तारीख: 29 जनवरी 2026। मेरठ शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली लेकिन जाम का पर्याय बन चुकी मवाना रोड (Mawana Road) के दिन अब बहुरने वाले हैं। शहर के यातायात को सुगम बनाने और नागरिकों को रोजमर्रा की धक्का-मुक्की से बचाने के लिए एक वृहद कार्ययोजना तैयार की गई है। इस नए प्रोजेक्ट के तहत मवाना रोड न केवल चौड़ी होगी, बल्कि इसे सुरक्षित और आधुनिक भी बनाया जाएगा।READ ALSO:-मेरठ में 'सवर्ण क्रांति' का शंखनाद: क्रांतिधरा से उठी UGC के 'काले कानून' के खिलाफ बगावत; कल NAS कॉलेज में लिखा जाएगा आंदोलन का नया अध्याय
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मवाना रोड को यशोदा कुंज तक चौड़ा करने का प्रस्ताव पास हो चुका है। इसके तहत सड़क की मौजूदा चौड़ाई को 14 मीटर से बढ़ाकर 17 मीटर किया जाएगा। इसके साथ ही, लालकुर्ती स्थित BSNL टेलीफोन एक्सचेंज के सामने की वह समस्या, जिसने सालों से लोगों को परेशान कर रखा था, उसका भी स्थाई समाधान (Permanent Solution) निकाला जाएगा।
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हालांकि, इस 'विकास गाथा' के बीच एक चिंताजनक पहलू मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) की कार्यशैली भी है, जिसके चलते मौजूदा डिवाइडर निर्माण का कार्य अपनी समय सीमा पार कर चुका है। खबरीलाल की इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको इस सड़क परियोजना के हर पहलू—इंजीनियरिंग, लागत, यूटिलिटी शिफ्टिंग और जमीनी हकीकत—से रूबरू कराएंगे।
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17 मीटर का गणित—कैसे खुलेगी जाम की गांठ?

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मवाना रोड पर यातायात का दबाव पिछले एक दशक में तीन गुना बढ़ गया है। यहाँ सुबह और शाम के वक्त निकलना किसी युद्ध जीतने से कम नहीं होता। इसी को देखते हुए सड़क चौड़ीकरण का फैसला लिया गया है।
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वर्तमान स्थिति (Current Status):

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    अभी मवाना रोड की कुल चौड़ाई 14 मीटर है।
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    इसमें डिवाइडर के दोनों तरफ 7-7 मीटर की सड़क उपलब्ध है।
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    बढ़ते ट्रैफिक और सड़क किनारे के अतिक्रमण के कारण यह 7 मीटर की चौड़ाई प्रभावी रूप से घटकर 5-6 मीटर रह जाती है, जिससे पीक आवर्स में वाहन रेंगते हुए चलते हैं।
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नया प्रस्ताव (The Expansion Plan):

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प्रस्तावित कार्ययोजना के अनुसार, सड़क की चौड़ाई में कुल 3 मीटर का इजाफा किया जाएगा।
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    विस्तार: सड़क के दोनों ओर डेढ़-डेढ़ मीटर (1.5m + 1.5m) की वृद्धि की जाएगी।
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    नई चौड़ाई: विस्तार के बाद सड़क की कुल चौड़ाई 17 मीटर हो जाएगी। यानी डिवाइडर के दोनों तरफ अब वाहनों को चलने के लिए 8.5 मीटर की खुली जगह मिलेगी।
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    लाभ: डेढ़ मीटर की अतिरिक्त जगह का मतलब है कि अब दोपहिया वाहनों के लिए एक अलग सुरक्षित लेन (Virtual Lane) उपलब्ध हो सकेगी, जिससे कार और बसों का प्रवाह नहीं रुकेगा।
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यूटिलिटी शिफ्टिंग—बिजली के पोल और पेड़ों की बाधा

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सड़क चौड़ीकरण का कार्य सुनने में जितना आसान लगता है, तकनीकी रूप से उतना ही जटिल होता है। 17 मीटर की चौड़ाई हासिल करने के लिए सबसे बड़ी चुनौती सड़क किनारे खड़े बिजली के खंभे और पेड़ हैं।
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    ऊर्जा निगम की भूमिका: इस प्रोजेक्ट की लागत में यूटिलिटी शिफ्टिंग (Utility Shifting) का बजट भी शामिल किया गया है। सड़क के दोनों ओर मौजूद बिजली के पोल्स को पीछे शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए ऊर्जा निगम (PVVNL) के साथ समन्वय स्थापित किया गया है।
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    वन विभाग की एनओसी: सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले पेड़ों की छंटाई या कटान के लिए वन विभाग की अनुमति और उसकी लागत को भी इस प्रोजेक्ट में समाहित किया गया है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विकास के साथ पर्यावरण के नियमों का भी पालन हो।
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डिवाइडर निर्माण—कसेरूखेड़ा से यशोदा कुंज तक सुरक्षा चक्र

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सड़क चौड़ी होने के साथ ही वाहनों की रफ्तार भी बढ़ेगी। रफ्तार के साथ दुर्घटनाओं का खतरा न बढ़े, इसके लिए डिवाइडर (Divider) का निर्माण अनिवार्य है।
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    रूट: यह नया डिवाइडर कसेरूखेड़ा पुल से शुरू होकर यशोदा कुंज तक बनाया जाएगा।
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    उद्देश्य: यह डिवाइडर न केवल विपरीत दिशा से आने वाले वाहनों को टकराने से रोकेगा, बल्कि रात के समय हेडलाइट की चकाचौंध (High-beam glare) से भी ड्राइवरों को बचाएगा।
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    सौंदर्यीकरण: योजना के तहत डिवाइडर के बीच में हरियाली (Plantation) और स्ट्रीट लाइट्स लगाने का भी प्रावधान है, जिससे मवाना रोड की सुंदरता भी बढ़ेगी।
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BSNL एक्सचेंज की पुलिया—इतिहास बनेगी 'आर्च', भविष्य बनेगा 'बॉक्स'

