मेरठ (Meerut): उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने आर्थिक अपराधों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए मेरठ में एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया है। एसटीएफ ने Meerut GST Fraud (मेरठ जीएसटी घोटाला) के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए करीब 500 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ने का दावा किया है।READ ALSO:-Meerut College Horror: शिक्षा के मंदिर में 'लेडी डॉन' का आतंक; MIET कॉलेज के ग्राउंड में छात्रा को बेल्ट और लात-घूसों से पीटा, वीडियो वायरल
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इस कार्रवाई में एसटीएफ ने मेरठ के एक बड़े स्क्रैप कारोबारी समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बोगस फर्में बनाता था और बिना माल की आपूर्ति किए ही फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल (E-Way Bill) जारी कर सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान पहुंचा रहा था। इनका नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के 20 राज्यों में फैला हुआ था।
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500 करोड़ का खेल: कैसे हुआ खुलासा?
\r\n\r\nएएसपी एसटीएफ बृजेश कुमार सिंह के अनुसार, इस पूरे मामले की जड़ें साल 2024 से जुड़ी हैं। 2024 में आगरा के लोहामंडी थाने में जीएसटी चोरी का एक मुकदमा दर्ज किया गया था। उस मामले की जांच करते हुए एसटीएफ की टीम को सुराग मिले कि इस रैकेट के तार पश्चिमी उत्तर प्रदेश, खास तौर पर मेरठ और गाजियाबाद से जुड़े हुए हैं।
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जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि यह गिरोह 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' (ITC) का अवैध लाभ उठाने के लिए एक सुनियोजित साजिश के तहत काम कर रहा था। एसटीएफ ने लंबी सर्विलांस और डेटा माइनिंग के बाद शुक्रवार को मेरठ में छापा मारकर इस गिरोह के सरगना और उसके साथियों को दबोच लिया।
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कैसे काम करता था यह गिरोह? (Modus Operandi)
\r\n\r\nMeerut GST Fraud का यह मामला बेहद शातिराना तरीके से अंजाम दिया जा रहा था। एसटीएफ की पूछताछ में आरोपियों ने अपने काम करने के तरीके (Modus Operandi) का खुलासा किया है, जो किसी कॉर्पोरेट जासूसी फिल्म से कम नहीं है।
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- \r\n बोगस फर्में (Bogus Firms): आरोपी गरीब और जरूरतमंद लोगों के आधार कार्ड और पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल करके जीएसटी पोर्टल पर फर्जी फर्में रजिस्टर कराते थे। इन फर्मों का जमीनी स्तर पर कोई अस्तित्व नहीं होता था।\r\n \r\n
- \r\n फर्जी बिलिंग: फर्म बनने के बाद, ये लोग बिना किसी माल (Goods) की खरीद-फरोख्त किए ही करोड़ों रुपये के फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल काट देते थे।\r\n \r\n
- \r\n व्हाट्सएप पर डील: गिरोह के सरगना व्हाट्सएप के जरिए वास्तविक फर्मों से जीएसटी नंबर और माल का विवरण मांगते थे।\r\n \r\n
- \r\n मनी ट्रेल (Money Trail): फर्जीवाड़े को असली दिखाने के लिए ये लोग बैंकिंग चैनलों का भी इस्तेमाल करते थे। बोगस फर्मों के बैंक खातों के जरिए रकम का ट्रांसफर दिखाया जाता था ताकि टैक्स अधिकारियों को शक न हो।\r\n \r\n
- \r\n ITC का खेल: अंत में, इन फर्जी बिलों का इस्तेमाल असली फर्में सरकार से 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' (ITC) क्लेम करने के लिए करती थीं, जिससे सरकार को सीधे तौर पर राजस्व का नुकसान होता था।\r\n \r\n
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मास्टरमाइंड दिलशाद मलिक और उसके 3 ऑफिस
\r\n\r\nइस पूरे काले कारोबार का मुख्य सूत्रधार दिलशाद मलिक है, जो मेरठ के न्यू इस्लाम नगर का रहने वाला है। वह पेशे से एक स्क्रैप कारोबारी (कबाड़ी) बताया जा रहा है। जांच में पता चला है कि दिलशाद मलिक मेरठ और गाजियाबाद में तीन अलग-अलग ऑफिस संचालित कर रहा था।
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ये ऑफिस बाहर से देखने में सामान्य लगते थे, लेकिन अंदर यहां जीएसटी चोरी की पूरी स्क्रिप्ट लिखी जाती थी। यहीं से बैठकर गिरोह के सदस्य लैपटॉप और कंप्यूटर के जरिए फर्जी बिल जनरेट करते थे और पूरे नेटवर्क को कंट्रोल करते थे।
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20 राज्यों तक फैला था मकड़जाल
\r\n\r\nएसटीएफ की जांच में पता चला है कि Meerut GST Fraud का यह नेटवर्क दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, पश्चिम बंगाल समेत करीब 20 राज्यों में फैला हुआ था। ये लोग एक राज्य से दूसरे राज्य में फर्जी बिलिंग (Bill Trading) करते थे ताकि टैक्स अधिकारियों को चकमा दिया जा सके। इसे 'सर्कुलर ट्रेडिंग' (Circular Trading) भी कहा जाता है, जिसमें माल अपनी जगह से हिलता भी नहीं है, लेकिन कागजों पर वह पूरे देश में घूम आता है।
