उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut road accident) जिले से एक दिल दहला देने वाली सड़क दुर्घटना की खबर सामने आई है। तेज रफ्तार का कहर एक बार फिर एक परिवार की खुशियां लील गया। दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे पर सोमवार की अलसुबह एक भीषण हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। दौराला थाना क्षेत्र (Daurala police station Meerut) की सीमा में दादरी गांव के सामने बने फ्लाईओवर पर एक आइसर कैंटर बेकाबू होकर आगे चल रहे एक बड़े ट्रेलर ट्रक से टकरा गया। यह दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कैंटर के परखच्चे उड़ गए और चालक को संभलने का एक सेकंड का भी मौका नहीं मिला।READ ALSO:-जून 2026 में पूरी तरह बदल सकती है दुनिया की दिशा! वैदिक ज्योतिषाचार्य डॉ. विनोद ओझा ने दी मौसम, अर्थव्यवस्था और वैश्विक घटनाओं पर सबसे बड़ी चेतावनी
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अलसुबह 5 बजे का वह खौफनाक मंजर प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह भयानक सड़क हादसा (UP road accident news) सोमवार सुबह लगभग 5 बजे के आसपास हुआ। उस समय हाईवे पर यातायात सामान्य था और अधिकांश वाहन अपनी निर्धारित गति से चल रहे थे। बताया जा रहा है कि एक आइसर कैंटर जो दिल्ली से माल लादकर तीर्थ नगरी हरिद्वार की ओर जा रहा था, वह जैसे ही दौराला थाना क्षेत्र के दादरी गांव के पास स्थित फ्लाईओवर पर चढ़ा, तभी चालक का वाहन से नियंत्रण पूरी तरह से खो गया।
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प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कैंटर की गति काफी तेज थी (Canter truck crash Meerut)। इसी दौरान आगे एक ट्रेलर ट्रक चल रहा था। इससे पहले कि कैंटर का चालक ब्रेक लगा पाता या वाहन को दूसरी लेन में मोड़ पाता, कैंटर सीधे जाकर ट्रेलर के पिछले हिस्से में पूरी ताकत से टकरा गया। टक्कर के वक्त हुई तेज आवाज ने आसपास के लोगों और हाईवे से गुजर रहे अन्य वाहन चालकों को भी दहला दिया। लोग तुरंत अपने वाहन रोककर घटनास्थल की ओर दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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केबिन बना मौत का काल, केबिन में फंसा रहा चालक इस भीषण टक्कर में कैंटर का अगला हिस्सा यानी चालक का केबिन पूरी तरह से पिचक कर लोहे के मलबे में तब्दील हो गया था। इस दर्दनाक हादसे में कैंटर चला रहे 42 वर्षीय सदानंद पुत्र उतवल की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक सदानंद उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद (Sadanand Farrukhabad death) जिले का निवासी था और पेशे से ड्राइवर था। वह पिछले कई वर्षों से इसी तरह मालवाहक वाहन चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा था।
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हादसा इतना वीभत्स था कि सदानंद का शरीर केबिन के मुड़े हुए लोहे के बीच बुरी तरह से फंस गया था। उसके शरीर पर गंभीर और गहरे घाव आए थे और अत्यधिक खून बह जाने तथा सिर व सीने में गंभीर चोट लगने के कारण उसकी सांसें दुर्घटना के कुछ ही पलों के भीतर थम गईं। जो लोग मदद के लिए पहुंचे, वे भी केबिन की हालत देखकर कुछ समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर चालक को बाहर कैसे निकाला जाए।
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राहत एवं बचाव कार्य: क्रेन और कटर से काटना पड़ा केबिन हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। वहां मौजूद अन्य वाहन चालकों ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम और नेशनल हाईवे अथॉरिटी के टोल प्लाजा को इस भयानक दुर्घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही सिवाया टोल प्लाजा से इमरजेंसी रेस्क्यू टीम, एंबुलेंस और एक भारी-भरकम क्रेन तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो गई।
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इसके साथ ही दौराला थाना पुलिस की गश्त कर रही पीआरवी और थाने की फोर्स भी सायरन बजाते हुए मौके पर पहुंच गई। पुलिस और रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती केबिन में फंसे हुए चालक के शव को सुरक्षित बाहर निकालने की थी। लोहे का ढांचा इस कदर आपस में फंसा हुआ था कि उसे हाथों से या सामान्य उपकरणों से अलग करना नामुमकिन था। इसके बाद क्रेन की मदद से पहले कैंटर को ट्रेलर से अलग किया गया। फिर रेस्क्यू टीम ने गैस कटर और अन्य भारी उपकरणों का इस्तेमाल करके कड़ी मशक्कत के बाद केबिन को काटा और सदानंद के शव को बाहर निकाला।
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पुलिस की कार्रवाई: मोर्चरी भेजा गया शव, परिजनों में मचा कोहराम शव को बाहर निकालने के बाद पुलिस ने तुरंत उसे एंबुलेंस के जरिए पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया है। पुलिस (Meerut local news Hindi) की एक टीम ने मृतक सदानंद के पास से मिले दस्तावेजों और मोबाइल फोन के आधार पर उसके गृह जनपद फर्रुखाबाद की पुलिस से संपर्क किया और उसके परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दी।
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जैसे ही सदानंद के परिजनों को यह मनहूस खबर मिली, उनके घर में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे तुरंत मेरठ के लिए रवाना हो गए हैं। परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य अचानक इस तरह चला जाएगा, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।
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यातायात हुआ बाधित, पुलिस कर रही है सीसीटीवी फुटेज की जांच इस हादसे (highway accident live) के कारण दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे पर दादरी फ्लाईओवर के पास कुछ समय के लिए भारी जाम की स्थिति पैदा हो गई थी। क्षतिग्रस्त वाहनों के हाईवे के बीचों-बीच खड़े होने और बचाव कार्य चलने के कारण पीछे से आ रहे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालांकि, दौराला पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए यातायात को दूसरी लेन से डायवर्ट किया और क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त कैंटर और ट्रेलर को हाईवे से हटाकर किनारे करवाया। इसके बाद ही यातायात पूरी तरह से सामान्य हो सका।
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दौराला पुलिस के जांच अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला पूरी तरह से सड़क दुर्घटना का प्रतीत हो रहा है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या चालक सदानंद को अलसुबह नींद की झपकी आ गई थी, जिसके कारण वह आगे चल रहे ट्रेलर को नहीं देख सका, या फिर कैंटर में कोई तकनीकी खराबी जैसे ब्रेक फेल होने की समस्या आई थी। घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस आसपास लगे टोल प्लाजा और हाईवे के सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है।
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हाईवे पर सुबह के समय हादसों का बढ़ता ग्राफ एक बड़ी चिंता दिल्ली-देहरादून हाईवे (road safety UP) पर यह कोई पहला हादसा नहीं है। अक्सर अलसुबह यानी तड़के 3 बजे से 6 बजे के बीच इस तरह के हादसों का ग्राफ काफी तेजी से बढ़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय वाहन चालकों को अक्सर 'माइक्रो स्लीप' (नींद की झपकी) आती है, जो तेज रफ्तार वाहनों के लिए जानलेवा साबित होती है। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस लगातार वाहन चालकों को यह सलाह देते हैं कि यदि उन्हें रात के सफर के दौरान जरा भी नींद महसूस हो, तो वे अपना वाहन किसी सुरक्षित स्थान पर रोककर आराम कर लें, लेकिन इसके बावजूद ओवरस्पीडिंग और लापरवाही के कारण ऐसी दुखद घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। मेरठ पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
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