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मवाना रोड के चौड़ीकरण में सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी पेंच लालकुर्ती (Lalkurti) के सामने बीएसएनएल टेलीफोन एक्सचेंज के पास था।
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समस्या: यहाँ एक पुरानी ईंटों की बनी आर्च पुलिया (Arch Culvert) स्थित है। यह पुलिया दशकों पुरानी है और जर्जर हो चुकी है। इसकी चौड़ाई कम होने के कारण यहाँ अक्सर 'बॉटलनेक' (Bottleneck) बन जाता है। बारिश के दिनों में यहाँ जलभराव और नाले के ओवरफ्लो होने की समस्या भी आम थी।
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समाधान: विभाग ने अब इस पुरानी तकनीक को अलविदा कहने का फैसला किया है।
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    ध्वस्तीकरण: पुरानी आर्च पुलिया को पूरी तरह तोड़ दिया जाएगा।
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    नवनिर्माण: इसके स्थान पर आधुनिक तकनीक वाली आरसीसी बॉक्स पुलिया (RCC Box Culvert) का निर्माण किया जाएगा।
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    डायमेंशन: नई पुलिया दो मीटर चौड़ी कन्वर्ट आरसीसी होगी। बॉक्स कल्वर्ट की खासियत यह होती है कि यह भारी वाहनों का भार आसानी से सहन कर सकती है और इसमें पानी का बहाव भी सुचारू रहता है। इससे यहाँ लगने वाले जाम का स्थाई 'इलाज' हो जाएगा।
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MDA की सुस्त चाल—दिसंबर की डेडलाइन, जनवरी में भी अधूरा काम

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जहाँ एक तरफ नए चौड़ीकरण के सपने दिखाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) द्वारा कराए जा रहे मौजूदा कार्यों की रफ़्तार ने जनता के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
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प्रोजेक्ट: कमिश्नरी आवास चौराहे से मवाना रोड पर कसेरूखेड़ा पुल तक डिवाइडर निर्माण। एजेंसी: मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA)। डेडलाइन: दिसंबर 2025 का अंत।
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हकीकत (Reality Check): जनवरी 2026 का अंत आ चुका है, लेकिन मौके पर हालात निराशाजनक हैं।
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    70% कार्य ही पूरा: अधिकारियों के दावों के विपरीत, अभी तक केवल 70 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है।
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    पुराना मलबा: पुराने डिवाइडर को तोड़ने का काम चल रहा है, लेकिन उसका मलबा सड़क पर फैला होने के कारण आधी सड़क जाम रहती है।
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    जाम का कारण: निर्माण कार्य में देरी के कारण कमिश्नरी चौराहे से लेकर कसेरूखेड़ा तक दिन भर जाम की स्थिति बनी रहती है। धूल और मिट्टी ने दुकानदारों और राहगीरों का जीना मुहाल कर रखा है।
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अधिकारियों का तर्क: विभागीय सूत्रों का कहना है कि सर्दियों में निर्माण कार्य (विशेषकर कंक्रीट सेट होने में) में समय लगता है और कुछ तकनीकी कारणों से देरी हुई है। लेकिन जनता सवाल पूछ रही है कि क्या इस देरी की जवाबदेही तय होगी?
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भविष्य की राह—मेरठ के लिए इसके मायने

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मवाना रोड का यह विस्तार केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह मेरठ के विस्तार को गति देने वाला कदम है।
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    कनेक्टिविटी: मवाना रोड हस्तिनापुर और बिजनौर जैसे प्रमुख क्षेत्रों को मेरठ शहर से जोड़ती है। चौड़ीकरण से अंतर-जनपदीय यातायात सुगम होगा।
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    रियल एस्टेट बूम: सड़क चौड़ी होने और डिवाइडर बनने से यशोदा कुंज और उसके आगे की कॉलोनियों में प्रॉपर्टी के रेट बढ़ेंगे और बसावट घनी होगी।
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    व्यापारिक लाभ: जाम खत्म होने से मवाना रोड के व्यापारियों को ग्राहकों की आवाजाही में आसानी होगी, जिससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
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काम में तेजी और गुणवत्ता जरूरी

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योजना कागज पर शानदार है। 14 से 17 मीटर चौड़ी सड़क, नई आरसीसी पुलिया और डिवाइडर—यह सब मेरठ की जरूरत है। लेकिन इतिहास गवाह है कि सरकारी परियोजनाओं में सबसे बड़ी बाधा 'लेटलतीफी' होती है।
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जिस तरह कमिश्नरी आवास से कसेरूखेड़ा तक डिवाइडर का काम अपने तय समय से पीछे चल रहा है, उसे देखते हुए प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि नए प्रोजेक्ट में ऐसी लापरवाही न हो।
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जनता को 'चौड़ी सड़क' चाहिए, लेकिन 'लंबा इंतजार' नहीं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस नई परियोजना को कितनी फुर्ती और गुणवत्ता के साथ धरातल पर उतारता है।
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(मेरठ के विकास और शहर की हर हलचल पर पैनी नजर रखने के लिए पढ़ते रहें खबरीलाल)
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