मेरठ (Crime Desk): डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर अपराधी (Cyber Criminals) पुलिस और जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए हर दिन नए और हाईटेक तरीके ईजाद कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस ने एक ऐसे ही बेहद शातिर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े 'साइबर ठग गिरोह' (Cyber Fraud Syndicate) का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह आम साइबर ठगों से कई कदम आगे था। ये लोग भारत में बैठे-बैठे साइबर ठगी की काली कमाई को क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) में तब्दील कर विदेशी नेटवर्क तक पहुंचा रहे थे।READ ALSO:-हल्दीराम की बड़ी लापरवाही उजागर: एक्सपायर्ड मिठाई बेची, सबूत मिटाने के लिए फाड़ा डिब्बा; उपभोक्ता अदालत ने सिखाया सबक
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मेरठ पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए इस गिरोह के तीन मुख्य गुर्गों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। इस ऑपरेशन को शहर के लिसाड़ी गेट, लालकुर्ती और थाना सदर बाजार पुलिस की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया।
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क्या था ठगी का 'मास्टरप्लान'? (Modus Operandi)
\r\n\r\nइस पूरे सिंडिकेट के काम करने का तरीका किसी हॉलीवुड क्राइम थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले (SP City Vinayak Gopal Bhosale) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस गिरोह के काले कारनामों की पूरी कार्यप्रणाली (Modus Operandi) का विस्तार से खुलासा किया।
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- \r\n गरीबों को मोहरा बनाना: इस गिरोह का सबसे पहला काम झुग्गी-झोपड़ियों, कॉलोनियों और गांवों में रहने वाले उन भोले-भाले गरीब लोगों को तलाशना होता था, जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत होती थी।\r\n \r\n
- \r\n किराए के बैंक खाते (Mule Accounts): आरोपी इन गरीब लोगों को 2,000 से 5,000 रुपये का लालच देकर उनके असली दस्तावेजों (आधार कार्ड, पैन कार्ड) पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाते थे। खाता खुलते ही उसकी पासबुक, एटीएम कार्ड (ATM Card), चेकबुक और उस खाते से लिंक्ड सिम कार्ड ये ठग अपने पास रख लेते थे।\r\n \r\n
- \r\n ठगी की रकम का ट्रांसफर: इसके बाद, देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे इस नेटवर्क के मुख्य हैकर्स और ठग, आम लोगों से फ्रॉड कर वह पैसा इन 'किराए के खातों' (Mule Accounts) में ट्रांसफर कर देते थे। इससे मुख्य अपराधी कभी भी सीधे पुलिस की रडार पर नहीं आते थे।\r\n \r\n
- \r\n कमीशन का खेल: जैसे ही इन खातों में ठगी का पैसा क्रेडिट होता था, मेरठ में बैठे ये आरोपी (अरबाज, नबील और हैदर) अपना तय कमीशन (कमीशन का प्रतिशत) काटकर बाकी रकम निकाल लेते थे।\r\n \r\n
- \r\n क्रिप्टोकरेंसी और विदेशी कनेक्शन: पुलिस से बचने का सबसे बड़ा पैंतरा यही था। ठगी की नकद या डिजिटल रकम को ये आरोपी 'डिजिटल प्लेटफॉर्म्स' के जरिए तुरंत क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency - जैसे Bitcoin, USDT आदि) में बदल देते थे। क्रिप्टो में बदलते ही इस पैसे को ब्लॉकचेन के जरिए विदेशों में बैठे नेटवर्क के आकाओं के वॉलेट में ट्रांसफर कर दिया जाता था, जिसे ट्रैक करना जांच एजेंसियों के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होता है।\r\n \r\n
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सुवालीन की एक शिकायत और पुलिस का एक्शन
\r\n\r\nइस इतने बड़े और शातिर नेटवर्क की उल्टी गिनती तब शुरू हुई, जब लालकुर्ती थाना क्षेत्र के बैंक स्ट्रीट निवासी एक जागरूक नागरिक सुवालीन (Suwalin) ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया। सुवालीन ने अपने साथ हुए साइबर फ्रॉड को लेकर पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए लालकुर्ती पुलिस ने त्वरित संज्ञान लिया और 13 अप्रैल को धोखाधड़ी और आईटी एक्ट (IT Act) की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने सर्विलांस (Surveillance), साइबर सेल और मुखबिर तंत्र का जाल बिछाया। गहन छानबीन और पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक सबूत जुटाने के बाद, पुलिस ने दबिश देकर तीन मुख्य आरोपियों को दबोच लिया।
