मेरठ (क्राइम डेस्क): उत्तर प्रदेश पुलिस का अपराधियों और अनैतिक कारोबार करने वालों के खिलाफ एक्शन लगातार जारी है। अवैध रूप से धन अर्जित कर रातों-रात करोड़पति बनने वाले माफियाओं की अब खैर नहीं है। इसी कड़ी में मेरठ पुलिस ने एक बेहद कड़ा संदेश देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि अपराध के रास्ते से बनाई गई पाई-पाई का हिसाब लिया जाएगा।READ ALSO:-भीषण गर्मी और 'नौतपा' का प्रचंड कहर: जिला प्रशासन का बड़ा फैसला, प्री-प्राइमरी से 10वीं तक के सभी स्कूलों की छुट्टियां 28 मई तक बढ़ीं
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मंगलवार को मेरठ के थाना ब्रह्मपुरी क्षेत्र में पुलिस का वह रौद्र रूप देखने को मिला, जिससे इलाके के बड़े-बड़े बदमाशों के पसीने छूट गए। पुलिस ने यहां नशे के काले कारोबार के एक बड़े सरगना ईशु (पुत्र करण सिंह) के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट (Gangster Act) के तहत कार्रवाई करते हुए उसकी लगभग तीन करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति को कुर्क कर लिया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान लगभग दो घंटे तक इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिससे लोगों में कौतूहल और अपराधियों में दहशत का माहौल बना रहा।
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नशे की काली कमाई से खड़ा किया था करोड़ों का साम्राज्य

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ब्रह्मपुरी के अंबेडकर नगर का रहने वाला ईशु (पुत्र करन सिंह) कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का सरगना था। पिछले काफी समय से वह और उसका गैंग शहर के युवाओं को नशे की लत का शिकार बना रहा था। इस सफेद जहर (ड्रग्स और मादक पदार्थ) की तस्करी और बिक्री से ईशु ने बेतहाशा दौलत कमाई थी।
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 Meerut Drug Dealer Ishu Property Seized | Police Seal Home ...

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कानून की नजरों से बचते हुए उसने इस काली कमाई को रियल एस्टेट और लग्जरी सुख-सुविधाओं में निवेश करना शुरू कर दिया था। उसने अपने और अपने परिवार के नाम पर आलीशान मकान और गोदाम खड़े कर लिए थे। लेकिन पुलिस की पैनी नजरों से उसका यह काला कारोबार ज्यादा दिनों तक छिप नहीं सका। पुलिस ने इस सिंडिकेट को जड़ से खत्म करने के लिए न केवल गिरफ्तारियां कीं, बल्कि उसकी आर्थिक कमर तोड़ने की भी पूरी योजना बनाई।
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क्या है पूरा मामला और कैसे कसा गया कानूनी शिकंजा?

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इस पूरे ऑपरेशन की नींव पिछले साल ही रख दी गई थी। मेरठ पुलिस यह भली-भांति जानती है कि किसी भी अपराधी को सिर्फ जेल भेजने से अपराध खत्म नहीं होता, बल्कि जब तक उसकी अवैध संपत्ति को जब्त नहीं किया जाता, तब तक उसका नेटवर्क काम करता रहता है।
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इसी रणनीति के तहत थाना ब्रह्मपुरी में 28 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) रमाकांत पचौरी के नेतृत्व में एक संगठित गैंग को रजिस्टर्ड किया गया था। इस गैंग चार्ट में मुख्य रूप से चार शातिर अपराधियों के नाम शामिल किए गए थे:
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    ईशु पुत्र करन सिंह (गैंग लीडर)
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    विकास जाटव पुत्र चरन सिंह
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    बृजमोहन पुत्र महिपाल सिंह
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    नतिन पुत्र नेपाल सिंह
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यह गैंग एक सुव्यवस्थित तरीके से इलाके में मादक पदार्थों की सप्लाई चेन चलाता था। गैंग के रजिस्टर्ड होने के बाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (Gangster Act) की धारा 2/3 के तहत इन सभी आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया।
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लंबी चली जांच और जिलाधिकारी के कुर्की आदेश

