मेरठ, मंगलवार। मेरठ नगर निगम जल्द ही 100 करोड़ रुपये का म्युनिसिपल बॉन्ड जारी कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेगा, जिससे शहर की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक, सीवर और पानी की निकासी का स्थायी समाधान किया जाएगा। यह घोषणा 'समर्थ उत्तर प्रदेश–विकसित उत्तर प्रदेश 2047' अभियान के तहत मेरठ में आयोजित दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम के समापन पर की गई।READ ALSO:-देहरादून में फटा बादल, टपकेश्वर महादेव मंदिर में घुसा सैलाब, सड़कें बहीं; PM मोदी ने CM धामी से की बात
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प्रमुख सचिव (नगर विकास) अमृत अभिजात और सेवानिवृत्त मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र की उपस्थिति में हुए इस मंथन में शहर को 2047 तक एक स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने का पूरा खाका तैयार किया गया।
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शिक्षा और युवाओं पर रहेगा फोकस
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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों और प्रबुद्धजनों ने शहर के विकास के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
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    रिसर्च और इनोवेशन पर जोर: सीसीएसयू की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने युवाओं को प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया की उपलब्धियों को आगे बढ़ाने के लिए अब रिसर्च, इनोवेशन, ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद) और पर्यावरण-आधारित विकास पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
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    60 मॉडल स्कूल होंगे तैयार: मुख्य विकास अधिकारी (CDO) नूपूर गोयल ने बताया कि जिले में शिक्षा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार हुआ है और इस वर्ष 60 स्कूलों को 'मॉडल स्कूल' के रूप में विकसित किया जाएगा।
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छात्रों और शिक्षकों ने व्यावसायिक प्रशिक्षण बढ़ाने, हस्तिनापुर में पर्यटन को बढ़ावा देने और ओडीओपी को उच्च शिक्षा से जोड़ने जैसे सुझाव भी दिए।
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स्थानीय समस्याओं पर भी हुई चर्चा
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इस अवसर पर महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने प्रमुख सचिव के समक्ष शहर में गृहकर और कूड़ा निस्तारण से जुड़ी समस्याओं को उठाया, जिस पर अधिकारियों ने समाधान का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के समापन पर जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
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यह दो दिवसीय संवाद शहर की हवा, पानी, सड़क और सफाई व्यवस्था को सुधारकर मेरठ को वर्ष 2047 तक एक आत्मनिर्भर और स्मार्ट शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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