उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) शहर के सबसे व्यस्त और चर्चित व्यावसायिक क्षेत्रों में से एक 'सेंट्रल मार्केट' (Central Market, Shastri Nagar) इन दिनों एक बड़े विवाद का अखाड़ा बना हुआ है। मामला आवास विकास परिषद (Awas Vikas Parishad) द्वारा इमारतों और मकानों में 'सेटबैक' (भवन निर्माण के दौरान आगे और किनारे छोड़ी जाने वाली खाली जगह) के नियमों के पालन को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के सख्त आदेशों के बाद प्रशासन एक्शन में है, तो वहीं स्थानीय निवासी और व्यापारी अपने आशियाने और व्यापार को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।READ ALSO:-मेरठ में सरेआम गुंडागर्दी: विक्टोरिया पार्क स्विमिंग पूल में घुसे मेरठ कॉलेज के छात्र, रोकने पर महिला इंचार्ज से की शर्मनाक बदसलूकी
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इस आंदोलन में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। सेक्टर 2 की महिलाओं के धरने के बाद, अब सेक्टर 4 की महिलाओं ने भी अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद कर दी है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
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सेक्टर 4 की महिलाओं का सड़क पर धरना
\r\n\r\nमंगलवार की सुबह मेरठ के शास्त्री नगर सेक्टर 4 में उस वक्त गहमागहमी का माहौल बन गया, जब बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं अपने घरों से निकलकर सड़कों पर बैठ गईं। ये महिलाएं आवास विकास परिषद की कार्रवाई और भेजे गए नोटिसों के खिलाफ अपना रोष प्रकट कर रही थीं।
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महिलाओं ने सुबह से ही सड़क पर डेरा डाल लिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका साफ कहना है कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में उन्हें बेघर करने या उनके छोटे-छोटे मकानों को तोड़ने की जो रूपरेखा तैयार कर रहा है, वे उसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगी।
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क्या है महिलाओं की मुख्य मांग? (The Core Demand)
\r\n\r\nआंदोलन कर रही महिलाओं की मांग बिल्कुल स्पष्ट है, जो इससे पहले सेक्टर 2 की महिलाओं की भी रही थी।
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- \r\n व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने पर सहमति: महिलाओं का कहना है कि प्रशासन की आपत्ति उनके मकानों में चल रही व्यावसायिक (Commercial) गतिविधियों को लेकर है। वे इस बात पर राजी हैं कि वे अपने घरों से चल रही दुकानों या अन्य कमर्शियल कामों को पूरी तरह से बंद कर देंगी।\r\n \r\n
- \r\n सेटबैक न छोड़ने की जिद: विवाद का असली पेंच 'सेटबैक' पर फंसा है। नियमों के अनुसार, मकान के आगे एक तय सीमा तक जगह खाली छोड़नी होती है। महिलाओं का तर्क है कि उनके मकान बहुत छोटे हैं। यदि वे आवास विकास के नियमों के अनुसार सेटबैक छोड़ती हैं, तो उनके मकान रहने लायक ही नहीं बचेंगे या उन्हें भारी तोड़फोड़ का सामना करना पड़ेगा। इसलिए, वे किसी भी हाल में सेटबैक की जगह नहीं छोड़ सकती हैं।\r\n \r\n
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आवास विकास का सख्त रुख: 815 भूखंडों को थमाए नोटिस
\r\n\r\nएक तरफ जहां स्थानीय निवासी विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आवास विकास परिषद (Awas Vikas Parishad) भी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन को लेकर पूरी तरह से मुस्तैद है।
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- \r\n नोटिस तामील: सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद, आवास विकास ने सेंट्रल मार्केट और आसपास के चिह्नित 815 भूखंड स्वामियों को नोटिस जारी कर दिए हैं।\r\n \r\n
- \r\n डाक से भेजे गए नोटिस: जब आवास विकास की टीम सेक्टर 2 में नोटिस चस्पा करने (चिपकाने) पहुंची थी, तो उन्हें स्थानीय लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। इस स्थिति और तनाव को देखते हुए प्रशासन ने अपनी रणनीति बदली।\r\n \r\n
- \r\n अधिकारी का बयान: उपयुक्त आवास विकास, अनिल कुमार ने स्पष्ट किया है कि बचे हुए 105 नोटिस डाक (Post) के माध्यम से भूखंड स्वामियों को भेजे गए थे। उनका दावा है कि कोई भी नोटिस डाक विभाग द्वारा वापस नहीं लौटाया गया है, जिसका सीधा अर्थ यह है कि सभी 815 मालिकों द्वारा नोटिस 'रिसीव' (Receive) कर लिए गए हैं। अब कानूनी रूप से प्रशासन आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।\r\n \r\n
