सावन का पवित्र महीना आते ही चारों ओर "बम-बम भोले" और "हर-हर महादेव" के जयकारे गूंजने लगते हैं। शिवभक्त (कांवड़िये) मीलों का दुर्गम और थका देने वाला सफर तय करके अपने आराध्य भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए निकलते हैं। इन कांवड़ियों की इस कठिन पदयात्रा को सुगम और कष्टरहित बनाने के लिए समाज के कई वर्ग आगे आते हैं। इसी सेवाभाव और समर्पण की एक अनूठी मिसाल पिछले एक दशक से मेडिकल कॉलेज के गेट नंबर 1 के ठीक बाहर देखने को मिल रही है। यहाँ एक विशाल और सुसज्जित कांवड़ सेवा शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जो शिवभक्तों के लिए किसी नखलिस्तान (Oasis) से कम नहीं है।READ ALSO:-मर्डर मिस्ट्री: तमिलनाडु एक्सप्रेस में लाल ट्रॉली बैग से टपकता खून, अंदर कटर से कटे 12 टुकड़े; तेजाब से झुलसाए अंग, चेन्नई रेलवे स्टेशन के CCTV में दिखा संदिग्ध जोड़ा
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इस शिविर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि यह अपनों को दी जाने वाली एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि भी है। यह पूरा सेवा कार्य स्वर्गीय पंo सौरभ मुखिया की पावन याद में समर्पित है। पिछले 10 वर्षों से लगातार राजकुमार शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, पुनीत शर्मा, नितिन शर्मा और प्रवेश शर्मा के साथ उनकी पूरी टीम दिन-रात एक करके इस शिविर के माध्यम से शिवभक्तों की निस्वार्थ सेवा कर रही है।
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स्वर्गीय पंo सौरभ मुखिया की स्मृति में एक दशक का संकल्प

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किसी भी सामाजिक कार्य को एक या दो साल तक चलाना आसान होता है, लेकिन एक पूरे दशक (10 साल) तक उसी ऊर्जा, उसी समर्पण और उसी भव्यता के साथ सेवा कार्य को जारी रखना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह शिविर स्वर्गीय पंo सौरभ मुखिया के आदर्शों और उनके द्वारा दिखाए गए सेवा के मार्ग का जीता-जागता प्रमाण है।
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आयोजन समिति के मुख्य सदस्य राजकुमार शर्मा और सुरेंद्र शर्मा का कहना है कि, "पंo सौरभ मुखिया हमेशा समाज सेवा और धार्मिक कार्यों में अग्रणी रहते थे। उनके जाने के बाद उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए हमने इस कांवड़ शिविर की शुरुआत की थी। देखते ही देखते शिवभक्तों का आशीर्वाद मिलता गया और आज यह शिविर अपने सफलतम 10वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।"
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पुनीत शर्मा, नितिन शर्मा और प्रवेश शर्मा जैसे युवा साथियों ने इस शिविर की व्यवस्थाओं को आधुनिक और सुविधाजनक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। युवाओं की यह टीम 24 घंटे शिफ्टों में काम करती है ताकि रात के अंधेरे में या भोर में आने वाले किसी भी कांवड़िये को कोई असुविधा न हो।
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शिविर में शिवभक्तों के लिए उपलब्ध आधुनिक सुविधाएं