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गैंगस्टर एक्ट लगने के बाद पुलिस ने आरोपियों की 'वित्तीय कुंडली' खंगालने का काम शुरू किया। पुलिस ने धारा 14 (A) [गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1)] के तहत अपराधियों की उन तमाम संपत्तियों को चिह्नित किया, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपराध के पैसे से खरीदी गई थीं।
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बैंक खातों, रजिस्ट्रियों और बेनामी संपत्तियों की गहन जांच के बाद पुलिस ने एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके मेरठ के जिलाधिकारी (DM) को भेजी। इस कानूनी प्रक्रिया में कई महीने लगे, क्योंकि पुलिस कोई भी ऐसी खामी नहीं छोड़ना चाहती थी जिसका फायदा अपराधी कोर्ट में उठा सकें। सभी साक्ष्यों और पुलिस की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद, 14 मई 2026 को जिलाधिकारी ने गैंग लीडर ईशु के विरुद्ध संपत्ति कुर्क करने के आधिकारिक आदेश (Attachment Orders) जारी कर दिए।
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भारी फोर्स और मुनादी: मंगलवार को पुलिस का बड़ा एक्शन

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जिलाधिकारी के आदेश मिलते ही पुलिस ने कुर्की की तैयारी शुरू कर दी। आरोपियों को पूर्व में नोटिस के जरिए सूचना दी जा चुकी थी। मंगलवार को इस आदेश को धरातल पर उतारने के लिए एक बड़ी टीम का गठन किया गया।
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सीओ (CO) ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना के कुशल नेतृत्व में थाना ब्रह्मपुरी, थाना लोहियानगर और थाना परतापुर की संयुक्त पुलिस फोर्स ने अंबेडकर नगर में धावा बोल दिया। इलाके में अचानक इतनी बड़ी संख्या में पुलिस की गाड़ियां और पीएसी (PAC) के जवानों को देखकर लोगों में खलबली मच गई।
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कुर्की की इस कानूनी प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए मौके पर 'नायब तहसीलदार' को भी मजिस्ट्रेट के रूप में बुलाया गया था। पुलिस ने सबसे पहले पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम (लाउडस्पीकर) और ढोल-नगाड़ों के जरिए पूरे इलाके में मुनादी (Public Announcement) कराई। मुनादी में साफ तौर पर बताया गया कि यह संपत्ति अपराध के पैसे से अर्जित की गई है और अब यह सरकार के कब्जे में है।
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किन-किन संपत्तियों पर लगा सरकारी ताला? (Property Details)

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मुनादी की आवाज सुनकर और पुलिस की भारी मौजूदगी देखकर मौके पर सैकड़ों स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों की मौजूदगी में पुलिस ने ईशु की निम्नलिखित संपत्तियों को कुर्क करते हुए सीज कर दिया:
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    ब्रह्मपुरी स्थित आलीशान आवास: जहां से यह अपराधी अपना नेटवर्क ऑपरेट करता था।
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  3. \r\n
    लोहियानगर स्थित बड़ा गोदाम: जिसका इस्तेमाल संभवतः अवैध गतिविधियों या संपत्तियों को छिपाने के लिए किया जाता था।
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  4. \r\n
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    एक स्कूटी (दुपहिया वाहन): जिसे अपराध के पैसों से खरीदा गया था।
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इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व कर रहीं सीओ सौम्या अस्थाना ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन द्वारा जिन तीन संपत्तियों को कुर्क कर सरकारी नियंत्रण में लिया गया है, उनकी कुल अनुमानित बाजार कीमत लगभग तीन करोड़ रुपये (Rs 3 Crore) है। इन संपत्तियों को अब कोई भी व्यक्ति न तो खरीद सकता है, न बेच सकता है और न ही इनमें प्रवेश कर सकता है।
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अपराधियों के लिए कड़ा संदेश

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मेरठ पुलिस की यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि अपराध का रास्ता अंततः विनाश की ओर ही ले जाता है। नशे के सौदागरों ने जो पैसा युवाओं की जिंदगी बर्बाद करके कमाया था, आज वह सब मिट्टी में मिल गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान यहीं रुकने वाला नहीं है। जिले में ऐसे अन्य माफियाओं और गैंगस्टर्स की संपत्तियों का भी डाटा तैयार किया जा रहा है और आने वाले दिनों में और भी बड़ी कुर्की की कार्रवाइयां देखने को मिल सकती हैं। पुलिस की इस सख्ती से जहां एक ओर आम जनता में सुरक्षा का भाव पैदा हुआ है, वहीं दूसरी ओर आपराधिक सिंडिकेट चलाने वालों में दहशत का माहौल है।
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