मेरठ, 4 अक्टूबर 2025: समाजवादी पार्टी के फायरब्रांड विधायक अतुल प्रधान ने शनिवार को एक साथ दो मोर्चों पर योगी सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ हल्ला बोला। एक तरफ उन्होंने बरेली जाने से रोके जाने पर सरकार पर पूरे उत्तर प्रदेश में दंगे कराने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया, तो दूसरी तरफ मेरठ PWD दफ्तर पहुंचकर टूटी सड़कों और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अधिकारियों की जमकर क्लास ली।READ ALSO:-इस दिवाली रॉकेट बन जाएगा मेरठ! नमो भारत और मेट्रो का 'डबल गिफ्ट' तैयार, जानें किराया, स्टेशन और शाही सुविधाओं की A-Z डिटेल
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"तानाशाहों की सरकार, दंगे कराना चाहती है"
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सपा विधायक अतुल प्रधान ने बरेली में हुई हिंसा का सच जानने जा रहे सपा नेताओं और सांसदों को रोके जाने की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश में तानाशाहों की सरकार चल रही है। ये सरकार बरेली का सच सामने नहीं आने देना चाहती। ये हिंदू-मुसलमान को भड़काकर और दंगे कराकर उसी के दम पर सत्ता में बने रहना चाहते हैं।"
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उन्होंने आगे कहा, "हमारे नेता सिर्फ यह पता लगाने जा रहे थे कि आखिर बरेली में झगड़ा क्यों हुआ, लेकिन सरकार सच्चाई से डरती है। यह तानाशाही है और इसी के बल पर वे अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं।" उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में अखिलेश यादव के नेतृत्व में यूपी में सरकार बनेगी और प्रदेश खुशहाली की ओर लौटेगा।
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PWD दफ्तर में अफसरों से सीधी टक्कर
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राजनीतिक आरोपों के बाद अतुल प्रधान सीधे मेरठ PWD कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र सरधना और मवाना की जर्जर सड़कों का मुद्दा उठाया। दफ्तर में मुख्य अभियंता अजय शर्मा और अन्य अधिकारियों के साथ उनकी तीखी बहस हुई, जिससे कुछ देर के लिए तनाव का माहौल बन गया।
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विधायक ने आरोप लगाया, "मेरे पूरे क्षेत्र की सड़कें उखड़ी पड़ी हैं। जो नई सड़कें बनी भी हैं, वे सब भ्रष्टाचार में डूबी हुई हैं। मवाना का एक एक्सईएन (XEN) है, जिसने पूरे इलाके में विवाद करा रखा है। हमारा गन्ना क्षेत्र है, जहां काली सड़क पर पीसी (पेंटेड सीमेंट कंक्रीट) डालनी थी, कहीं गड्ढे भरने थे, लेकिन हर जगह जनता परेशान है। अफसर AC कमरों से बाहर निकलकर हकीकत देखें और सरकारी पैसे का बंदरबांट बंद करें।"
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मुख्य अभियंता अजय शर्मा ने विधायक को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा कि सभी कार्य योजना के अनुसार चल रहे हैं और जल्द ही सुधार दिखाई देगा। हालांकि, विधायक इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। अंत में, अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि इन सभी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
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