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मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में एक बार फिर आतंकी गतिविधियों की आहट ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। यहां के घनी आबादी वाले इलाके बनियापाड़ा (कोतवाली क्षेत्र) में रहने वाले एक फल कारोबारी के बेटे, उजैद कुरैशी का नाम एक खौफनाक अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश में सामने आया है। यूपी एटीएस (UP ATS) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। उजैद कुरैशी कोई मामूली अपराधी नहीं, बल्कि अलकायदा (Al-Qaeda) जैसे वैश्विक आतंकी संगठन का एक सक्रिय सदस्य बताया जा रहा है, जो युवाओं का 'ब्रेनवॉश' करने में माहिर है।READ ALSO:-यूपी में वोटरों पर 'कागज' का संकट: 2003 की लिस्ट में नाम नहीं तो 'निवास प्रमाण पत्र' भी बेकार; आयोग ने कहा- 'सिर्फ ये 11 सबूत चलेंगे'
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इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको इस पूरे ऑपरेशन की एक-एक डिटेल बताएंगे। हम जानेंगे कि कैसे एक वॉट्सऐप ग्रुप की चैट ने इस 'स्लीपर सेल' का पर्दाफाश किया, 18 जनवरी की रात उजैद के घर पर क्या हुआ, और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 113 आखिर क्या है, जिसने इस मामले को इतना गंभीर बना दिया है।
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18 जनवरी की वो रात: छापेमारी, नोटिस
\r\n\r\n18 जनवरी, 2026 की रात मेरठ के बनियापाड़ा इलाके में सन्नाटा पसरा था, तभी अचानक पुलिस की गाड़ियों के सायरन ने खलबली मचा दी। यह कोई सामान्य पुलिस रेड नहीं थी। इसमें उत्तर प्रदेश एटीएस के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल टीम भी शामिल थी। उनका निशाना था - मोहम्मद उजैद कुरैशी।
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छापेमारी का मंजर: पुलिस टीम सीधे उजैद के घर पहुंची। घर को चारों तरफ से घेर लिया गया। मकसद था उजैद को गिरफ्तार करना। लेकिन किस्मत से या मुखबिरी से, उजैद उस वक्त घर पर मौजूद नहीं था। टीम ने घर का कोना-कोना छान मारा। उजैद तो नहीं मिला, लेकिन पुलिस ने उसके परिवार के सदस्यों से कड़ाई से पूछताछ की। जांच एजेंसी ने उजैद के दो भाइयों को हिरासत में लिया। हालांकि, पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया, क्योंकि शुरुआती जांच में उनकी संलिप्तता नहीं पाई गई थी।
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नोटिस चस्पा और आरोपी की वापसी: जब उजैद हाथ नहीं आया, तो जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उसके घर के मुख्य द्वार पर एक आधिकारिक नोटिस चस्पा कर दिया। इस नोटिस में उसे जम्मू के बाहू फोर्ट थाने में पेश होने का आदेश दिया गया था।
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CCTV में कैद हुआ फरार होने का लाइव सीन: इस पूरी घटना का सबसे नाटकीय पहलू तब सामने आया जब पुलिस के जाने के कुछ ही देर बाद उजैद अपनी स्कूटी से घर पहुंचा। एक वीडियो फुटेज (जो अब सोशल मीडिया पर वायरल है) में देखा जा सकता है कि उजैद बेफिक्री से अपनी स्कूटी लेकर गली में आता है। जैसे ही वह अपने घर के दरवाजे पर पहुंचता है, उसकी नजर वहां चिपके पुलिस के नोटिस पर पड़ती है। नोटिस पढ़ते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती है। वह समझ जाता है कि उसका राज खुल चुका है और एजेंसियां उसके पीछे हैं। बिना एक पल गंवाए, वह घर के अंदर जाने के बजाय स्कूटी घुमाता है और वहां से रफूचक्कर हो जाता है। यह पूरा वाकया पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया, जो अब जांच का अहम हिस्सा है।
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साजिश का पर्दाफाश: वॉट्सऐप ग्रुप और 'फिदायीन' प्लान
\r\n\r\nउजैद कुरैशी पुलिस के रडार पर अचानक नहीं आया। इसके पीछे महीनों की लंबी सर्विलांस और खुफिया जानकारी थी। इसकी जड़ें जम्मू-कश्मीर में चल रहे एक बड़े एंटी-टेरर ऑपरेशन से जुड़ी हैं।
