मेरठ (Khabreelal News Bureau): त्योहार खुशियां लेकर आते हैं, लेकिन मेरठ वासियों के लिए मकर संक्रांति और लोहड़ी का पर्व 'डर' का पर्याय बन गया है। आज (13 जनवरी) लोहड़ी है और कल मकर संक्रांति मनाई जाएगी, लेकिन शहर का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों के साथ-साथ 'खूनी डोर' यानी चाइनीज मांझे (Chinese Manjha) से भर गया है।READ ALSO:-Meerut Transformation: मेरठ में ट्रैफिक और सुरक्षा का 'मास्टरस्ट्रोक'; सभी रैपिड स्टेशनों पर पुलिस चौकियां, 60 चौराहे होंगे चौड़े, 'तीसरी आँख' से पकड़े जाएंगे चोर
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अगर आप आज दोपहिया वाहन (Bike/Scooty) से घर से बाहर निकल रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है। शहर की हवाओं में नायलॉन और कांच से बना यह जानलेवा मांझा अदृश्य हथियार की तरह तैर रहा है। जरा सी लापरवाही आपकी गर्दन पर आरा चला सकती है। प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद, मेरठ के बाजारों में मौत का यह सामान धड़ल्ले से बिक रहा है।
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सड़क पर खतरा: ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं हर तरफ मौत का साया

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मेरठ की सड़कों पर चलना अब किसी जंग लड़ने से कम नहीं है। पहले वाहन चालकों को सिर्फ दाएं-बाएं या पीछे से आ रहे ट्रैफिक का ध्यान रखना पड़ता था, लेकिन अब खतरा 'आसमान' से लटक रहा है।
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चाइनीज मांझा, जिसे प्लास्टिक मांझा या नायलॉन मांझा भी कहा जाता है, इतना बारीक और पारदर्शी होता है कि तेज रफ्तार बाइक सवार को यह दूर से दिखाई नहीं देता। जब तक नजर पड़ती है, तब तक यह हेलमेट के वाइजर या सीधे गर्दन से टकरा चुका होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मांझा स्ट्रेचेबल (खिंचने वाला) होता है और टूटता नहीं है। जब यह शरीर के संपर्क में आता है, तो त्वचा को कागज की तरह काट देता है। कई मामलों में तो यह सांस की नली (Windpipe) तक को काट चुका है।
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प्रशासन की नींद और फाइलों में सिमटे दावे

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हर साल की तरह इस बार भी प्रशासन और पुलिस ने चाइनीज मांझे पर रोक लगाने के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। शहर के कई प्रमुख बाजारों में कोड वर्ड में यह मांझा बेचा जा रहा है।
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इन इलाकों में हो रही है बिक्री (Hotspots of Chinese Manjha): सूत्रों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, मेरठ के निम्नलिखित इलाकों में प्रतिबंध के बावजूद मांझा आसानी से उपलब्ध है:
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    खत्ता रोड (Khatta Road)
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    गोलाकुआं (Golakuan)
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    खैरनगर (Khairnagar)
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    लालकुर्ती (Lalkurti)
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    घंटाघर और कोटला (Ghantaghar & Kotla)
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    लिसाड़ी गेट और शाहपीर गेट
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    शास्त्रीनगर और हापुड़ रोड
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हैरानी की बात यह है कि त्योहार सिर पर है, पतंगें आसमान में हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई बड़ी छापेमारी (Crackdown) अभियान नहीं चलाया गया है। यह ढिलाई आम जनता की जान पर भारी पड़ रही है।
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'खूनी' टाइमलाइन: जब मांझे ने मेरठ को दहला दिया

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मेरठ में पिछले कुछ महीनों में हुई घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि खतरा कितना बड़ा है। ये महज आंकड़े नहीं, बल्कि वो दर्दनाक हादसे हैं जिन्होंने कई परिवारों को जिंदगी भर का जख्म दे दिया।
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    16 फरवरी (गर्दन कटी): मेरठ-परीक्षितगढ़ मार्ग पर दतावली-किनानगर के पास एक किसान अपनी बाइक से खेत जा रहा था। उसने हेलमेट पहन रखा था, लेकिन मांझा हेलमेट के नीचे से गर्दन पर जा लगा। खून से लथपथ किसान किसी तरह गांव पहुंचा और उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ा।
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    12 फरवरी (हड्डी टूटी, उंगलियां कटीं): दिल्ली रोड पर माधवपुरम गेट के पास एक बाइक सवार युवक पेड़ पर लटके मांझे की चपेट में आ गया। गर्दन बचाने के लिए उसने हाथ लगाया तो दो उंगलियां कट गईं। संतुलन बिगड़ने से वह डिवाइडर से टकराया, जिससे उसके हाथ-पैर की हड्डी भी टूट गई।
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    15 फरवरी (लेखाकार घायल): बच्चा पार्क जैसे व्यस्त इलाके में जिला बेसिक कार्यालय के लेखाकार प्रदीप चौहान (निवासी गोल्डन एवेन्यू) शाम 5 बजे ड्यूटी से लौटते वक्त मांझे का शिकार हो गए। उनकी उंगली कट गई।
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    28 मार्च (स्क्रैप कारोबारी): हापुड़ रोड पर लक्खीपुरा निवासी शहजाद (स्क्रैप कारोबारी) कपड़े खरीदने जा रहे थे। अचानक मांझे ने उनकी गर्दन को अपनी गिरफ्त में ले लिया। उन्हें गंभीर हालत में मुस्कान हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा।
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    8 अक्टूबर (शास्त्रीनगर): पॉश इलाके शास्त्रीनगर के एल-ब्लॉक में एक बाइक सवार की गर्दन मांझे में फंस गई। गर्दन बचाने की कोशिश में उनके हाथ का अंगूठा भी कट गया।
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    28 सितंबर (खूनी पुल): यह नाम ही अब डराने लगा है। खूनी पुल पर जीआईसी के सामने बंटी की पत्नी करिश्मा स्कूटी पर पीछे बैठी थीं। मांझा उनकी गर्दन पर आया। किस्मत अच्छी थी कि गर्दन ज्यादा नहीं कटी, लेकिन हाथ की उंगली कट गई और गर्दन पर 7 टांके आए।
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एसपी सिटी का बयान: "अब होगी सख्त कार्रवाई"