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एसटीएफ को मिली 'खजाने' जैसी बरामदगी
\r\n\r\nगिरफ्तारी के वक्त एसटीएफ ने आरोपियों के पास से जो दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बरामद किए हैं, वे इस घोटाले के पैमाने को बयां करते हैं। बरामदगी में शामिल हैं:
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- \r\n 90 अलग-अलग फर्मों की रबर स्टैंप (मुहर)।\r\n \r\n
- \r\n 54 बैंक पासबुक (विभिन्न बैंकों की)।\r\n \r\n
- \r\n 24 फर्मों की भारी-भरकम बिलिंग फाइलें।\r\n \r\n
- \r\n लैपटॉप, जिसमें 125 से ज्यादा बोगस फर्मों का डेटाबेस मौजूद था।\r\n \r\n
- \r\n दर्जनों मोबाइल फोन और सिम कार्ड्स।\r\n \r\n
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मोबाइल और बैंक ट्रांजेक्शन की शुरुआती जांच में ही 500 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी की पुष्टि हो चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि फॉरेंसिक जांच के बाद यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
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इन आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
\r\n\r\nएसटीएफ ने जिन आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें गिरोह का सरगना, डेटा ऑपरेटर और बैंक खाते मैनेज करने वाले लोग शामिल हैं:
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- \r\n दिलशाद मलिक (निवासी: न्यू इस्लाम नगर, मेरठ) - मुख्य आरोपी।\r\n \r\n
- \r\n जावेद मलिक (निवासी: न्यू इस्लाम नगर, मेरठ)।\r\n \r\n
- \r\n मोहम्मद वसीम (निवासी: नौचंदी, मेरठ)।\r\n \r\n
- \r\n इकरामुद्दीन (निवासी: नौचंदी, मेरठ)।\r\n \r\n
- \r\n मोहम्मद सुहैल (निवासी: लिसाड़ी गेट, मेरठ)।\r\n \r\n
- \r\n रमेश पटेल (निवासी: दिल्ली)।\r\n \r\n
- \r\n अंकुर तिवारी (निवासी: अंबेडकर नगर)।\r\n \r\n
- \r\n स्वतंत्र कुमार (निवासी: गाजियाबाद)।\r\n \r\n
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जीएसटी चोरी: देश की अर्थव्यवस्था पर चोट
\r\n\r\nजीएसटी (Goods and Services Tax) देश के विकास कार्यों के लिए राजस्व का एक मुख्य स्रोत है। जब अपराधी Meerut GST Fraud जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं, तो वे सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था पर चोट करते हैं। 500 करोड़ रुपये की चोरी का मतलब है कि सरकार इतने रुपये के विकास कार्यों, अस्पतालों या सड़कों के निर्माण से वंचित रह गई।
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एसटीएफ अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह को जीएसटी विभाग के किसी अंदरूनी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत का फायदा तो नहीं मिल रहा था? क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर फर्जी फर्में रजिस्टर होना और सालों तक पकड़ में न आना, सिस्टम की खामियों की ओर भी इशारा करता है।
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आगे की कार्रवाई
\r\n\r\nएएसपी एसटीएफ ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन्स को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। एसटीएफ अब उन वास्तविक फर्मों (Beneficiary Firms) की सूची तैयार कर रही है, जिन्होंने दिलशाद मलिक के गिरोह से फर्जी बिल खरीदकर आईटीसी का लाभ उठाया है। आने वाले दिनों में कई बड़े व्यापारियों पर भी गाज गिर सकती है।
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मेरठ में पकड़ा गया यह GST Fraud इस साल की सबसे बड़ी आर्थिक अपराध की घटनाओं में से एक है। यूपी एसटीएफ की यह कार्रवाई उन सभी जालसाजों के लिए एक चेतावनी है जो तकनीक का सहारा लेकर देश के कानून से खेलने की कोशिश करते हैं। 500 करोड़ रुपये का यह घोटाला बताता है कि जीएसटी सिस्टम में अभी भी कुछ खामियां हैं, जिनका फायदा अपराधी उठा रहे हैं। उम्मीद है कि इस खुलासे के बाद प्रशासन और भी सख्त कदम उठाएगा।READ ALSO:-मेरठ में 'वोट की चोट' से पहले बड़ा झटका: 6.68 लाख मतदाता ड्राफ्ट लिस्ट से होंगे बाहर; SIR अभियान खत्म, डाटा लॉक
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यूपी एसटीएफ ने मेरठ में 500 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। मुख्य आरोपी दिलशाद मलिक समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों के जरिए बोगस फर्में बनाकर और नकली इनवॉइस के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की चोरी करता था। इनका नेटवर्क 20 राज्यों में फैला था। मौके से 90 फर्मों की मुहर और भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं।
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