अपराधी पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए आए दिन नए-नए हथकंडे अपनाते हैं। हस्तिनापुर के दूधली खादर गांव में भी ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक रिहायशी इलाके में बिल्डिंग को बाकायदा डेयरी का व्यवसाय चलाने के नाम पर किराए पर लिया गया था। बाहर से देखने पर यह एक सामान्य डेयरी प्रतीत होती थी, जिससे स्थानीय लोगों या पड़ोसियों को कभी कोई शक नहीं हुआ। लेकिन इस शांत आवरण के पीछे मौत का एक बड़ा और अवैध व्यापार फल-फूल रहा था। अंदर के कमरों में दूध या डेयरी उत्पादों की जगह अत्याधुनिक ऑटोमैटिक मशीनें रात-दिन नकली सिगरेट उगल रही थीं। पुलिस की खुफिया टीम को जब इस संदिग्ध गतिविधि की भनक लगी, तो उन्होंने पूरी योजना के साथ इस अवैध कारखाने पर धावा बोल दिया।READ ALSO:-निशु आजाद केस में बड़ा एक्शन! स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी; कोर्ट ने दी एक दिन की पुलिस हिरासत
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ब्रांडेड 'गोल्ड फ्लैक' कंपनी के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा इस फैक्ट्री में केवल बीड़ी या साधारण सिगरेट नहीं, बल्कि देश की जानी-मानी और लोकप्रिय ब्रांड 'गोल्ड फ्लैक' (Gold Flake) के नाम से प्रीमियम सिगरेट का उत्पादन किया जा रहा था। आरोपी इतने शातिर थे कि उन्होंने गोल्ड फ्लैक कंपनी के नाम से हुबहू फर्जी रैपर, डिब्बियां और होलोग्राम तक तैयार कर रखे थे, ताकि बाजार में आम ग्राहक या दुकानदार असली और नकली के बीच का फर्क ही न समझ सकें। जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों ने पाया कि इस अवैध निर्माण इकाई के पास न तो कोई वैध जीएसटी (GST) रजिस्ट्रेशन था और न ही तंबाकू या सिगरेट निर्माण का कोई सरकारी लाइसेंस। यह पूरा खेल टैक्स चोरी, कॉपीराइट उल्लंघन और सीधे तौर पर भारत सरकार के राजस्व को करोड़ों रुपये का चूना लगाने की एक सोची-समझी साजिश थी।
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छापेमारी में उड़े पुलिस के होश: भारी मात्रा में माल और मशीनें बरामद जब हस्तिनापुर पुलिस की टीम ने इस कथित डेयरी का दरवाजा खोला, तो अंदर का नजारा देखकर खुद खाकी वर्दी वाले भी दंग रह गए। वहां एक पूरा औद्योगिक सेटअप लगा हुआ था। पुलिस ने फैक्ट्री से बरामदगी की जो सूची तैयार की है, वह इस अवैध कारोबार के विशाल पैमाने को दर्शाती है। मौके से 94 कार्टन पूरी तरह से तैयार गोल्ड फ्लैक प्रीमियम सिगरेट, 13 कार्टन खुली (अधबनी) सिगरेट, 19 कार्टन गोल्ड फ्लैक रोल और 124 कार्टन गोल्ड फ्लैक ब्लैक सिगरेट बरामद की गई हैं। इसके अलावा पैकेजिंग के लिए रखे गए 15 आउटर रोल रैपर कार्टन, तीन कार्टन सिगरेट फिल्टर और सिगरेट बनाने वाली महंगी और आधुनिक ऑटोमैटिक मशीनें भी पुलिस ने जब्त कर ली हैं। इतनी बड़ी मात्रा में माल का मिलना इस बात का साफ संकेत है कि यहां से रोजाना बड़े पैमाने पर नकली माल की सप्लाई की जा रही थी।
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दिल्ली से जुड़े हैं इस काले कारोबार के तार, मास्टरमाइंड गिरफ्तार हैरानी की बात यह है कि इस पूरी फैक्ट्री का संचालन किसी स्थानीय अपराधी द्वारा नहीं, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली में बैठे एक मास्टरमाइंड द्वारा किया जा रहा था। पुलिस ने मौके से मुख्य आरोपी को धर दबोचा है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान रवि किशोर (पुत्र मनसुख लाल) के रूप में हुई है, जो नेहरू नगर, दक्षिणी दिल्ली (South Delhi) का निवासी है। 52 वर्षीय रवि किशोर इस पूरे सिंडिकेट का अहम हिस्सा माना जा रहा है। एक दिल्ली के निवासी का उत्तर प्रदेश के हस्तिनापुर जैसे सुदूर ग्रामीण इलाके में आकर डेयरी के नाम पर फैक्ट्री लगाना यह साबित करता है कि अपराधियों का नेटवर्क कितना गहरा और संगठित हो चुका है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि रवि किशोर को यहां जगह दिलाने और स्थानीय स्तर पर संरक्षण देने में किन लोगों की भूमिका रही है।
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दर्ज हुई एफआईआर, इन गंभीर धाराओं में होगी सख्त कार्रवाई पुलिस ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। भारी मात्रा में अवैध माल और उपकरण जब्त करने के बाद, पुलिस ने इस संबंध में थाना हस्तिनापुर में मुकदमा अपराध संख्या 203/2026 दर्ज कर लिया है। आरोपी रवि किशोर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 342, 338, और 340(2) जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इसके साथ ही, ब्रांडेड कंपनी के नाम का दुरुपयोग करने पर कॉपीराइट एक्ट की धारा 63/65 के तहत भी कड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ आवश्यक कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई है और उसे अदालत के समक्ष पेश कर रिमांड की मांग की जाएगी, ताकि उससे और भी राज उगलवाए जा सकें।
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इन जांबाज पुलिसकर्मियों की मुस्तैदी से हुआ भंडाफोड़ इस पूरे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने और एक बड़े आर्थिक और स्वास्थ्य अपराध को रोकने का श्रेय हस्तिनापुर पुलिस की मुस्तैद टीम को जाता है। सटीक मुखबिरी और शानदार रणनीति के चलते ही यह अवैध फैक्ट्री पकड़ी जा सकी। इस महत्वपूर्ण कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में वरिष्ठ उपनिरीक्षक सतीश कुमार, उपनिरीक्षक उमेश चौधरी, मनीष कुमार, विजय प्रकाश और शिवेन्द्र सिंह की अहम भूमिका रही। उच्चाधिकारियों ने भी टीम के इस उत्कृष्ट कार्य की सराहना की है।
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आगे की जांच: सप्लाई चेन और नेटवर्क का पर्दाफाश होना बाकी फिलहाल पुलिस की जांच यहीं खत्म नहीं हुई है। यह तो केवल हिमखंड का सिरा है। पुलिस अब आरोपी रवि किशोर को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि सिगरेट बनाने का कच्चा माल, तंबाकू और फर्जी रैपर कहां से छापे और मंगाए जाते थे। इसके अलावा, सबसे बड़ा सवाल यह है कि यहां से तैयार होने वाली नकली गोल्ड फ्लैक सिगरेट की सप्लाई मेरठ, दिल्ली-एनसीआर या पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किन-किन बड़े बाजारों और थोक व्यापारियों को की जा रही थी। आने वाले दिनों में पुलिस उन डीलरों और सप्लायर्स पर भी शिकंजा कस सकती है, जो चंद रुपयों के लालच में इस नकली और जहरीली सिगरेट को बाजार में खपाने का काम कर रहे थे। इस मामले में आगे और भी कई बड़ी गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।
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