुल डिमांड और सप्लाई का डेटा जांचा जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n लोकल फॉल्ट और ट्रिपिंग पर लगाम: बार-बार होने वाले 'लोकल फॉल्ट' और ट्रांसमिशन लाइनों की ट्रिपिंग को रोकने के लिए ठोस रणनीति बनेगी।\r\n \r\n
- \r\n जवाबदेही तय करना: इस पूरी अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार संबंधित क्षेत्र के चीफ इंजीनियर (CE), सुपरिटेंडेंट इंजीनियर (SE) और एक्सईएन (XEN) स्तर के अफसरों की जवाबदेही सख्ती से तय की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n वीआईपी और ग्रामीण रोस्टर: रोस्टर के अनुरूप बिजली न मिलने की शिकायतों का निस्तारण और ग्रामीण क्षेत्रों में भी तय घंटों के अनुसार बिजली देना सुनिश्चित किया जाएगा।\r\n \r\n
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सूत्रों का कहना है कि आज की बैठक के बाद ऊर्जा मंत्री और मुख्यमंत्री के निर्देश पर कुछ और बड़े अधिकारियों (चीफ इंजीनियर स्तर के) पर भी निलंबन की तलवार लटक सकती है।
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आक्रोशित जनता कर रही पावर हाउसों का घेराव: 44 डिग्री में उबल रहा वेस्ट यूपी
\r\n\r\nइस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई के पीछे जनता का बढ़ता हुआ आक्रोश एक बहुत बड़ा कारण है। गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह से उत्तर भारत हीटवेव की चपेट में है। मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, शामली, और बागपत सहित वेस्ट यूपी के कई जिलों में पारा 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच झूल रहा है।
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ऐसी भीषण और जानलेवा गर्मी के बीच अघोषित कटौती (Unscheduled Power Cuts) ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। हालात यह हैं कि रात-रात भर बिजली गायब रहती है। पंखे और एसी शोपीस बन गए हैं और इन्वर्टर जवाब दे चुके हैं। छोटे बच्चे और बुजुर्ग गर्मी से बेहाल होकर बीमार पड़ रहे हैं।
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पानी की आपूर्ति भी बिजली न होने के कारण बुरी तरह बाधित हो रही है। इस त्राहिमाम की स्थिति के चलते आक्रोशित लोग आधी रात को सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। विभिन्न क्षेत्रों में लोग बिजली उपकेंद्रों (Power Houses) का घेराव कर रहे हैं और विद्युत अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी और धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। कई जगह तो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस तक को बुलाना पड़ रहा है।
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क्या अब सुधरेगी यूपी की बिजली व्यवस्था?
\r\n\r\nयूपी पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के एमडी मयूर माहेश्वरी द्वारा मेरठ और गाजियाबाद के एक्सईएन को सस्पेंड किया जाना एक स्वागत योग्य कदम है। यह उन तमाम लापरवाह अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो वातानुकूलित कमरों में बैठकर फील्ड की सच्चाई को नजरअंदाज करते हैं।
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हालाँकि, अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आज होने वाली हाई-लेवल बैठक के बाद जमीन पर क्या सुधार देखने को मिलते हैं। क्या उत्तर प्रदेश की जनता को इस भीषण गर्मी में सुचारू बिजली मिल पाएगी, या फिर जर्जर तारों और ओवरलोडेड ट्रांसफार्मरों के भरोसे ही यह पूरी गर्मियां काटनी पड़ेंगी? यह तो आने वाले कुछ दिन ही तय करेंगे, लेकिन फिलहाल शासन के इस सख्त एक्शन से ऊर्जा विभाग के उन अधिकारियों की नींद जरूर उड़ गई है, जो अपनी ड्यूटी में कोताही बरत रहे थे।
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