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कांवड़ियों की यात्रा बेहद कष्टदायी होती है। नंगे पैर मीलों चलने के कारण उनके पैरों में छाले पड़ जाते हैं और शरीर थकान से चूर हो जाता है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, मेडिकल कॉलेज गेट नंबर 1 पर लगे इस शिविर में हर वो सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिसकी एक थके हुए यात्री को आवश्यकता होती है।
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    विश्राम की उत्तम व्यवस्था: शिविर में बड़े-बड़े वाटरप्रूफ टेंट लगाए गए हैं, जहाँ गद्दे, चादर और पंखों/कूलर की पर्याप्त व्यवस्था है। यहाँ शिवभक्त आराम से लेटकर अपनी थकान मिटा सकते हैं।
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    24 घंटे शुद्ध और सात्विक भोजन: शिविर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यहाँ का भंडारा है। यहाँ चौबीसों घंटे शुद्ध, सात्विक और पौष्टिक भोजन (जैसे फल, दूध, चाय, नाश्ता और भरपेट खाना) कांवड़ियों को परोसा जाता है।
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    तत्काल चिकित्सा और फर्स्ट एड: मेडिकल कॉलेज के करीब होने के कारण और आयोजन समिति की दूरदर्शिता के चलते यहाँ एक बेहतरीन फर्स्ट एड और चिकित्सा कॉर्नर बनाया गया है। पैरों के छालों पर मलहम लगाने से लेकर, दर्द निवारक दवाइयां, स्प्रे और मालिश करने वाले स्वयंसेवक यहाँ हर पल मुस्तैद रहते हैं।
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    नहाने और स्वच्छ पेयजल की सुविधा: कांवड़ियों के स्नान ध्यान के लिए साफ़-सुथरे अस्थायी स्नानागार (बाथरूम) बनाए गए हैं। साथ ही शीतल और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था भी की गई है ताकि उन्हें गर्मी और उमस से राहत मिल सके।
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आकर्षण का केंद्र: मुज़फरा बागड़पुर की भव्य कांवड़ का सम्मान

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सोमवार को इस शिविर का माहौल उस वक्त और भी ज्यादा भक्तिमय और उत्सवपूर्ण हो गया, जब मुज़फरा बागड़पुर से आई एक बेहद ही सुसज्जित और विशाल कांवड़ ने शिविर में प्रवेश किया। इस कांवड़ की सजावट, इसमें लगी रंग-बिरंगी लाइटें, भगवान शिव की मनमोहक झांकी और इसे लाने वाले कांवड़ियों का उत्साह देखते ही बनता था।
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सड़क से गुजरने वाला हर व्यक्ति ठिठक कर इस कांवड़ को निहारने लगा। मुज़फरा बागड़पुर के इन कांवड़ियों की अपार श्रद्धा और उनकी रचनात्मकता को देखते हुए शिविर के आयोजकों ने उनका भव्य स्वागत किया।
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राजकुमार शर्मा, सुरेंद्र शर्मा और पूरी टीम ने मुज़फरा बागड़पुर के कांवड़िया दल को मंच पर आमंत्रित किया। वहां शिव जयकारों के बीच फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया गया और एक विशेष 'प्रतीक चिन्ह' (Memento) देकर उन्हें सम्मानित किया गया। आयोजन समिति का मानना है कि इस तरह के सम्मान से शिवभक्तों का मनोबल बढ़ता है और समाज में धर्म तथा कला के प्रति एक सकारात्मक संदेश जाता है।
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सम्मान पाकर मुज़फरा बागड़पुर के कांवड़ियों के चेहरे पर जो ख़ुशी और संतुष्टि थी, उसने वहाँ मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया। उन्होंने भी आयोजकों को उनके 10 साल के इस अभूतपूर्व सेवा कार्य के लिए साधुवाद दिया और भगवान भोलेनाथ से शिविर की निरंतर सफलता की प्रार्थना की।
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समाज के लिए एक प्रेरणादायक पहल

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आज के भागदौड़ भरे दौर में, जहाँ लोगों के पास अपने लिए समय नहीं है, वहाँ स्वर्गीय पंo सौरभ मुखिया की याद में राजकुमार शर्मा, पुनीत, नितिन, प्रवेश और उनके साथियों द्वारा किया जा रहा यह कार्य पूरे समाज के लिए एक मिसाल है। यह शिविर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह आपसी भाईचारे, सेवा और सामूहिकता का भी प्रतीक बन चुका है।
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मेडिकल कॉलेज के गेट नंबर 1 का यह इलाका इन दिनों केवल एक सड़क नहीं, बल्कि शिवभक्तों की सेवा का एक महाकुंभ बन गया है। जब तक शिवरात्रि का जलाभिषेक संपन्न नहीं हो जाता, यह शिविर इसी अनवरत ऊर्जा के साथ शिवभक्तों की राहों को आसान बनाता रहेगा। भोलेनाथ की कृपा और इन युवाओं की मेहनत से यह 10 वर्षों की यात्रा भविष्य में और भी वृहद रूप लेगी, ऐसी पूरी उम्मीद है।
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