नई दिल्ली/मेरठ: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने संसद के उच्च सदन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मेरठ से जुड़े दो बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया है। उन्होंने दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के शेष गलियारे को यात्रियों के लिए तत्काल खोलने की मांग की, साथ ही गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किए जा रहे औद्योगिक क्षेत्रों में प्लॉटों के विशाल आकार को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।READ ALSO:-पश्चिमी यूपी का 'महासंग्राम': हाई कोर्ट बेंच के लिए कल 'मेरठ बंद' का शंखनाद, 50 साल पुरानी मांग पर 22 जिलों में चक्का जाम की तैयारी
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RRTS: 'खाली ट्रेनें दौड़ रही हैं, जनता जाम में फंसी है'
\r\n\r\nसंसद में अपनी बात रखते हुए डॉ. वाजपेयी ने केंद्र सरकार का ध्यान देश के पहले आरआरटीएस प्रोजेक्ट (नमो भारत ट्रेन) की ओर आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली और मेरठ के बीच कुल 82 किलोमीटर लंबा आरआरटीएस ट्रैक बनाया गया है। इसमें से 56 किलोमीटर का हिस्सा पहले ही सफलतापूर्वक चालू हो चुका है और यात्री इसकी सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।
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सांसद ने चिंता जताते हुए कहा कि मेरठ में शताब्दी नगर से आगे मोदीपुरम तक का शेष हिस्सा, जिसके स्टेशन पूरी तरह बनकर तैयार हैं और जहां ट्रायल रन भी पूरा हो चुका है, उसे अभी तक आम जनता के लिए नहीं खोला गया है। उन्होंने सदन को बताया कि "शेष भाग पर दिन में चार बार खाली ट्रेनें ट्रायल के लिए आती-जाती रहती हैं। इसका सीधा अर्थ है कि तकनीकी रूप से सब कुछ तैयार है।"
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डॉ. वाजपेयी ने मांग की कि जब ट्रायल पूरे हो चुके हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर रेडी है, तो यात्रियों के लिए सेवा शुरू करने में देरी क्यों की जा रही है? उन्होंने कहा कि मेरठ महानगर और आसपास के लाखों लोग इस सेवा के पूरी तरह शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके शुरू होने से न केवल दिल्ली-मेरठ के बीच यात्रा का समय बचेगा, बल्कि मेरठ शहर को पुरानी दिल्ली रोड और अन्य इलाकों में लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से भी बड़ी राहत मिलेगी।
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गंगा एक्सप्रेसवे: 'बड़े प्लॉट यानी छोटे उद्यमियों का शोषण'
\r\n\r\nआरआरटीएस के अलावा, डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने पश्चिमी यूपी की एक और महत्वाकांक्षी परियोजना, 'गंगा एक्सप्रेसवे' से जुड़े एक नीतिगत मुद्दे पर सरकार का ध्यान खींचा। मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा किया जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी के साथ-साथ यूपीडा द्वारा एक्सप्रेसवे के किनारे बड़े पैमाने पर औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित किए जा रहे हैं।
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सांसद ने इन प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों में भूखंडों (Plots) के विशाल आकार पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि यूपीडा द्वारा जो प्लॉट निकाले गए हैं, उनके आकार बहुत बड़े हैं। उदाहरण के लिए, 15,000 वर्ग मीटर के 10 प्लॉट, 20,000 वर्ग मीटर के 26 प्लॉट, 33,400 वर्ग मीटर के 24 प्लॉट और यहां तक कि 2 लाख वर्ग मीटर तक के 22 प्लॉट शामिल हैं।
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MSME सेक्टर के लिए मांगी संजीवनी
\r\n\r\nडॉ. वाजपेयी ने आशंका व्यक्त की कि इतने बड़े आकार के भूखंडों को खरीदना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर के उद्यमियों के बस की बात नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि "इतने बड़े भूखंडों को केवल बड़े पूंजीपति या रियल एस्टेट कारोबारी ही खरीद पाएंगे। इसके बाद वे लोग इन बड़े प्लॉटों की 'सब-प्लॉटिंग' करेंगे और उन्हें महंगे दामों पर छोटे उद्यमियों को बेचेंगे।"
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उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया सीधे तौर पर लघु उद्यमियों और MSME सेक्टर के शोषण का कारण बनेगी। इससे औद्योगिक विकास की मूल भावना ही आहत होगी, क्योंकि पश्चिमी यूपी में MSME सेक्टर अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
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सरकार से सीधी मांग
\r\n\r\nअपने संबोधन के अंत में राज्यसभा सांसद ने सरकार से ठोस मांग की। उन्होंने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक भूखंडों के आकार को छोटा किया जाना चाहिए। सरकार ऐसी नीति बनाए कि ये छोटे भूखंड सीधे सरकारी नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत वास्तविक MSME इकाइयों को आवंटित किए जाएं। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और छोटे उद्यमी शोषण से बच सकेंगे, जिससे क्षेत्र में वास्तविक औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.