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सुप्रीम कोर्ट में पहुंची लड़ाई: सांसद अरुण गोविल ने की मदद
\r\n\r\nयह मामला अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सबसे बड़ी अदालत की चौखट तक पहुंच चुका है।
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- \r\n बीते शनिवार को सेक्टर 2 की पीड़ित महिलाओं का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा था।\r\n \r\n
- \r\n मेरठ के नवनिर्वाचित सांसद और मशहूर अभिनेता अरुण गोविल (Arun Govil) ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए निवासियों की मदद की पहल की।\r\n \r\n
- \r\n सांसद के नेतृत्व और मार्गदर्शन में ही इस प्रतिनिधिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने अधिवक्ता विवेक नारायण शर्मा (Advocate Vivek Narayan Sharma) से मुलाकात की।\r\n \r\n
- \r\n महिलाओं ने अपने मकानों से जुड़े सभी जरूरी साक्ष्य (दस्तावेज, नक्शे आदि) वकील को सौंप दिए हैं। बीते दिन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में विधिवत याचिका भी दर्ज कर ली गई है।\r\n \r\n
- \r\n सांसद अरुण गोविल द्वारा दिए गए इसी आश्वासन और कानूनी लड़ाई शुरू होने के बाद ही सेक्टर 2 की महिलाओं ने 15 दिन से चल रहे अपने धरने को स्थगित किया था और आवास विकास के नोटिस को स्वीकार कर लिया था।\r\n \r\n
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आंदोलन में आई दरार: व्यापारियों में साफ दिख रही गुटबाजी
\r\n\r\nइस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा और बेहद चिंताजनक पहलू यह भी है कि जिन 815 लोगों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है, वे एकजुट नहीं हैं। शास्त्री नगर के इन भूखंड स्वामियों और व्यापारियों के बीच गहरी गुटबाजी (Factionalism) उभरकर सामने आ गई है।
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आंदोलन के बदलते केंद्र:
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- \r\n पहला चरण: शुरुआत में सेटबैक और सीलिंग के खिलाफ धरना सेंट्रल मार्केट के मुख्य बाजार में शुरू हुआ था। वहां के व्यापारियों का एक अलग गुट था।\r\n \r\n
- \r\n दूसरा चरण: मुख्य बाजार का धरना समाप्त होने के बाद, सेक्टर 2 के निवासियों (विशेषकर महिलाओं) ने कमान संभाली और 15 दिनों तक धरना दिया।\r\n \r\n
- \r\n तीसरा चरण: अब मंगलवार को सेक्टर 4 की महिलाओं ने अलग से अपना धरना शुरू कर दिया है।\r\n \r\n
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यह अलग-अलग जगह और अलग-अलग समय पर हो रहा धरना साफ तौर पर दर्शाता है कि व्यापारियों और निवासियों में कोई एक केंद्रीय नेतृत्व नहीं है। आपसी सहमति न होने के कारण यह आंदोलन टुकड़ों में बंट गया है। जानकारों का मानना है कि इस गुटबाजी का सीधा फायदा प्रशासन को मिल सकता है, क्योंकि जब विरोध करने वाले ही एकजुट नहीं होंगे, तो उनके लिए किसी एक ठोस फैसले पर पहुंचना मुश्किल होगा।
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आगे क्या? (What's Next?)
\r\n\r\nअब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका पर टिकी हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट छोटे मकान मालिकों को सेटबैक के कड़े नियमों से कोई राहत देगा? क्या वे कमर्शियल गतिविधियां बंद करने के शपथ पत्र के आधार पर अपने मकानों को टूटने से बचा पाएंगे? और सबसे बड़ा सवाल, क्या सेक्टर 4 की महिलाएं अपने धरने से प्रशासन पर दबाव बनाने में कामयाब होंगी या फिर सेक्टर 2 की तरह उन्हें भी कानूनी आश्वासन के बाद धरना खत्म करना पड़ेगा?
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फिलहाल, मेरठ के सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में अनिश्चितता और तनाव का माहौल बना हुआ है। आवास विकास परिषद अपनी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर चुका है, और किसी भी दिन कोर्ट के आदेशानुसार बड़ी कार्रवाई (Bulldozer Action) देखने को मिल सकती है। स्थानीय लोग अपनी जीवन भर की पूंजी से बने आशियाने को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
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