मेरठ/हस्तिनापुर (पॉलिटिकल डेस्क): महाभारत काल की ऐतिहासिक नगरी और उत्तर प्रदेश की राजनीति का 'बैरोमीटर' कही जाने वाली हस्तिनापुर विधानसभा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार चर्चा का विषय कोई चुनाव परिणाम या विकास कार्य नहीं, बल्कि खुद यहाँ के विधायक और योगी सरकार में जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक (Dinesh Khatik) का एक चौंकाने वाला बयान है।READ ALSO:-Rapid Rail Shocker: 'मर्यादा' की पटरी से उतरी नमो भारत! 'गंदी बात' का Part-2 वायरल होने पर NCRTC ने की भावुक अपील, वीडियो लीक करने वाला 'घर का भेदी' नपा
\r\n\r\n\r\n\r\n
एक स्कूल के वार्षिकोत्सव में महाभारत का मंचन देखते हुए मंत्री जी इतने भावुक हो गए कि उन्होंने माइक थामते ही हस्तिनापुर की पावन धरती को 'श्रापित' (Cursed Land) करार दे दिया। बात यहीं नहीं रुकी, उन्होंने भरे मंच से, संतों और जनता के सामने ऐलान कर दिया कि वह अब तीसरी बार यहाँ से चुनाव नहीं लड़ेंगे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
हालांकि, राजनीति में बोले गए शब्द कमान से निकले तीर की तरह होते हैं, जो वापस नहीं आते। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बनाना शुरू किया, मंत्री जी बैकफुट पर आ गए। 24 घंटे के भीतर ही उन्होंने एक स्पष्टीकरण पत्र (Clarification Letter) जारी किया, जिसे सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग किया गया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
विवाद की जड़: आखिर उस 5.30 मिनट के वीडियो में क्या है?
\r\n\r\nयह पूरा घटनाक्रम बुधवार का है। मेरठ जिले के खरखौदा क्षेत्र के पांची गांव स्थित एमएस हेरिटेज स्कूल (MS Heritage School) में 22वां वार्षिकोत्सव समारोह चल रहा था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, उत्तराखंड सरकार के राज्यमंत्री श्याम सिंह सैनी और यूपी के राज्यमंत्री दिनेश खटीक मौजूद थे।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों ने महाभारत के 'द्रौपदी चीरहरण' (Draupadi Cheerharan) का बेहद मार्मिक और जीवंत मंचन किया। इसे देखकर मंच पर बैठे दिनेश खटीक भाव-विभोर हो गए और जब उन्हें बोलने के लिए बुलाया गया, तो उनकी जुबान फिसल गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
मंत्री का वायरल बयान (विस्तार से): वायरल वीडियो में मंत्री दिनेश खटीक कहते हुए सुनाई दे रहे हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"जो महाभारत का एक दृश्य दिखाया है, वो अपने आप में अभिभूत करने वाला है। मैं इसको अपने वाक्यों से बयां नहीं कर सकता। ये भी एक संयोग है कि मुझे न गुरुजी, न आपने बुलाया। कल्कि अवतार जो भगवान हैं, जिनका मंदिर गुरुजी के हाथों बन रहा है, उन्होंने मुझे कहा कि हस्तिनापुर में जो वर्तमान विधायक हैं, उन्हें भी ये लीला दिखाने के लिए बुलाइए।"\r\n
इसके बाद उन्होंने हस्तिनापुर से जुड़े मिथक और अपने मन की बात कही:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"ये जो लीला आपने दिखाई है, हस्तिनापुर का जो दृश्य आपने दिखाया है, मैं उसी हस्तिनापुर से विधायक हूं। परम पूज्य गुरुजी, मन में एक बात आती रहती है। हस्तिनापुर सीट से एक बार कोई विधायक बनने के बाद दोबारा एमएलए नहीं बनता। मीडिया पूछती थी कि आप दोबारा चुनाव लड़ते हैं तो जीतेंगे या नहीं? तो हमने भी कहा कि ये श्रापित भूमि है, जिस पर द्रौपदी का श्राप है।"\r\n
\r\n\r\n
सबसे बड़ा और विवादास्पद ऐलान:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"कुदरती मेरे मन से एक बात निकल रही है कि मैं दो बार इस श्रापित भूमि से एमएलए बन गया। मुझे यहाँ से तीसरी बार एमएलए नहीं बनना, ये मन की बात आपको बता रहा हूं। मैं सारे पुराण पढ़ा हुआ हूं, भागवत भी पढ़ता हूं। जो व्यक्ति इन्हें पढ़ा होगा उसे पता होगा कि वो दृश्य क्या है? मुझे किसी भी हाल में इस श्रापित सीट से अब चुनाव नहीं लड़ना। दो बार तो यहां से जीत चुका हूं, लेकिन अब बस।"\r\n
\r\n\r\n
डैमेज कंट्रोल: 24 घंटे में आया 'सफाईनामा'
\r\n\r\nमंत्री दिनेश खटीक के बयान ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल पैदा कर दी। अपनी ही विधानसभा को 'श्रापित' कहना और चुनाव लड़ने से मना करना पार्टी नेतृत्व को नागवार गुजर सकता था। विवाद को बढ़ता देख मंत्री ने गुरुवार को अपने आधिकारिक लेटर पैड पर एक स्पष्टीकरण जारी किया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
लेटर में क्या सफाई दी गई?