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एक गिरफ्तारी से खुली पूरी पोल: कुछ दिन पहले, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटी में चल रहे एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। वहां से एक संदिग्ध युवक को गिरफ्तार किया गया था। जब साइबर सेल ने उस युवक के मोबाइल का डेटा रिकवर किया, तो एक संदिग्ध वॉट्सऐप ग्रुप (WhatsApp Group) सामने आया। यह ग्रुप सामान्य बातचीत के लिए नहीं, बल्कि "जिहाद" और "शहादत" के नाम पर युवाओं को भड़काने के लिए बनाया गया था।
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उजैद का रोल: जांच में पता चला कि मेरठ का उजैद कुरैशी भी इसी ग्रुप का एक सक्रिय सदस्य (Admin/Active Member) था।
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- \r\n फिदायीन हमले की साजिश: इस ग्रुप चैट में सबसे खौफनाक बात जो सामने आई, वह थी भारतीय सेना (Indian Army) पर सुसाइड अटैक यानी फिदायीन हमले की प्लानिंग। ग्रुप में नक्शे, टाइमिंग और सुरक्षा बलों के मूवमेंट की जानकारी साझा की जा रही थी।\r\n \r\n
- \r\n ब्रेनवॉश एक्सपर्ट: एटीएस सूत्रों का दावा है कि उजैद का काम नए लड़कों को जोड़ना और उनका ब्रेनवॉश करना था। वह उन्हें कट्टरपंथी साहित्य और वीडियो भेजकर जेहाद के लिए तैयार करता था। उसे 'रिक्र्यूटर' (Recruiter) की भूमिका दी गई थी।\r\n \r\n
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सिर्फ एक मैसेज ने फंसाया: हैरानी की बात यह है कि उजैद ने इस ग्रुप में बहुत ज्यादा चैटिंग नहीं की थी। उसने केवल एक या दो मैसेज ही किए थे, लेकिन वे मैसेज इतने आपत्तिजनक और देश विरोधी थे कि एटीएस के लिए उसे ट्रैक करना जरूरी हो गया। वह 'साइलेंट मोड' में रहकर काम करने वाला खतरनाक गुर्गा था।
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उजैद की कुंडली: फल कारोबारी से आतंकी बनने तक
\r\n\r\nपारिवारिक पृष्ठभूमि: मोहम्मद उजैद कुरैशी, मोहम्मद साजिद कुरैशी का बेटा है। उसका परिवार मेरठ की मंडी में फलों का बड़ा कारोबार करता है। उसके पिता फल के आढ़ती हैं और जम्मू-कश्मीर से ट्रक भरकर फल (सेब आदि) मंगवाते हैं। उजैद भी अपने पिता के साथ इसी कारोबार में हाथ बंटाता था। पड़ोसियों की नजर में वह एक सीधा-साधा व्यापारी था, लेकिन इस 'व्यापारी' छवि के पीछे एक आतंकी चेहरा छिपा था।
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नवंबर 2024 का कश्मीर दौरा: एटीएस की जांच में एक अहम कड़ी नवंबर 2024 का वह समय है, जब उजैद 'काम के सिलसिले' में जम्मू-कश्मीर गया था।
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- \r\n परिवार का कहना है कि वह फलों के ऑर्डर और पेमेंट के लिए गया था।\r\n \r\n
- \r\n लेकिन जांच एजेंसियों का मानना है कि इस बिज़नेस ट्रिप की आड़ में उसने वहां आतंकी कमांडरों और हैंडलर्स से मुलाकात की।\r\n \r\n
- \r\n यहीं पर उसे अलकायदा के स्लीपर सेल (Sleeper Cell) के रूप में काम करने की ट्रेनिंग और निर्देश मिले। उसने वहां संदिग्ध तत्वों के साथ गुप्त बैठकें कीं और मेरठ लौटकर अपने मिशन में जुट गया।\r\n \r\n
BNS 113: वह नया कानून जो उजैद को ले डूबेगा
\r\n\r\nउजैद कुरैशी के खिलाफ जम्मू-कश्मीर के बाहू फोर्ट थाने में जो मुकदमा दर्ज हुआ है, उसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 113 लगाई गई है। यह जानना बेहद जरूरी है कि यह धारा क्या है और यह पुराने कानूनों से कितनी अलग और सख्त है।
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धारा 113 (आतंकवादी कृत्य): देश में 1 जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानूनों (BNS) में धारा 113 आतंकवाद (Terrorism) को परिभाषित करती है। पहले इसके लिए UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) ही मुख्य हथियार था, लेकिन अब सामान्य दंड संहिता में भी आतंकवाद को विशेष जगह दी गई है।
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इस धारा के तहत क्या अपराध आते हैं?