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गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी (Arrest & Recovery)
\r\n\r\nपुलिस के हत्थे चढ़े तीनों आरोपी मेरठ शहर के ही निवासी हैं और पिछले काफी समय से इस सफेदपोश अपराध में लिप्त थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम हैं:
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- \r\n अरबाज उर्फ सोनू (Arbaz alias Sonu)\r\n \r\n
- \r\n नबील अख्तर खान (Nabeel Akhtar Khan)\r\n \r\n
- \r\n हैदर (Haider)\r\n \r\n
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क्या-क्या हुआ बरामद? जब पुलिस ने इनके ठिकानों पर छापेमारी की, तो वहां से अपराध में इस्तेमाल होने वाला पूरा 'डिजिटल कंट्रोल रूम' मिला। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में सामग्री बरामद की है, जिनमें शामिल हैं:
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- \r\n 9 स्मार्ट मोबाइल फोन (जिनका इस्तेमाल खातों को ऑपरेट करने और क्रिप्टो ट्रेडिंग के लिए होता था)।\r\n \r\n
- \r\n 10 ATM कार्ड (अलग-अलग गरीब लोगों के नाम पर जारी)।\r\n \r\n
- \r\n 1 चेकबुक (लेन-देन के लिए)।\r\n \r\n
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100 से अधिक बैंक खातों का पर्दाफाश और हैदर का क्रिमिनल रिकॉर्ड
\r\n\r\nजांच के दौरान पुलिस के हाथ जो आंकड़े लगे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। एसपी सिटी ने बताया कि इन आरोपियों के पास से मिले मोबाइल फोन और दस्तावेजों की जांच से पता चला है कि इन्होंने अब तक लगभग 100 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की काली कमाई को रूट करने के लिए किया है।
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जब पुलिस की साइबर टीम ने केंद्र सरकार के एनसीआरपी (NCRP - National Cyber Crime Reporting Portal) पर इन 100 बैंक खातों की डिटेल खंगाली, तो पता चला कि इन खातों के खिलाफ केवल उत्तर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों (Other States) में भी साइबर फ्रॉड की दर्जनों शिकायतें पेंडिंग हैं।
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आरोपियों की कुंडली:
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- \r\n पकड़े गए तीन आरोपियों में से हैदर एक पेशेवर और आदतन अपराधी है। वह इससे पहले भी साइबर ठगी के मामलों में जेल की हवा खा चुका है और उस पर कई थानों में मुकदमे दर्ज हैं।\r\n \r\n
- \r\n वहीं, अरबाज उर्फ सोनू और नबील अख्तर खान का पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर उनका कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं मिला है। वे पहली बार पुलिस के हत्थे चढ़े हैं, जिससे पता चलता है कि यह गिरोह नए युवाओं को तेजी से अपने साथ जोड़ रहा था।\r\n \r\n
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मास्टरमाइंड की तलाश तेज, जनता के लिए चेतावनी
\r\n\r\nपुलिस की पूछताछ में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि इस गिरोह का एक मुख्य सदस्य (Mastermind) अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है और वह फरार चल रहा है। एसपी सिटी ने आश्वस्त किया है कि पुलिस की कई टीमें फरार आरोपी की तलाश में लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और बहुत जल्द उसे भी सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
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इस घटना ने एक बार फिर आम जनता, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए एक बड़ी चेतावनी जारी की है। चंद रुपयों के लालच में कभी भी अपने आधार कार्ड (Aadhaar Card), पैन कार्ड (PAN Card) या बैंक खाते (Bank Account) का एक्सेस किसी अनजान व्यक्ति को न दें। यदि आपके खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी या देश विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए होता है, तो कानूनी तौर पर सबसे पहले खाताधारक (Account Holder) को ही गिरफ्तार किया जाता है। मेरठ पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के खिलाफ एक कड़ा संदेश है।
Sabse pehle comment karne wale banein.