मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut News) जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां दौराला थाना क्षेत्र के बड़कली गांव में एक 2 साल की मासूम बच्ची की जिंदा जलने से दर्दनाक मौत हो गई। हादसा उस वक्त हुआ जब बच्ची के माता-पिता उसे सोता हुआ छोड़कर पड़ोस में एक शादी समारोह में गए हुए थे। घर में अंधेरा दूर करने के लिए जलाई गई मोमबत्ती ही मासूम की मौत का कारण बन गई।READ ALSO:-बिजनौर में 'रक्तचरित्र': भाभी से झगड़े के बाद सनकी चाचा ने 2 साल की भतीजी का गला रेता, 5 साल के भतीजे को छत से नीचे फेंका; संपत्ति और नशे ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार
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इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। बताया जा रहा है कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और बिजली का बिल न भर पाने के कारण विभाग ने उनका कनेक्शन काट दिया था। मजबूरी में परिवार मोमबत्ती जलाकर गुजारा कर रहा था।
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मोमबत्ती गिरी और आग का गोला बन गया बिस्तर

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हादसा बुधवार रात का बताया जा रहा है। बड़कली गांव निवासी रजनीश मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। रजनीश और उनकी पत्नी रानी दोनों ही मूक-बधिर (बोल और सुन नहीं सकते) हैं। परिवार में दो बेटे करण, अर्जुन और 2 साल की बेटी नायरा थी।
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घटना वाली रात रजनीश अपनी पत्नी और बेटों के साथ घर के पास ही एक शादी समारोह में गए थे। वे नायरा को घर पर सोता हुआ छोड़ गए थे। चूंकि घर की बिजली कटी हुई थी, इसलिए कमरे में मोमबत्ती जलाकर रखी गई थी। आशंका जताई जा रही है कि किसी तरह मोमबत्ती गिर गई, जिससे पास रखे सामान ने आग पकड़ ली। देखते ही देखते आग उस बिस्तर तक पहुंच गई, जिस पर नायरा सो रही थी।
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रोशनदान से निकला धुआं, तब चला पता

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बच्ची की दादी कविता ने बताया कि शादी समारोह के बीच जब उनकी जेठानी की नजर घर के रोशनदान पर पड़ी, तो वहां से धुआं निकल रहा था। अनहोनी की आशंका होते ही सभी लोग दौड़कर घर पहुंचे। अंदर का नजारा देख सबके होश उड़ गए। कमरा आग की लपटों से घिरा था और सामान जलकर राख हो चुका था।
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परिजनों ने किसी तरह आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 2 साल की नायरा पूरी तरह जल चुकी थी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
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गरीबी की मार: 50 हजार के बिल ने छीनी रोशनी

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इस हादसे के पीछे गरीबी एक बड़ा कारण बनकर सामने आई है। मृतक बच्ची के चाचा विशाल और दादी कविता ने बताया कि परिवार की माली हालत ठीक नहीं है। पहले बच्ची की बीमारी में 2-3 लाख रुपये खर्च हो गए थे, जिसके कारण वे बिजली का बिल जमा नहीं कर सके।
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परिजनों का आरोप है कि बिजली विभाग ने उन पर करीब 50,000 रुपये का बकाया निकाल दिया था और कनेक्शन काट दिया था। विशाल ने बताया, "पहले बिल कम था, लेकिन बाद में बढ़ाकर 50 हजार कर दिया गया। विभाग वाले जेल भेजने की धमकी दे रहे थे। पैसे न होने की वजह से हम कनेक्शन नहीं जुड़वा पाए और मोमबत्ती जलाने को मजबूर थे।"
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पुलिस को दिए बिना कर दिया अंतिम संस्कार

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हादसे के बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दिए बिना ही गुरुवार को बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया। सीओ दौराला प्रकाश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है, लेकिन घटना की जानकारी मिलते ही जांच कराई जाएगी। वहीं, ग्राम प्रधान अर्चना राणा ने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी है और अधिकारियों से मिलकर आर्थिक सहायता दिलाने का भरोसा दिलाया है।
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मेरठ (Meerut Fire Accident) की यह घटना प्रशासन और सिस्टम पर भी सवाल खड़े करती है। एक तरफ जहां सरकार 'सबको बिजली' का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ बिल न भर पाने की वजह से कटी बिजली और गरीबी ने एक मासूम की जान ले ली। मूक-बधिर माता-पिता अपनी बच्ची की चीखें भी नहीं सुन सके, यह सोचकर ही हर किसी का दिल सहम गया है।
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