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- \r\n देश की एकता और अखंडता को खतरा: कोई भी कृत्य जो भारत की संप्रभुता, एकता या आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डालता है।\r\n \r\n
- \r\n जनता में आतंक फैलाना: बम, डायनामाइट, घातक हथियार, या किसी भी अन्य माध्यम से लोगों में डर का माहौल पैदा करना।\r\n \r\n
- \r\n संपत्ति का नुकसान: सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना।\r\n \r\n
- \r\n साजिश और भर्ती: आतंकी गतिविधियों के लिए लोगों को भर्ती करना, ट्रेनिंग देना या ऐसी साजिश में शामिल होना। उजैद पर यही आरोप मुख्य रूप से है।\r\n \r\n
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सजा का प्रावधान: BNS 113 के तहत सजा बेहद सख्त है:
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- \r\n यदि आतंकी कृत्य से किसी की मृत्यु होती है, तो मृत्युदंड (Death Penalty) या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।\r\n \r\n
- \r\n साजिश रचने या मदद करने के मामले में भी कम से कम 5 साल की कैद से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।\r\n \r\n
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उजैद का मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि उस पर 'फिदायीन हमले' की साजिश का हिस्सा होने का आरोप है, जो सीधे तौर पर 'Waging War Against State' (राज्य के खिलाफ युद्ध) की श्रेणी में आता है।
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डिजिटल जिहाद: वॉट्सऐप और टेलीग्राम बने नए हथियार
\r\n\r\nउजैद कुरैशी का मामला एक बड़े खतरे की ओर इशारा करता है—डिजिटल जिहाद। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह चिंता का विषय है कि आतंकी संगठन अब फिजिकल ट्रेनिंग कैंपों के बजाय 'वर्चुअल रिक्रूटमेंट' पर जोर दे रहे हैं।
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- \r\n एन्क्रिप्टेड ऐप्स का सहारा: वॉट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल और अन्य एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल आतंकियों द्वारा सेफ कम्युनिकेशन के लिए किया जा रहा है। उजैद भी ऐसे ही एक ग्रुप का हिस्सा था।\r\n \r\n
- \r\n स्लीपर सेल्स का नया रूप: पहले स्लीपर सेल्स जमीन पर छिपकर रहते थे। अब वे अपने घरों में रहकर, नॉर्मल लाइफ जीते हुए (जैसे उजैद फल बेच रहा था) ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन का काम करते हैं। इसे 'White Collar Terrorism' भी कहा जाने लगा है।\r\n \r\n
- \r\n युवाओं को निशाना बनाना: उजैद जैसे 'ब्रेनवॉश एक्सपर्ट्स' का काम होता है कि वे सोशल मीडिया पर ऐसे युवाओं की पहचान करें जो धर्म या राजनीति को लेकर भावुक हैं, और फिर धीरे-धीरे उन्हें देश के खिलाफ भड़काएं।\r\n \r\n
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मेरठ कनेक्शन: क्यों बार-बार उछलता है नाम?