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बढ़ते हादसों और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आता दिख रहा है। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह (SP City Ayush Vikram Singh) ने बताया, "चाइनीज मांझे की रोकथाम के लिए सभी थानों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। हमारी टीमें सादे कपड़ों में निगरानी कर रही हैं। जिन दुकानों पर चाइनीज मांझा बिकने की सूचना मिलेगी, वहां छापेमारी की जाएगी। बेचने वालों के साथ-साथ इसका इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई (Legal Action) होगी।"
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इंसान ही नहीं, बेजुबान भी हैं निशाने पर

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चाइनीज मांझा सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि हवा में उड़ने वाले परिंदों के लिए भी 'फांसी का फंदा' है। पेड़ की टहनियों या बिजली के तारों में उलझा मांझा महीनों तक वहां रहता है। जब कोई पक्षी वहां बैठता है या उड़ता है, तो उसके पंख और गला इसमें कट जाते हैं। वेटरनरी डॉक्टरों के मुताबिक, मकर संक्रांति के आसपास पक्षियों के घायल होने के मामले 200% तक बढ़ जाते हैं।
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सावधानी ही बचाव है: सड़क पर निकलने से पहले ये करें (Safety Tips)

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जब तक प्रशासन इसे पूरी तरह बंद नहीं करा पाता, तब तक अपनी सुरक्षा आपके हाथ में है। 'खबरीलाल' अपने पाठकों से अपील करता है कि अगले 3-4 दिन सड़क पर चलते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
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    गर्दन को कवर करें: घर से निकलते समय गले में मफलर (Muffler), स्कार्फ या गमछा कसकर लपेटें। यह मांझे को सीधे त्वचा के संपर्क में आने से रोकेगा।
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    फुल फेस हेलमेट: हाफ हेलमेट के बजाय फुल फेस हेलमेट पहनें और उसका वाइजर (शीशा) हमेशा बंद रखें।
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    बच्चों की सुरक्षा: अगर आप बच्चे को बाइक पर आगे बैठा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि उनका गला और चेहरा पूरी तरह ढका हो। बच्चों की गर्दन नाजुक होती है, मांझा उसे सेकंडों में काट सकता है।
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    अचानक ब्रेक न लगाएं: अगर आपको लगे कि मांझा आपके पास आ गया है, तो हड़बड़ी में हाथ से उसे हटाने की कोशिश न करें और न ही गाड़ी तेज भगाएं। गाड़ी धीरे रोकें। तेज गति से मांझा आरी की तरह काम करता है।
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    U-शेप का सेफ्टी गार्ड: अगर संभव हो तो अपनी बाइक पर लोहे का यू-शेप (U-Shape) वायर लगवाएं। यह मांझे को राइडर तक पहुंचने से पहले ही रोक देता है।
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नागरिक धर्म निभाएं

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यह लड़ाई सिर्फ प्रशासन की नहीं है। अगर आप किसी को चाइनीज मांझे से पतंग उड़ाते देखें, तो उसे टोकें। अगर वह न माने, तो पुलिस को 112 नंबर पर सूचना दें। अगर आपको सड़क पर, पार्कों में या अपनी छत पर कहीं भी यह मांझा पड़ा मिले, तो उसे डस्टबिन में डालकर नष्ट कर दें या जला दें, ताकि वह किसी और के लिए खतरा न बने।
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नागरिक जिम्मेदारी: सिर्फ सरकार को न कोसें

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यह समस्या केवल प्रशासन की नहीं है। एक समाज के रूप में हमें भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
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    मां-बाप ध्यान दें: अपने बच्चों को चाइनीज मांझा न दिलाएं। अगर बच्चा जिद करता है, तो उसे इसके खतरे समझाएं।
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    टोकें और रोकें: अगर आप किसी को चाइनीज मांझे से पतंग उड़ाते देखें, तो उसे सख्ती से रोकें। नहीं मानने पर पुलिस को सूचित करें।
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    नष्ट करें: अगर आपको सड़क पर, छत पर या पार्क में चाइनीज मांझा पड़ा मिले, तो उसे जला दें या डस्टबिन में फेंक दें। उसे खुला न छोड़ें, क्योंकि यह बेजुबान पक्षियों (Birds) के पंख और पैर काट देता है।
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मकर संक्रांति सूर्य की उपासना और दान-पुण्य का पर्व है। इसे किसी की मौत का कारण न बनने दें। चंद रुपयों के लालच में चाइनीज मांझा बेचने वाले और 'पेंच लड़ाने' के शौक में इसका इस्तेमाल करने वाले लोग यह भूल जाते हैं कि उनकी यह डोर किसी परिवार की खुशियों का गला घोंट रही है। मेरठ प्रशासन को भी अब कुंभकर्णी नींद से जागकर सख्त कदम उठाने होंगे, वरना फाइलों में दर्ज ये हादसे महज आंकड़े बनकर रह जाएंगे।
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सुरक्षित रहें, सतर्क रहें और 'देशी धागे' (Cotton Thread) के साथ ही पर्व मनाएं।
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[डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट स्थानीय पुलिस एडवाइजरी और हालिया घटनाओं पर आधारित है। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत पुलिस (112) या एम्बुलेंस (108) को कॉल करें।]
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