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n मीडिया पर फोड़ा ठीकरा: हमेशा की तरह, राजनेताओं के पुराने पैंतरे का इस्तेमाल करते हुए राज्यमंत्री ने लिखा, "मेरे द्वारा कही गई कुछ बातों को मीडिया में संदर्भ से अलग और गलत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो सत्य नहीं है। हस्तिनापुर मेरी कर्मभूमि है और यहां की जनता के प्रति मेरी निष्ठा अटूट है।"\r\n \r\n
- \r\n 'श्राप' का असली संदर्भ: उन्होंने सफाई दी कि उन्होंने वर्तमान हस्तिनापुर को श्रापित नहीं कहा था, बल्कि ऐतिहासिक संदर्भ दिया था। उन्होंने लिखा, "बच्चों द्वारा मंचन के बाद मैंने चीरहरण की वीभत्स घटना का जिक्र करते हुए उस कालखंड में हुए पाप के संदर्भ में जमीन को श्रापित कहा था। जब दुशासन द्वारा द्रौपदी का चीरहरण किया जा रहा था, तो सभा में मौन रहने वालों को द्रौपदी ने श्राप दिया था। इसी कारण पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हस्तिनापुर को श्रापित भूमि माना जाता रहा है।"\r\n \r\n
- \r\n विकास और नेतृत्व की दुहाई: अपने पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को खुश करने की भी पूरी कोशिश की। उन्होंने लिखा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन और सीएम योगी के सशक्त नेतृत्व में हस्तिनापुर की जनता ने इतिहास रचते हुए प्रदेश में दूसरी बार प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई और हस्तिनापुर अब विकास की राह पर है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
हस्तिनापुर का वो 'मिथक' जिससे डरते हैं बड़े-बड़े नेता
\r\n\r\nदिनेश खटीक का यह डर और बयान पूरी तरह बेवजह नहीं है। हस्तिनापुर सीट को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में दो बड़े मिथक (Myths) दशकों से चले आ रहे हैं, जिसने अच्छे-अच्छे नेताओं का करियर डुबो दिया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
1. लखनऊ की सत्ता का रास्ता हस्तिनापुर से: राजनीतिक पंडितों का मानना है कि हस्तिनापुर सीट से जिस पार्टी का विधायक जीतता है, लखनऊ में उसी पार्टी की सरकार बनती है। यह मिथक अब तक सौ प्रतिशत सच साबित हुआ है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n 2007: योगेश वर्मा (BSP) जीते -> मायावती मुख्यमंत्री बनीं।\r\n \r\n
- \r\n 2012: प्रभुदयाल वाल्मीकि (SP) जीते -> अखिलेश यादव की सरकार बनी।\r\n \r\n
- \r\n 2017: दिनेश खटीक (BJP) जीते -> योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी।\r\n \r\n
- \r\n 2022: दिनेश खटीक (BJP) फिर जीते -> योगी 2.0 सरकार बनी।\r\n \r\n
\r\n\r\n
2. 'दोबारा न जीतने' का श्राप: दूसरा और सबसे डरावना मिथक यह था कि हस्तिनापुर से कोई भी विधायक लगातार दूसरी बार चुनाव नहीं जीत पाता। आजादी के बाद से 2017 तक यहाँ कोई भी नेता अपनी विधायकी रिपीट नहीं कर पाया था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n रिकॉर्ड तोड़ा, पर डर बरकरार: 2022 के चुनाव में दिनेश खटीक ने इस मिथक को तोड़ा और लगातार दूसरी बार जीत हासिल की।\r\n \r\n
\r\n\r\n
अपने भाषण में खटीक ने इसी का जिक्र करते हुए कहा था:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"जब यहाँ कोई दोबारा नहीं जीत पाया, तो दिनेश खटीक की क्या औकात थी? लेकिन देश में मोदी और प्रदेश में योगी जैसे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने मेरी नैया पार लगाई और मुझे दोबारा विधायक बनाया।"\r\n
\r\n\r\n
राजनीतिक विश्लेषण: क्या मंत्री सीट बदलने की फिराक में हैं?