\r\n\r\nमेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का नाम आतंकी गतिविधियों में आना कोई नई बात नहीं है। यह क्षेत्र संवेदनशीलता के लिहाज से हमेशा पुलिस के रडार पर रहता है।
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- \r\n पुराना इतिहास: इससे पहले भी मेरठ से लश्कर-ए-तैयबा और इंडियन मुजाहिदीन के स्लीपर सेल्स पकड़े जा चुके हैं।\r\n \r\n
- \r\n सत्येंद्रवाल और कलीम: अतीत में मेरठ से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने वाले एजेंट भी गिरफ्तार हुए हैं।\r\n \r\n
- \r\n लॉजिस्टिक्स हब: पश्चिमी यूपी की भौगोलिक स्थिति और दिल्ली से निकटता इसे आतंकियों के लिए छिपने और लॉजिस्टिक्स (हथियार, पैसा) मूव करने के लिए एक मुफीद जगह बनाती है।\r\n \r\n
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उजैद की गिरफ्तारी (अगर होती है) से इस नेटवर्क की कई और कड़ियां खुलने की उम्मीद है। एटीएस को शक है कि मेरठ में उजैद अकेला नहीं है; उसके जैसे और भी 'हैंडलर' हो सकते हैं जो जम्मू-कश्मीर के मॉड्यूल को यूपी से मदद पहुंचा रहे हों।
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पुलिस की रणनीति: अब आगे क्या?
\r\n\r\nउजैद के फरार होने के बाद, यूपी एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।
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- \r\n सर्विलांस और छापेमारी: उजैद के मोबाइल नंबर की आखिरी लोकेशन और उसके कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) के आधार पर उसके रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां छापेमारी की जा रही है।\r\n \r\n
- \r\n लुकआउट नोटिस: संभावना है कि उजैद देश छोड़कर भागने की कोशिश कर सकता है, इसलिए हवाई अड्डों और सीमाओं पर अलर्ट जारी किया जा सकता है।\r\n \r\n
- \r\n फाइनेंशियल ट्रेल: पुलिस उजैद और उसके पिता के बैंक खातों की भी जांच कर रही है। यह देखा जा रहा है कि 'फलों के व्यापार' के नाम पर कहीं 'टेरर फंडिंग' (Terror Funding) तो नहीं हो रही थी। क्या जम्मू से आने वाले पैसों का इस्तेमाल किसी और काम में हो रहा था?\r\n \r\n
- \r\n 24 जनवरी की डेडलाइन: नोटिस के मुताबिक उजैद को 24 जनवरी तक बाहू फोर्ट थाने में पेश होना था। उसके पेश न होने पर कोर्ट से गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करवाकर उसकी संपत्ति कुर्की की कार्रवाई शुरू की जाएगी।\r\n \r\n
मेरठ के उजैद कुरैशी का मामला यह साबित करता है कि आतंकवाद का चेहरा बदल चुका है। अब आतंकी बंदूक लेकर सीमा पार से नहीं, बल्कि स्मार्टफोन के जरिए हमारे घरों में घुस रहे हैं। एक फल बेचने वाला युवक, जो दिन में सामान्य जीवन जीता है, रात के अंधेरे में सेना पर हमले की साजिश रच रहा था—यह सच्चाई डराने वाली है।
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यूपी एटीएस का यह खुलासा और 72 घंटे के भीतर की गई कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन उजैद का फरार होना एक चुनौती भी है। सुरक्षा एजेंसियों को जल्द से जल्द उसे पकड़ना होगा ताकि यह पता चल सके कि इस साजिश की जड़ें कितनी गहरी हैं और 'ब्रेन्वॉश' किए गए कितने और युवा समाज के बीच 'टाइम बम' बनकर घूम रहे हैं। बीएनएस की धारा 113 का कड़ाई से पालन इस बात का संकेत है कि सरकार अब ऐसे तत्वों को बख्शने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
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यूपी एटीएस ने खुलासा किया है कि मेरठ का उजैद कुरैशी अलकायदा से जुड़ा है और इंडियन आर्मी पर फिदायीन हमले की साजिश रचने वाले वॉट्सऐप ग्रुप में शामिल था। 18 जनवरी को रेड पड़ने पर वह घर पर नहीं मिला, लेकिन बाद में नोटिस देखकर फरार हो गया। उस पर BNS की धारा 113 (आतंकवाद) के तहत केस दर्ज है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
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Sabse pehle comment karne wale banein.