मेरठ, उत्तर प्रदेश: देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई पर कथित तौर पर जूता फेंकने के प्रयास की घटना को लेकर मेरठ में न्यायिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। बुधवार को मेरठ कलेक्ट्रेट में अनुसूचित जाति (SC) अधिवक्ता संघ ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया और आरोपी अधिवक्ता के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।READ ALSO:-मेरठ के VIP इलाके में मौत का मोड़! डिवाइडर से टकराकर कार के उड़े परखच्चे, रात में हुए हादसे में 3 की हालत नाजुक।
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संघ ने इस संबंध में अपनी मांगों का एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा।
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न्यायपालिका की गरिमा को ठेस
\r\n\r\nSC अधिवक्ता संघ ने अपने ज्ञापन में बताया कि यह घटना सुप्रीम कोर्ट में संवैधानिक पीठ की सुनवाई के दौरान हुई, जब अधिवक्ता राकेश किशोर तिवारी ने मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर कथित तौर पर जूता फेंकने का प्रयास किया।
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संघ ने इस कृत्य को न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया और कहा कि यह सीधे तौर पर सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना है। अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान इस तरह की हिंसक और अशोभनीय हरकतें न्याय व्यवस्था में अराजकता फैलाने की कोशिश है।
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SC/ST Act और देशद्रोह के तहत कार्रवाई की मांग
\r\n\r\nSC अधिवक्ता संघ ने इस कृत्य को केवल अवमानना तक सीमित न रखते हुए इसे देश की अखंडता और शांति के खिलाफ माना है।
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- \r\n देशद्रोह का आरोप: अधिवक्ताओं का कहना है कि यह हरकत देश में अराजकता व अशांति फैलाने की कोशिश है, जो सीधे तौर पर देशद्रोह (Sedition) की श्रेणी में आता है।\r\n \r\n
- \r\n SC/ST Act का प्रावधान: संघ ने इस बात पर जोर दिया कि चूंकि मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से आते हैं, इसलिए आरोपी अधिवक्ता का यह कृत्य जातिगत दुर्भावना से प्रेरित है। लिहाजा, आरोपी अधिवक्ता राकेश किशोर तिवारी के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत दंडनीय अपराध का मामला भी दर्ज किया जाना चाहिए।\r\n \r\n
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संघ की तत्काल मांगें
\r\n\r\nSC अधिवक्ता संघ ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन और केंद्र सरकार से निम्नलिखित तत्काल कार्रवाई की मांग की है:
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- \r\n अधिवक्ता राकेश किशोर तिवारी के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाए।\r\n \r\n
- \r\n आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार कर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।\r\n \r\n
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संघ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति की गरिमा की रक्षा के लिए सख्त कदम नहीं उठाए जाते, तब तक न्याय व्यवस्था में आम जनता का विश्वास बना रहना मुश्किल है।
Sabse pehle comment karne wale banein.