\r\n\r\nदिनेश खटीक के इस बयान को सिर्फ 'भावुकता' मान लेना जल्दबाजी होगी। राजनीतिक गलियारों में इसके कई गहरे मायने निकाले जा रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n एंटी-इनकंबेंसी का डर: क्या मंत्री जी को जमीनी स्तर पर विरोध का आभास हो गया है? हस्तिनापुर में लगातार दो बार विधायक रहने के बाद तीसरी बार जनता के बीच जाना किसी भी नेता के लिए चुनौती होती है। स्थानीय स्तर पर नाराजगी की खबरें अक्सर आती रहती हैं।\r\n \r\n
- \r\n सुरक्षित सीट की तलाश: आचार्य प्रमोद कृष्णम के सामने "तीसरी बार न लड़ने" का ऐलान करना इस ओर इशारा करता है कि शायद वे अगले चुनाव (2027) में किसी सुरक्षित सीट (Safe Seat) की तलाश में हैं। वे पहले ही माहौल बनाकर आलाकमान को संकेत देना चाहते हैं।\r\n \r\n
- \r\n पुराने संघी परिवार का नाता: दिनेश खटीक का परिवार पुराने समय से संघ (RSS) से जुड़ा है। उनके पिता संघ के कार्यकर्ता थे और भाई नितिन खटीक जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। दिनेश खटीक मवाना के फलावदा के रहने वाले हैं और ईंट भट्ठे का व्यवसाय करते हैं। संघ की पृष्ठभूमि होने के कारण वे जानते हैं कि संगठन कब टिकट काट सकता है, इसलिए वे पहले ही सचेत हो रहे हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
विपक्ष को मिला 'बैठे-बिठाए' मुद्दा
\r\n\r\nमंत्री के इस बयान ने विपक्ष को जोरदार हमला करने का मौका दे दिया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि "मंत्री जी को अपनी हार अभी से दिखने लगी है। विकास के नाम पर कुछ किया नहीं, इसलिए अब वे श्राप और पुराणों का सहारा लेकर मैदान छोड़ने की भूमिका (Ground) तैयार कर रहे हैं।"\r\n \r\n
- \r\n स्थानीय लोगों में भी चर्चा है कि जिस जनप्रतिनिधि को उन्होंने दो बार चुना, अगर वही उनकी धरती को 'श्रापित' कहेगा, तो इससे क्षेत्र की छवि खराब होती है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
क्या टिकेगा संकल्प या फिर यू-टर्न?
\r\n\r\nदिनेश खटीक ने पत्र लिखकर सफाई तो दे दी है, लेकिन "तीसरी बार चुनाव न लड़ने" वाली बात को उन्होंने पत्र में स्पष्ट रूप से खारिज नहीं किया है। उन्होंने सिर्फ 'संदर्भ गलत लेने' की बात कही है। यह सवाल अभी भी बरकरार है कि क्या उन्होंने वाकई चुनाव न लड़ने का मन बना लिया है?
\r\n\r\n\r\n\r\n
हस्तिनापुर की जनता और भाजपा संगठन, दोनों ही मंत्री जी के अगले कदम पर नजर गड़ाए हुए हैं। क्या 2027 में भाजपा उन्हें फिर से हस्तिनापुर के रण में उतारेगी या मंत्री जी अपनी सीट बदलने में कामयाब हो जाएंगे? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल 'श्रापित हस्तिनापुर' का जिन्न फिर से बोतल से बाहर आ गया है।
Sabse pehle comment karne wale banein.